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विक्रम लैंडर ने भेजी चांद की पहली तस्‍वीर, देखें कैसे लगते हैं चंदा मामा

न्‍यूज स्‍टेट ब्‍यूरो  |   Updated On : August 24, 2019 08:04:21 AM
VikramLander द्वारा खिंची की गई पहली चंद्रमा की तस्‍वीर (ISRO)

VikramLander द्वारा खिंची की गई पहली चंद्रमा की तस्‍वीर (ISRO)

नई दिल्‍ली:  

चंद्रयान-2 अपने बुधवार को चंद्रयान-2 चंद्रमा की दूसरी कक्षा में सफलता पूर्वक प्रवेश करने के बाद चंद्रमा की सतह से लगभग 2650 किमी की ऊंचाई पर  VikramLander चांद की पहली तस्‍वीर खिंच कर भेज दी. इसरो ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. बता दें 22 जुलाई को लॉन्च हुआ चंद्रयान (Chandrayaan 2) को लक्ष्य तक पहुंचने के लिए 17 दिन का वक्त और लगने वाला है.

इस दिन चंद्रयान-2 चांद पर पहुंचेगा

  • चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं, जिनके नाम ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान).इस प्रोजेक्ट की लागत 800 करोड़ रुपए है.
  • अगर मिशन सफल हुआ तो अमेरिका, रूस, चीन के बाद भारत चांद पर रोवर उतारने वाला चौथा देश होगा.
  • चंद्रयान-2 इसरो (ISRO)के सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 से पृथ्वी की कक्षा के बाहर छोड़ा गया है. फिर उसे चांद की कक्षा में पहुंचाया जाएगा.
  • 7 सितंबर को चंद्रयान-2 के लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा. इसके बाद रोवर उसमें से निकलकर विभिन्न प्रयोग करेगा.
  • चांद की सतह, वातावरण और मिट्टी की जांच करेगा. वहीं, ऑर्बिटर चंद्रमा के चारों तरफ चक्कर लगाते हुए लैंडर और रोवर पर नजर रखेगा. साथ ही, रोवर से मिली जानकारी को इसरो (ISRO)सेंटर भेजेगा.

तीन मॉडयूल हैं चंद्रयान-2 के

  • चंद्रयान-2 दूसरा चंद्र अभियान है और इसमें तीन मॉडयूल हैं ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान).
  • ऑर्बिटर- 1 साल, लैंडर (विक्रम)- 15 दिन, रोवर (प्रज्ञान)- 15 दिन
  • चंद्रयान-2 का कुल वजनः 3877 किलो
  • ऑर्बिटर- 2379 किलो, लैंडर (विक्रम)- 1471 किलो, रोवर (प्रज्ञान)- 27 किलो
  • ऑर्बिटरः चांद से 100 किमी ऊपर इसरो (ISRO)का मोबाइल कमांड सेंटर
  • रूस के मना करने पर इसरो (ISRO)ने बनाया स्वदेशी लैंडर

लैंडर का नाम इसरो (ISRO)के संस्थापक और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है. यह 15 दिनों तक वैज्ञानिक प्रयोग करेगा. इसकी शुरुआती डिजाइन इसरो (ISRO)के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद ने बनाया था. बाद में इसे बेंगलुरु के यूआरएससी ने विकसित किया. चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद से 100 किमी ऊपर चक्कर लगाते हुए लैंडर और रोवर से प्राप्त जानकारी को इसरो (ISRO)सेंटर पर भेजेगा. इसरो (ISRO)से भेजे गए कमांड को लैंडर और रोवर तक पहुंचाएगा. इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने बनाकर 2015 में ही इसरो (ISRO)को सौंप दिया था.

प्रज्ञान रोवरः इस रोबोट के कंधे पर पूरा मिशन, 15 मिनट में मिलेगा डाटा

  • 27 किलो के इस रोबोट पर ही पूरे मिशन की जिम्मदारी है.
  • चांद की सतह पर यह करीब 400 मीटर की दूरी तय करेगा.
  • इस दौरान यह विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग करेगा. फिर चांद से प्राप्त जानकारी को विक्रम लैंडर पर भेजेगा.
  • लैंडर वहां से ऑर्बिटर को डाटा भेजेगा. फिर ऑर्बिटर उसे इसरो (ISRO)सेंटर पर भेजेगा.
  • इस पूरी प्रक्रिया में करीब 15 मिनट लगेंगे. यानी प्रज्ञान से भेजी गई जानकारी धरती तक आने में 15 मिनट लगेंगे.
  • 11 साल लगे चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग में
  • नवंबर 2007 में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने कहा था कि वह इस प्रोजेक्ट में साथ काम करेगा. वह इसरो (ISRO)को लैंडर देगा.
  • 2008 में इस मिशन को सरकार से अनुमति मिली.
  • 2009 में चंद्रयान-2 का डिजाइन तैयार कर लिया गया.
  • जनवरी 2013 में लॉन्चिंग तय थी, लेकिन रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस लैंडर नहीं दे पाई. फिर इसकी लॉन्चिंग 2016 में तय की गई. हालांकि, 2015 में ही रॉसकॉसमॉस ने प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए.

