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हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रायगराज में जागा प्रशासन, हॉस्टलों में की छापेमारी

Manvendra Singh  |   Updated On : April 18, 2019 10:32:43 PM
प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो (Photo Credit : )

नई दिल्ली:  

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पूर्व छात्र की हत्या का मामला तूल पकड़ रहा है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सर पीसी बनर्जी हॉस्टल (PCB) में छात्र रोहित शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया है. हाईकोर्ट ने हॉस्टलों में अपराध को लेकर कुलसचिव को नोटिस जारी करके रिपोर्ट मांगी है. साथ ही कोर्ट ने प्रमुख सचिव (गृह), मंडलायुक्त प्रयागराज, डीएम व एसएसपी प्रयागराज से रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट ने इस संबंध में 22 अप्रैल को कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने की बात की है.

कोर्ट ने एसपी से यह भी पूछा कि हॉस्टलों में आपराधिक घटनाएं आखिर कैसे हो रही हैं. भारी दबाव के बीच पुलिस प्रशासन की टीम ने बुधवार को ताराचंद हॉस्टल में छापेमारी की. जहां पुलिस प्रशासन को 58 कमरों में अवैध छात्रों का कब्जा मिला. एक नकली पिस्टल, देशी बम बनाने के लिए सुतली बम और बारूद भी बरामद हुए. पुलिस ने सैकड़ों अवैध कूल को तोड़ दिया. छात्रों ने न्यूज स्टेट के साथ कई तस्वीरें साझा की हैं. छात्रों ने बताया कि पुलिस ने कई छात्रों को बेवजह भी परेशान किया. कई छात्रों का लैपटॉप भी तोड़ दिया. छात्रावास में खड़ी लग्जरी गाड़ियों को पुलिस ने तोड़ा है.

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पुलिस ने रोहित शुक्ला की हत्या में शामिल एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए आरोपी के पास से जिंदा कारतूस और तमंचा बरामद किया गया है. जिस आरोपी को पुलिस ने पकड़ा है उस पर 25 हजार का ईनाम घोषित किया गया था. वारदात में शामिल कई अभियुक्त अभी भी फरार चल रहे हैं. पुलिस के मुताबिक ठेकेदारी के रुपयों के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ. आपको बता दें कि इस घटना को देखते हुए इलाबाहाद हाईकोर्ट ने कहा था कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय अपराधियों का पनाहगाह बन गया है.

हत्याकांड का गवाह था रोहित

रोहित शुक्ला इलाहाबाद के बारा का रहने वाला था. कुछ समय से वह परिवार के साथ जॉर्ज टाउन में रहता था. इलाहाबाद में छात्र उसे बीटू शुक्ला के नाम से बुलाते थे. कुछ महीने पहले पीसीबी हॉस्टल के अंदर पूर्व छात्र नेता सुमित शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. सुमित शुक्ला हत्याकांड में रोहित शुक्ला एक अहम गवाह था.

हॉस्टलों मे नहीं रहते वार्डेन, अधीक्षक

इविवि प्रशासन की ओर से छात्रावासों के अधीक्षक और वार्डेन के लिए कैंपस में आवास की व्यवस्था की गई है. लेकिन इसके बाद भी वे वहां नहीं रहते. छात्रावासों में कौन आ रहा है, कोन जा रहा है, किस कमरे में कौन कब्जा करके रह रहा है. इसे देखने वाला कोई नहीं है. अवैध और वैध छात्रों के पहचान की कोई व्यवस्था नहीं है.

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कई बार पात्र छात्र जब कमरा पाते हैं तो पता चलता हैं कि वहां पहले से ही कोई रह रहा है. इववि कभी भी यह जहमत नहीं उठाता कि पात्र छात्रों को कमरा मिले. हालांकि दो साल पहले हॉस्टल वॉशआउट के बाद सीसीटीवी की व्यवस्था की गई थी. लेकिन उसका भी काम क्राइम होने के बाद लगता है.

कई छात्रों की मांग, 'बंद हो चुनाव'

इलाहाबाद पढ़ने के लक्ष्य से आने वाले छात्रों का मानना है कि अगर विश्वविद्यालय में छात्रसंघ का चुनाव बंद हो जाए तो विश्वविद्यालय की गरिमा फिर से वापस आ सकती है. क्योंकि छात्रावासों में अवैध रूप से सबसे ज्यादा छात्रनेता ही रहते हैं. कई छात्र नेता पहले साल में दाखिला लेकर चुनाव लड़ते हैं. उसके बाद अपना कोर्स पूरा नहीं करते हैं. चुनाव के लक्ष्य से आने वाले यही छात्र नेता अपने दबंगई के बल पर हॉस्टलों में कब्जा करते हैं, और इलेक्शन जीतकर आगे राजनीति में जाना चाहते हैं. छात्रों का कहना है कि अगर चुनाव ही नहीं होगा तो आसामाजिक तत्व एडमिशन नहीं लेंगे. जिससे विश्वविद्यालय में वही लोग आएंगे जो पढ़ना चाहते हैं.

First Published: Apr 18, 2019 08:21:47 PM
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