पानी पर भड़की आग

Updated On : September 12, 2016 12:46 PM
कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच चल रहा कावेरी जल विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कावेरी नदी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले को संशोधित करते हुए 20 सितंबर तक प्रतिदिन कर्नाटक सरकार को अब 15 हजार क्यूसेक की जगह 12 हजार क्यूसेक पानी तमिलनाडु को देने का आदेश दिया है। कर्नाटक सरकार के उस अपील को भी सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया जिसमें कर्नाटक सरकार ने 1 हजार क्यूसेक पानी देने की ही अपील की थी
कावेरी जल विवाद आज से नहीं अंग्रेजों के शासन काल से चला आ रहा है। 1924 में विवाद को लेकर दोनों राज्यों के बीच समझौता भी हुआ था लेकिन विवाद में केरल औऱ पुडुचेरी के शामिल हो जाने के बाद विवाद और पेचीदा हो गया।
साल 1972 में सरकार ने इस विवाद को लेकर एक कमेटी बनाई जिसकी रिपोर्ट आने के बाद 1976 में कावेरी नदी के जल को लेकर चार दावेदार राज्यों में एग्रीमेंट किया जिसकी घोषणा संसद में होने के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ
1986 में तमिलनाडु सराकर ने अंतर्राज्यीय जल विवाद अधिनियम 1956 के तहत केंद सरकार से एक ट्रिब्यूनल बनाने की मांग की
1990 में ट्रिब्यूनल के गठन के बाद फैसला हुआ कि कर्नाटक सरकार कावेरी नदी का जल एक तय हिस्सा में तमिलनाडु को देगी
कर्नाटक सरकार का मानना है कि तमिलनाडु की तुलना में वहां कृषि काफी समय बाद शुरु हुआ, कर्नाटक नदी के बहाव की दिशा में पहले आता है इसलिए पहला हक उसका है
केंद्र सरकार ने विवाद को सुलझाने के लिए जून 1990 को न्यायाधिकरण का गठन किया और तब से विवाद सुलझाने की कोशिश चल रही है लेकिन आज भी इस पर विवाद और प्रदर्शन चल रहे हैं
कानूनी जानकारों के मुताबिक सिर्फ कानून के माध्यम से ही इस विवाद को सुलझाया जा सकता है, नाकि प्रदर्शन और हिंसा से
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