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अब कांग्रेस हो रही मजबूत...लेकिन बागडोर किसके हाथ में राहुल गांधी या प्रियंका ?

प्रियंका गांधी एक अलग ही रणनीति पर चल रही है. वो खुद को लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा ले जा रही हैं. जबकि राहुल गांधी खुद को जननेता के रूप में खुद को स्थापित नहीं कर पा रहे हैं.

भाषा और इतिहास भूल गए तो अब देश भी भूल जाओ भारतीयों...

भाषा और इतिहास भूलना किसी भी देश की आखिरी भूल साबित होता है. मैं देखता हूँ कि कट्टरपंथियों को हर झूठ को इस्तेमाल करते हुए कि वो क्या चाहते है, गूंगी, बाहरी, और अंधी दुनिया भी जानती है कि वो क्या चाहते है.

हिंदू होना ही लड़कियों के लिए बन गया गुनाह, इंसानियत होती रही शर्मसार

कुमिल्ला जिला की दाउकान्दी उप जिला सवाहन गांव में 1979 की 8 फरवरी को सुबह हिंदु ऋषि संप्रदाय पर करीब चार सौ लोगों ने अचानक हमला किया.

...जब रात के सन्नाटे में तबाह हो गईं कई जिंदगियां, लोग आज भी नहीं भूले वो खौफनाक मंजर

सच को धुंधला करने से किस को क्या हासिल हुआ इस पर चर्चा तो तब हो जब सच पर कोई बात करे. डरे हुए लोग शहर दर शहर जला सकते है और प्रेस के लोग खुलेआम गाली दे सकते है.

पीएम मोदी ने रामलीला मैदान में जो कहा क्या उससे बदल जाएगा दिल्ली और बंगाल के लोगों का मन?

दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं. चुनाव को देखते हुए रविवार को पीएम मोदी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आभार रैली की. इस रैली से पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली और पश्चिम बंगाल दोनों को साध लिया.

नागरिकता संशोधन बिल पर हंगामा है क्यों बरपा! पढ़ें पूरा विश्लेषण

कांग्रेस के सांसद आनंद शर्मा ने राज्यसभा में सरकार को घेरते हुए कहा कि ये बिल प्रस्तावना के खिलाफ है.

कानून अंधा है तो एनकाउंटर गलत कैसे? आखिर इस दरिंदगी की दवा क्या है...

हैदराबाद एनकाउंटर के बाद अब कई लोग मांग कर रहे हैं कि उन्नाव कांड में भी इंसाफ़ का वही तरीका आजमाया जाए, जो हैदराबाद के हैवानों को ख़त्म करने के लिए इस्तेमाल किया गया था.

Hyderabad Justice: हैदराबाद एनकांउटर पर जश्न का माहौल, बताता है कि न्याय में देरी से बतौर समाज हम आजिज आ चुके हैं

हैदराबाद पुलिस वालों ने तो आरोपियों की मदद करने की कोशिश, जी हां, अगर आपको याद हो तो इन आरोपियों के गिरफ्तारी के बाद जेल ले जाते वक्त पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया गया था.

बेहतरीन अभिनय से फिल्मों में अपनी अलग जगह बनाने वाली कोंकणा सेन की पहचान 'बिन ब्याही मां' तक ही सीमित नहीं

बिन ब्याही मां, शादी से पहले कोख में आया बच्चा, बनी कुंवारी मां, शादी से पहले हुई थी प्रेंगनेट आदि आदि आदि. इसी हेडलाइन के साथ आज अभिनेत्री कोंकणा सेन को बर्थडे विश किया गया था.

गर मांस के जलने की बदबू भी आपको परेशां नहीं करे...तो सोच बदलिए शुरुआत घर से करें

अपने लड़कों से यह कहना शुरू करना होगा...'तुम भी अंधेरा होने से पहले घर लौट आना. जमाना खराब है. कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारी सोच भी बदल जाए और तुम किसी मासूम को अपने पुरुषोचित्त दंभ से परिचित कराने लगो'.

दुर्गा की 'अवतार' नहीं है इस देश में सुरक्षित, जिम्मेदार कौन?

आखिर क्यों दुर्गा की 'अवतार' के साथ इतना अत्याचार होता है? जिम्मेदार वो खुद हैं या फिर वो समाज जहां लड़कियों को सिर्फ जिस्म के तौर पर देखते हैं.

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