केजरीवाल का धरना पांचवें दिन भी जारी, अखिलेश, तेजस्वी समेत कई नेताओं ने किया समर्थन

स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की भूख हड़ताल का आज तीसरा दिन है जबकि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की भूख हड़ताल का दूसरा दिन है।

  |   Updated On : June 15, 2018 01:54 PM

नई दिल्ली:  

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी कैबिनेट के तीन मंत्रियों का उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय में धरना शुक्रवार को पांचवे दिन भी जारी है।

स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की भूख हड़ताल का आज तीसरा दिन है जबकि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की भूख हड़ताल का दूसरा दिन है।

केजरीवाल, सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और गोपाल राय उपराज्यपाल अनिल बैजल के आधिकारिक निवास व कार्यालय राज निवास में सोमवार शाम से धरना दे रहे हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह और उनके सहयोगी बैजल के कार्यालय से तब तक नहीं हटेंगे, जब तक उनकी मांगें नहीं पूरी की जाती।

इन मांगों में दिल्ली प्रशासन में काम कर रहे आईएएस अधिकारियों को उनकी हड़ताल खत्म करने का निर्देश देने और गरीबों को उनके दरवाजे पर जाकर राशन वितरित करने के सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी देने व उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग शामिल है, जो चार महीनों से सरकार के काम में अड़ंगा लगा रहे हैं।

चारों आप नेता लगातार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), उपराज्यपाल और केंद्र सरकार पर ट्वीट के जरिए जुबानी हमले कर रहे हैं।

वहीं, मंगलवार से भूख हड़ताल पर बैठे स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले पर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

जैन ने ट्वीट कर कहा, 'हम चार रातों से उपराज्यपाल के कार्यालय में इंतजार कर रहे हैं लेकिन वह केवल चार मिनट का समय तक नहीं निकाल पा रहें। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इस मामले पर हस्तक्षेप करेंगे।'

राय ने भी ट्वीट कर कहा, 'उन्हें उम्मीद है कि मोदी दिल्ली के लोकतंत्र की फिटनेस की फिक्र करेंगे।'

केजरीवाल ने कहा, 'उपराज्यपाल की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। मैंने उनसे बैठक के लिए समय मांगा था। मैंने प्रधानमंत्री से भी इस मामले को देखने का आग्रह किया लेकिन उनकी ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।' 

बता दें कि अनिल बैजल के कार्यालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर गुरुवार को केजरीवाल ने एक पत्र में आईएएस अधिकारियों की हड़ताल समाप्त कराने के लिए मोदी के हस्तक्षेप की मांग की थी।

पार्टी के सदस्यों ने एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें मोदी से आईएएस अधिकारियों को वापस काम पर लाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

सूत्रों के अनुसार, अनिल बैजल सोमवार से अपने निवास से ही कामकाज कर रहे हैं।

कई राजनीति पार्टियां जैसे सीपीएम व अन्य हस्तियों ने अपना केजरीवाल के प्रति समर्थन जताया है, जिसमें उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, अभिनेता से नेता बनें कमल हासन और शत्रुघन सिन्हा शामिल हैं।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा पहले ही अपना समर्थन दे चुके हैं।

बीजेपी के बाग़ी नेता शत्रुघ्न सिंहा ने कहा, 'Dear Sir! बदले की राजनीती कब तक और किस हद तक चलेगी? ऐसा लोग पूछ रहे हैं। माननीय प्रधान सेवक, माननीय प्रधान रक्षक जी। शत शत निवेदन है कि स्वस्थ भारत के लिए राजनीति भी स्वस्थ करें। अपने दिल्ली के learned मित्र, चहेते और प्रतिभाशाली LG को निर्देश दें कि हमारे सरकारी अधिकारी ड्रामेबाजी छोड़कर मेहनत की कमाई खाते अच्छे लगते हैं, चमचागिरी की नहीं। दिल्ली की अवाम के टैक्स से तनख्वाह पाते हैं, तो काम पर लौटें।'

वहीं बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, 'दिल्ली की जनता ने 20वर्ष से BJP को दिल्ली से बेदख़ल किया हुआ है।इसलिए अब केंद्र की BJP सरकार रिकॉर्डतोड़ बहुमत से चुनी हुई अरविंद केजरीवाल सरकार के कामकाज मे निम्नस्तरीय दखलंदाजी कर दिल्ली की विकासप्रिय जनता से चुन-चुन कर बदला ले रही है। लोकतंत्र में ये अस्वस्थ परंपरा की शुरुआत है।'