चांद पर इस तरह काम करेगा चंद्रयान-2 मिशन

इसरो (ISRO)के चेयरमैन के सिवान के मुताबिक, हम चांद पर एक ऐसी जगह जा रहे हैं, जो अभी तक दुनिया से अछूती रही है. यह है चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव. इस मिशन के दौरान ऑर्बिटर और लैंडर आपस में जुड़े हुए होंगे. इन्हें इसी तरह से GSLV MK III लॉन्च व्हीकल के अंदर लगाया जाएगा. रोवर को लैंडर के अंदर रखा जाएगा.लॉन्च के बाद पृथ्वी की कक्षा से निकलकर यह रॉकेट चांद की कक्षा में पहुंच गया है. इसके बाद धीरे-धीरे लैंडर, ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा. इसके बाद यह चांद के दक्षिणी ध्रुव के आस-पास एक पूर्वनिर्धारित जगह पर उतरेगा. बाद में रोवर वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए चंद्रमा की सतह पर निकल जाएगा.

चंद्रयान की स्पीड घटाई

चंद्रयान चांद की पहली कक्षा में प्रवेश करने के बाद इसकी स्पीड को कम कर दिया गया है. चंद्रयान की स्पीड को 10.98 किलोमीटर से घटाकर करीब 1.98 किलोमीटर प्रति सेकंड कर दिया गया है. यानी चंद्रयान की स्पीड करीब 90 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है. इसके पीछे वजह यह है कि चंद्रमा का गुरुत्‍वाकर्षण पृथ्‍वी के मुकाबले काफी कम है. दरअसल, चंद्रयान-2 चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के प्रभाव में आकर चांद से टकरा न जाए और उसको नुकसान ना पहुंचे इसलिए उसकी गति को बहुत ही कम कर दिया गया है. 

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चांद का गुरुत्वाकर्षण किसी भी दूर तक आने वाली वस्तु को अपनी तरफ खींच सकता है. ऐसे में टकराव से बचने के लिए गति को कम किया गया है. अब वो चांद के गुरुत्वाकर्षण से लड़ते हुए चांद की कक्षा में चला जाएगा.

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बता दें कि करीब 65 हजार किलोमीटर तक की चीज पर चांद के गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव पड़ता है. वो इतनी दूरी से जा रही चीज को अपनी तरफ खींच सकता है. मंगलवार यानी आज चंद्रयान-2 65 हजार किलोमीटर की दूरी से करीब 150 किलोमीटर ही दूर होगा. मतलबल 65, 150 किलोमीटर की दूर पर चंद्रयान-2 होगा.

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भारतीय अंतरिक्ष यान चंद्रयान-2 के चांद की कक्षा में प्रवेश करने के अंतिम 30 मिनट बहुत मुश्किल भरे थे. यह कहना है भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन के. सिवन का. इस महत्वपूर्ण चरण के तुरंत बाद सिवन ने बताया, 'अभियान के अंतिम 30 मिनट बहुत मुश्किल भरे थे. घड़ी की सुई के आगे बढ़ने के साथ-साथ तनाव और चिंता बढ़ती गई. चंद्रयान-2 के चांद की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश करते ही अपार खुशी और राहत मिली.'

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इसरो के एक अधिकारी के अनुसार, चंद्रयान-2 की 24 घंटे निगरानी की जा रही है. सिवान ने कहा कि भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान पर भी काम चल रहा है. इसके लिए अंतरिक्ष यात्रियों का चयन करने का काम जारी है.

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बता दें, चंद्रयान-2 के चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने के बाद इसरो कक्षा के अंदर स्पेसक्रॉफ्ट की दिशा में चार बार (21, 28 और 30 अगस्त को तथा 1 सितंबर को) और परिवर्तन करेगा. इसके बाद यह चंद्रमा के ध्रुव के ऊपर से गुजरकर उसके सबसे करीब - 100 किलोमीटर की दूरी के अपने अंतिम कक्षा में पहुंच जाएगा.

इसके बाद विक्रम लैंडर 2 सितंबर को चंद्रयान-2 से अलग होकर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा. इसरो ने बताया कि चंद्रमा की सतह पर 7 सितंबर 2019 को लैंडर से उतरने से पहले धरती से दो कमांड दिए जाएंगे, ताकि लैंडर की गति और दिशा सुधारी जा सके और वह हल्के से सतह पर उतरे.

First Published: Aug 22, 2019 07:51:54 PM
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