लंदन: विजय माल्या का नहीं था लोन चुकाने का इरादाः सीपीएस

गुरुवार को प्रत्यर्पण जांच के दौरान विजय माल्या के वकील ने बचाव का दावा किया।

  |   Updated On : December 08, 2017 04:23 AM
विजय माल्या (फाइल फोटो)

विजय माल्या (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:  

गुरुवार को प्रत्यर्पण जांच के दौरान शराब कारोबारी विजय माल्या के वकील ने बचाव का दावा किया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की अगुवाई वाली भारतीय बैंकों की एक कंसोर्टियम ने शराब कारोबारी विजय माल्या के एक प्रस्ताव को 2016 में खारिज कर दिया था क्योंकि उसे दिए गए ऋण का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा वापस लेना था।

लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में विजय माल्या के खिलाफ तीसरे दिन भी सुनवाई जारी रही। माल्या के वकील ने प्रत्यर्पण की सुनवाई में बैंकिंग विशेषज्ञ पॉल रेक्स को बतौर गवाह के रुप में कोर्ट में पेश किया गया।

पॉल रेक्स को गवाही के लिए इसलिए पेश किया गया, ताकि यह निर्धारित हो सके कि 61 वर्षीय माल्या को मनीलॉन्ड्रिंग मामले में भारतीय बैंकों के 9000 करोड़ नहीं चुकाने पर मुकदमा चलाने के लिए भारत लाया जा सके।

माल्या की वकील क्लेयर मोंटगोमरी ने अपनी शुरुआती दलीलों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत सरकार की ओर से अभियोजन पक्ष क्राउन प्रोसेक्यूशन सर्विस (सीपीएस) उसके मुवक्किल के खिलाफ प्रथमदृष्टया धोखाधड़ी का केस साबित करने में विफल रहा।  उनका तर्क था कि भारत में माल्या का प्रत्यर्पण एक राजनीतिक लाभ उठाने का मुद्दा बन गया है।

स्वतंत्र बैंकिंग एक्सपर्ट के तौर पर 20 सालों से काम कर रहे पॉल रेक्स ने अपनी गवाही में कहा कि माल्या ने अपनी डूबती एयरलाइंस किंगफिशर को बचाने के लिए भारतीय बैंकों से कर्ज लिया था। माल्या का 'धोखाधड़ी करने' का कोई इरादा नहीं था।

वहीं अभियोजन पक्ष सीपीएस का कहना है कि माल्या को मालूम था कि किंगफिशर एयरलाइंस का डूबना तय है, इसलिए लोन चुकाने का उनका इरादा ही नहीं था।

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मोंटगोमरी यह साबित करने की कोशिश कर रही हैं कि किंगफिशर एयरलाइंस वर्ष 2009-10 में वैश्विक आर्थिक संकट के कारण मुश्किल हालात से गुजर रही थी, इसलिए लोन नहीं चुका पाने के कई कारण थे, जो कंपनी के नियंत्रण से बाहर थे।

न्यायाधीश ने दोनों पक्षों से कहा है कि इस सप्ताह के अंत तक भारतीय अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत सबूतों के खिलाफ और माल्या खिलाफ दस्तावेज जमा करें।

लेकिन सरकारी सूत्रों ने दावा किया है कि सबूत एक निर्धारित टेम्प्लेट पर आधारित है लेकिन दस्तावेजों के अंदर के कंटेंट को 'टेम्पलेट' के रूप में वर्णित नहीं किया जा सकता है।

गौरतलब है कि माल्या मार्च, 2016 से लंदन में हैं। उन्हें प्रत्यर्पण वारंट के आधार पर अप्रैल में स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने गिरफ्तार किया था और अभी वह 650000 पाउंड के मुचलके पर जमानत पर हैं। उनकी प्रत्यर्पण जांच 14 दिसंबर को खत्म होने वाली है।

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First Published: Friday, December 08, 2017 04:15 AM

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