वहीं यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, 'देश की राजधानी के सचिवालय पर केंद्र के सत्ताधारी राजनीतिक दल के क़ब्ज़े की ख़बर लोकतंत्र की हत्या से भी बदतर हालात की ओर इशारा कर रही है। ये सत्ता का अहंकार है। जो आज ताक़त से जनतंत्र पर क़ब्ज़ा कर रहे हैं, वो कल जनता के घरों पर भी क़ब्ज़ा करेंगे। जनता में डर भी है और गुस्सा भी।'

गौरतलब है कि गुरुवार को कथित बीजेपी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली सचिवालय पर चढ़कर केजरीवाल के ख़िलाफ़ बैनर लहराए थे।

जिसके बाद आप सांसद संजय सिंह ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए अपने ट्वीटर वॉल पर लिखा, 'दिल्ली सचिवालय पर बीजेपी ने क़ब्ज़ा कर लिया है, क्या प्रधानमंत्री के कार्यालय पर कोई भी ऐसे जाकर क़ब्ज़ा कर सकता है ? बैनर लहरा सकता है? दिल्ली पुलिस कहाँ हैं अब तक इन लोगों पर कोई कार्यवाही क्यों नही हुई?'

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बता दें कि बीजेपी ने बुधवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल के आवास पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रियों के धरने के जवाब में धरना शुरू कर दिया।

मध्य दिल्ली में आईटीओ से अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जुलूस लेकर सचिवालय में मुख्यमंत्री कार्यालय तक जा रहे बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी ने संवाददाताओं को बताया, 'केजरीवाल दिल्ली के लोगों को धोखा दे रहे हैं। उन्होंने जनता को 2014 में धोखा दिया फिर 2015 में दिया और अब फिर वे दिल्ली की जनता से किए अपने वादों को नकार कर उन्हें धोखा दे रहे हैं।'

मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रतीक्षा कक्ष में चल रहे धरने में पश्चिम दिल्ली के सांसद प्रवेश सिंह साहिब वर्मा, विधानसभा में विपक्ष के नेता तथा बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता, विधायक जगदीश प्रधान, मनजिंदर सिरसा और आम आदमी पार्टी (आप) के निलंबित विधायक कपिल मिश्रा भी बैठे हुए हैं।

मिश्रा ने ट्वीट किया, 'हमारी तीन मांगे हैं -केजरीवाल अपना नाटक खत्म करें, काम पर लौटें और दिल्ली की जनता को जलापूर्ति करें।'

जुलूस में बीजेपी के सैंकड़ों कार्यकर्ता तख्तियां पकड़ कर 'केजरीवाल नाटक बंद करो' जैसे नारे लगा रहे थे।

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वहीं गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाख़िल किया गया है। इस याचिका में उपराज्यपाल के कार्यालय पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के धरना-प्रदर्शन को असंवैधानिक व अवैध घोषित करने की मांग की गई, क्योंकि इससे सरकारी मशीनरी में ठहराव आ गया है।

यह याचिका दिल्ली के वकील हरिनाथ राम द्वारा अपने वकील शशांक देव सुधी व शशि भूषण के जरिए दाखिल की गई है।

वकील सुधी ने अदालत से आग्रह किया, मुख्यमंत्री के कर्तव्यों व उत्तरदायित्वों के निर्वहन के लिए निर्देश दें, क्योंकि हड़ताल के आह्वान के बाद से दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय की पूरी कार्य पद्धति में ठहराव आ गया है।

इसमें विधायकों ने असंवैधानिक कार्य में नहीं शामिल होने की बात सुनिश्चित करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश तैयार करने की भी मांग की गई है।

याचिका में कहा गया, राजनेताओं के संविधान का समर्थक होने की जरूरत है। उन्हें संवैधानिक नियमों को तोड़ने वाला नहीं बनना चाहिए। तत्कालिक परिस्थितियां अराजक प्रशासनिक निर्बलता को दिखाती हैं, जिसे तत्काल सुव्यवस्थित करने की जरूरत है।

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First Published: Friday, June 15, 2018 09:54 AM

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