छात्रों के लिए खुशखबरी, एडमिशन के दौरान नहीं जमा करने होंगे ओरिजिनल सर्टिफिकेट

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि 2019-2020 से विद्यार्थियों को अपने दस्तावेजों की मूल प्रति जैसे मार्कशीट्स और अन्य सर्टिफिकेट्स शिक्षण संस्थान में दाखिला लेते समय नहीं जमा करवाना पड़ेगा।

News State Bureau  |   Updated On : October 10, 2018 10:59 PM
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का नया नोटिफिकेशन

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का नया नोटिफिकेशन

नई दिल्ली:  

उच्च शिक्षा में छात्रों को बड़ा राहत देते हुए बुधवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नोटिफिकेशन जारी किया है जिसके बाद कोई भी उच्च शिक्षण संस्थान एडमिशन सुनिश्चित होने से पहले छात्रों के सर्टिफिकेट को नहीं रख सकती है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि 2019-2020 से विद्यार्थियों को अपने दस्तावेजों की मूल प्रति जैसे मार्कशीट्स और अन्य सर्टिफिकेट्स शिक्षण संस्थान में दाखिला लेते समय नहीं जमा करवाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान अगर दाखिला वापस लेने वाले विद्यार्थियों को उनकी फीस नहीं लौटाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

जावड़ेकर ने कहा कि अब से किसी भी शिक्षण संस्थान को विद्यार्थियों के दस्तावेजों की मूल प्रति रखने का अधिकार नहीं होगा। यूजीसी की नोटिफिकेशन के मुताबिक, 'अगर छात्र संस्थान से अपना नाम वापस लेने का निर्णय करते हैं तो संस्थानों को फीस (पूरा या कोई हिस्सा) लौटाना पड़ेगा और सिर्फ प्रोसेशन फीस के तौर पर सिर्फ 5,000 रुपये तक ले सकेंगे।'

दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि एडमिशन को लेकर हर साल हमें कई शिकायतें मिलती है। इसे देखते हुए छात्रों के लिए आसान किया गया है। अगर मेरिट लिस्ट में बदलाव होता है तो आवेदन का पूरा अधिकार है कि अच्छे कॉलेजों में जाए।

नोटिफिकेशन के मुताबिक, छात्रों को कोई भी एकेडमिक और व्यक्ति सर्टिफिकेट जैसे मार्क शीट, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट इत्यादि की मूल प्रति को एडमिशन फॉर्म के साथ नहीं जमा करना होगा। जरूरत के लिए, संस्थान सिर्फ इन प्रमाण पत्रों की जांच करेगी और छात्रों को तुरंत लौटा देगी। कोई भी संस्थान मूल प्रमाण पत्रों को अपने पास नहीं रख सकती है।

छात्रों को एडमिशन की अंतिम तिथि से 15 दिन पहले नाम वापस लेने पर 90 फीसदी राशि रिफंड कर दी जाएगी, वहीं अंतिम तिथि के बाद 15 दिनों के भीतर नाम वापस लेने पर संस्थानों को 80 फीसदी राशि लौटाना होगा। अगर कोई छात्र 16-30 दिन के बीच में नाम वापस लेता है तो उसे 50 फीसदी राशि रिफंड कर दी जाएगी।

यह नोटिफिकेशन यूजीसी एक्ट,1956 के सेक्शन 2(एफ) के तहत विश्वविद्यालयों द्वारा स्नातक, स्नातकोत्तर और रिसर्च प्रोग्राम में लागू होगा। इसके अलावा इसी एक्ट के सेक्शन 3 के तहत आने वाले डीम्ड विश्वविद्यालयों के कॉलेजों और संस्थानों पर भी लागू होगा।

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जावड़ेकर ने कहा, 'यूजीसी जल्द ही रेगुलेशन को लेकर आएगी। आशा है कि छात्रों के साथ न्याय होगा। यह कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए है। अगर कॉलेज इन नियमों का पालन नहीं करेंगे तो उन्हें दंडित किया जाएगा। निजी विश्वविद्यालय भी यूजीसी के तहत नियमित होते हैं।'

First Published: Wednesday, October 10, 2018 10:56 PM

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