वैज्ञानिकों का दावा: न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण (Newton law of gravity) के नियम 'गलत', अब आइंस्टीन की बारी

News State Bureau  |   Updated On : July 29, 2019 12:16:53 PM
प्रतिकात्‍मक चित्र

प्रतिकात्‍मक चित्र (Photo Credit : )

नई दिल्‍ली:  

हमारे बचपन का अधिकांश समय आइज़ैक न्यूटन (Isaac Newton) के गुरुत्वाकर्षण के नियम (Law of Gravity) को पढ़ने और सीखने में व्यतीत हुआ था, आज 100 से अधिक वर्षों के तमाम प्रयोगों और खोज के बाद वैज्ञानिकों ने घोषणा की कि यह सिद्धांत बिल्कुल गलत था और इसलिए इसे खारिज कर दिया. हालांकि, शोधकर्ता अभी भी हमारी आकाशगंगा के केंद्र में ब्लैक होल के पास अपने सबसे व्यापक परीक्षण के बाद भी अल्बर्ट आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत के साथ जाना पसंद करते हैं.

नए निष्कर्षों के बारे में बात करते हुए, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से एंड्रिया गेज़ ने कहा, "आइंस्टीन सही हैं कम से कम अभी के लिए. हम न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियम को पूरी तरह से खारिज कर सकते हैं. हमारी टिप्पणियां आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत के अनुरूप हैं".

यह भी पढ़ेंः Mission Shakti के बाद अब Space War के लिए तैयार भारत, पढ़िए पूरी Detail

"हालांकि, उनका सिद्धांत निश्चित रूप से भेदता दिखा रहा है," घज़ ने कहा, "यह एक ब्लैक होल के अंदर गुरुत्वाकर्षण को पूरी तरह से समझा नहीं सकता है, और कुछ बिंदु पर, हमें आइंस्टीन के सिद्धांत से परे गुरुत्वाकर्षण के एक अधिक व्यापक सिद्धांत की ओर बढ़ना होगा जो बताते हैं कि क्या है एक ब्लैक होल है ”.

यह भी पढ़ेंः CHANDRAYAAN 2 : आसान नहीं रहा इंसान का चांद तक का सफर, मक्खी से लेकर बंदर तक कई ने गवाई जान

न्यूटन के साथ जर्मन में जन्मे सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी आइंस्टीन को आधुनिक भौतिकी के दो स्तंभों में से एक माना जाता है. उनका काम विज्ञान के दर्शन पर अपने प्रभाव के लिए जाना जाता है. वैज्ञानिक, जिन्होंने 1921 में भौतिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार जीता था, ने पहली बार यह प्रस्तावित किया कि सूर्य और पृथ्वी जैसी वस्तुएं इस ज्यामिति को बदल देती हैं.

यह भी पढ़ेंः भारत के दुश्‍मनों की कलाई पर बंधी घड़ी का समय भी बता देगा ISRO का ये सैटेलाइट

इंग्लैंड में जन्मे न्यूटन को व्यापक रूप से सभी समय के सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिकों में से एक माना जाता है, और वैज्ञानिक क्रांति में एक प्रमुख व्यक्ति है. भौतिक विज्ञान के अलावा, गणित, खगोल विज्ञान, धर्मशास्त्र और साहित्य के क्षेत्र में भी रत्न का उल्लेखनीय योगदान था.

आइंस्टीन के सिद्धांत का सबसे अच्छा वर्णन है कि गुरुत्वाकर्षण कैसे काम करता है, घीज ने कहा, जिन्होंने अपने नवीनतम ब्लैक होल अध्ययन के दौरान एक सुपरमैसिव ब्लैक होल के पास घटना का मापन किया - अनुसंधान ने "चरम खगोल भौतिकी" करार दिया.

यह भी पढ़ेंः पृथ्‍वी से धीरे-धीरे दूर हो रहा चंद्रमा, ऐसा ही रहा तो खत्‍म हो जाएगी दुनिया

गुरुत्वाकर्षण सहित भौतिकी के नियम ब्रह्मांड में हर जगह मान्य होने चाहिए, कैलिफ़ोर्निया के प्रोफेसर ने कहा कि उनकी शोध टीम दुनिया के केवल दो समूहों में से एक है, जो S0-2 नामक एक तारे को देखने के लिए तीन में एक पूर्ण कक्षा बनाती है मिल्की वे के केंद्र में सुपरमैसिव ब्लैक होल के आसपास के आयाम.

शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि उनका काम अब तक के सुपरमैसिव ब्लैक होल और आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत में किया गया सबसे विस्तृत अध्ययन है. पूर्ण कक्षा में 16 साल लगते हैं, और ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य से लगभग चार मिलियन गुना अधिक है.

यह भी पढ़ेंः  Fact Check: चंद्रयान-2 से भेजी गईं इन तस्‍वीरों कही आप तो नहीं कर रहे Share

आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार, गुरुत्वाकर्षण का परिणाम होता है कि बड़े पैमाने पर अंतरिक्ष और समय कैसे होता है. किसी वस्तु का द्रव्यमान जितना अधिक होगा, उसका गुरुत्वाकर्षण बल उतना ही अधिक मजबूत होगा.

दूसरी ओर, न्यूटन के सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण के नियम में कहा गया है कि प्रत्येक कण ब्रह्मांड में हर दूसरे कण को ​​एक बल के साथ आकर्षित करता है जो सीधे उनके द्रव्यमान के उत्पाद के आनुपातिक होता है और उनके केंद्रों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है.

Read in English

First Published: Jul 28, 2019 07:29:50 PM
Post Comment (+)

न्यूज़ फीचर

वीडियो