क्या लालू यादव की विरासत संभाल पाएंगे तेजस्वी, ये है सबसे बड़ी चुनौतियां

चारा घोटाले के एक और मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू यादव को आज दोषी करार दे दिया। अब सबसे बड़ा संकट राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राजनीतिक भविष्य पर मंडरा रहा है।

  |   Updated On : December 23, 2017 11:59 PM
लालू यादव और तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

लालू यादव और तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

ख़ास बातें
  •  चारा घोटाला मामले में लालू यादव दोषी करार
  •  तेजस्वी यादव संभाल सकते हैं पार्टी की कमान

 

नई दिल्ली:  

चारा घोटाले के एक और मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू यादव को आज दोषी करार दे दिया। अब सबसे बड़ा संकट राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राजनीतिक भविष्य पर मंडरा रहा है।

लालू यादव के जेल जाने के बाद अब आरजेडी के भीतर से लेकर बाहर तक पार्टी की कमान और लालू यादव की विरासत को संभालने का जिम्मा तेजस्वी यादव के कंधों पर जाने की चर्चा जोरों पर है।

बीते दिनों लालू यादव और पार्टी के तमान बड़े नेता इस बात के संकेत भी दे चुके हैं कि लालू यादव की अनुपस्थिति में तेजस्वी ही पार्टी की कमान संभालेंगे।

इस तर्क को बल उस वक्त मिला था जब आरजेडी की तरफ से यह बात सामने आई थी कि बिहार में अगला विधानसभा चुनाव पार्टी तेजस्वी यादव के नेतृत्व में ही लड़ेगी।

वैसे अगर तेजस्वी यादव के बिहार के डिप्टी सीएम बनने के बाद राजनीतिक करियर को देखें तो उन्होंने अपने तेवर और अंदाज से पार्टी के अंदर ही नहीं बाहर भी अपनी जगह बनाई है।

लालू यादव के जेल जाने के बाद बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के होने के बावजूद तेजस्वी को क्यों संभालना पड़ सकता है राजनीतिक विरासत उसके कुछ बेहद अहम कारण हैं।

पिता के नक्शे कदम पर चलते हैं तेजस्वी

ऐसा माना जाता है कि तेजस्वी यादव राजनीति के मामले में पूरी तरह अपने पिता के पद चिन्हों पर चलते हैं। जैसे लालू यादव हमेशा ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यों की बात करते हैं और सांप्रदायिकता का विरोध करते हैं वैसे ही तेजस्वी भी अपने भाषणों में सामाजिक न्याय और धर्म निरपेक्षता पर सबसे ज्यादा जोर देते हैं।

गठबंधन टूटने के बाद विधानसभा में बतौर नेता विपक्ष तेजस्वी ने जैसा भाषण दिया था वैसे ही कभी उनके पिता लालू भी दिया करते थे। बतौर नेता विपक्ष तेजस्वी ने विधानसभा में जो भाषण दिया था उसकी हर तरफ चर्चा हुई थी।

नीतीश के खिलाफ बिहार यात्रा कर बनाई नई पहचान

महागठबंधन टूटने के बाद जैसे ही तेजस्वी यादव सत्ता से बाहर हुए उन्होंने सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

तेजस्वी ने नीतीश के खिलाफ राज्य की जनता को एकजुट करने के लिए बिहार यात्रा निकाली जिसके तहत उन्होंने पूरे प्रदेश की यात्रा की।

तेजस्वी ने घूम-घूम कर बीजेपी और नीतीश के खिलाफ चुन-चुन कर हमले किये जिसका बचाव करने दूसरी पार्टियों को उतरना पड़ा।

तेजस्वी को जितनी लोकप्रियता सत्ता में रहते हुए नहीं मिली उससे ज्यादा नीतीश पर हमले की वजह से बतौर विपक्ष के नेता के तौर पर मिली।

लालू के खिलाफ फैसला जाने के बाद एक बार फिर तेजस्वी बीजेपी के खिलाफ पूरे राज्य का दौरा कर सकते हैं। इस यात्रा का मकसद लालू की सजा से उपजे गुस्से को एकजुट करना होगा।

तेजस्वी के लिए है दोहरी चुनौती

लालू यादव के जेल जाने के बाद तेजस्वी यादव के लिए सबसे बड़ी चुनौती पार्टी में होने वाली फूट को रोकना और नेताओं को एक जुट रखने की होगी।

ऐसा माना जाता है कि लालू सबको साथ लेकर चलते थे ऐसे में वरिष्ठ नेताओं को भी तेजस्वी से यही उम्मीद होगी। दूसरी तरफ तेजस्वी को पार्टी का उत्तराधिकारी बनाना भी पार्टी के कई नेताओं को खटक रहा है। ऐसे में मौका देखकर पार्टी में तेजस्वी का विरोध बढ़ सकता है। सत्ता जाने के बाद कुछ नेता जेडीयू या बीजेपी में शामिल होने की संभावना भी तलाश रहे हैं।

तेजस्वी को राज्य में अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए लालू के बाद आरजेडी की जमीन को मजबूत करनी होगी जबकि दूसरी तरफ उन्हें बतौर मुख्य विपक्ष विधानसभा में भी अपनी जिम्मेदारी को निभाना होगा जो उनके लिए दोहरी चुनौती होगी।

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कम राजनीतिक अनुभव का विपक्ष उठा सकता है फायदा

एक तरफ बिहार में जहां जेडीयू के मुखिया नीतीश कुमार और बीजेपी के सुशील मोदी जैसे धाकड़ नेता हैं वहीं दूसरी छोर पर तेजस्वी यादव जैसे युवा नेता है जिसकी उम्र इन नेताओं के राजनीतिक अनुभवों से कम है।

ऐसे में संभव है कि लालू यादव की गैर मौजूदगी में तेजस्वी वो प्रभाव अपने विरोधियों पर ना डाल पाएं जो अपने पिता के मौजूद रहते उन्होंने डाला था। लालू यादव के बाहर रहने पर वो अपने बेटों को राजनीति की हर दांव पेंच और हर वॉर का जवाब सही समय पर देने की रणनीति सिखाते थे। अब तेजस्वी के पास हर वक्त ऐसा कोई राजनीतिक गुरु नहीं होगा।

बुरे वक्त में तेजस्वी बना पाएंगे नए साथी

तेजस्वी यादव के लिए इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती है कि वो किन दलों को खुद के समर्थन में खड़ा कर पाते हैं।

पूरे देश में नरेंद्र मोदी की लहर चल रही है ऐसे में पार्टी मुखिया पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप और उसमें दोषी साबित होने पर अधिकांश पार्टियों उनसे किनारा करने की कोशिश करेगी।

हालांकि कांग्रेस अभी उनके समर्थन में खड़ी है लेकिन वो ऐसे हालात में कब तक आरजेडी का साथ देगी ये तो वक्त ही बताएगा। राजनीतिक में विरोधी को धूल चटाने के लिए जरूरी है कि तेजस्वी यादव लालू के बाद नए राजनीतिक दोस्त बनाएं।

चारा घोटाला के एक मामले में आज रांची की विशेष अदालत ने लालू को देवघर जिला राजकोष से फर्जी रूप से करीब 85 लाख रुपये निकालने का दोषी करार दिया है। लालू यादव को फिलहाल रांची के बिरसा मुंडा जेल भेजा गया है और 3 जनवरी को उनकी सजा का ऐलान किया जाएगा।

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First Published: Saturday, December 23, 2017 09:30 PM

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