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द्वारका एक्सप्रेसवे पर मुठभेड़, कई राउंड फायरिंग के बाद 3 कुख्यात बदमाश गिरफ्तार

News State Bureau  |   Updated On : July 17, 2019 02:43 PM
प्रतिकात्‍मक चित्र

प्रतिकात्‍मक चित्र

गुरुग्राम:  

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के द्वारका एक्सप्रेसवे पर गुरुग्राम पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने गोलीबारी के बाद तीन कुख्यात बदमाशों को गिरफ्तार किया है. एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों को तीन बदमाश- लोकेश उर्फ सूर्या, प्रदीप और नीरज के बारे में सूचना मिली, जिसके आधार पर उन्हें पकड़ने की योजना बनाई गई.

एक अधिकारी ने कहा कि अधिकारी मंगलवार रात करीब 11 बजे बदमाशों को पकड़ने गए. पुलिस द्वारा रास्ता रोकने का एहसास होते ही उन्होंने भागने के लिए आधा दर्जन राउंड फायर किए. जिसके बाद उनमें गोलीबारी शुरू हो गई जिसमें अपराधियों के पैर में गोली लग गई और इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. उन्होंने कहा कि वे अब अस्पताल में भर्ती हैं और आगे की जांच चल रही है.

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ये आरोपी हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में हत्या, डकैती और फिरौती मांगने जैसे अपराधों में शामिल रहे हैं. राजस्थान पुलिस ने लोकेश को पकड़ने पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था. इसके अलावा, प्रदीप और नीरज पर 50 हजार रुपये का इनाम रखा गया था.

पिछले एक साल में गैंगवार के मामले

14 जून 2019- नंदनगरी के हर्ष विहार में दो अपराधियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. मृतक का नाम खुरवेश और कांची बताया गया. दोनों अपराधी हैं और साथ में रहते थे. दोनों का इलाके में टेरर था.पुलिस सूत्रों के मुताबिक, खुरवेश और कांची पर किसी दूसरे गैंग के बदमाशों ने आपसी रंजिश के चलती गोली चलाई है. खुरवेश पर 2015 में सोनू चिकने के मर्डर का आरोप है. खुरवेश सत्ते नाम के गैंगस्टर का साथी है.

29 मई 2019 (बुधवार की रात)- डबल मर्डर की वारदात से दहली दिल्ली

बाइक पर सवार होकर आए हथियारबंद बदमाशों ने मीत नगर निवासी गोविंद को निशाना बनाकर अंधाधुंध फायरिंग की. जिसमें गोविंद को दो गोली लगी और उसकी मौत हो गई. इसी दौरान वहां से गुजर रहे मीत नगर निवासी आकाश को भी बदमाशों की एक गोली जा लगी. बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया. मगर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. बदमाश डबल मर्डर की वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए. सूचना मिलने पर पुलिस वहां पहुंची और शव कब्जे में ले लिया. पुलिस ने हत्या की इस सनसनीखेज वारदात को गैंगवार मानने से इंकार किया. जानकारी के मुताबिक मौके पर बदमाशों ने 10 राउंड से ज्यादा फायरिंग की थी.

19 मई 2019- द्वारका मोड़ स्टेशन के पास दो गिरोहों की गोलीबारी में दो बदमाश मरे

दक्षिण पश्चिमी दिल्ली में द्वारका मोड़ मेट्रो स्टेशन के पास दो प्रतिद्वंदी गिरोहों के बीच हुई गोलीबारी में दो संदिग्ध अपराधी मारे गये. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नवादा इलाके के प्रवीण गहलोत और विकास दलाल के खिलाफ दिल्ली तथा हरियाणा में हत्या, फिरौती और डकैती के कई मामले दर्ज थे. पुलिस के अनुसार, दोनों गिरोहों के बीच गोलीबारी संपत्ति विवाद को लेकर हुई. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि गोलीबारी शाम चार बजे के करीब हुई और कुल 15 राउंड गोलियां चलायी गयीं.उन्होंने बताया कि गहलोत अपनी कार में था. दूसरी कार में सवार लोगों ने उसके ऊपर गोली चला दी. मेट्रो स्टेशन के पास खड़ी पुलिस की पीसीआर वैन ने अपराधियों पर तीन राउंड गोलियां चलायीं जिसमें एक बदमाश मारा गया.

17 मई 2019 (शुक्रवार शाम) - दिल्ली: फिल्मी स्टाइल में शख्स को मारी ताबड़तोड़ गोलियां

दिल्ली की व्यस्त सड़क पर फिल्मी स्टाइल में एक चलती कार पर स्विफ्ट कार सवार बदमाशों ने अंधाधुंध गोली चलाई. कुछ गोली कार पर लगीं तो कुछ चालक को लगीं. बदमाश हवा में गोली चलाते हुए मौके पर से फरार हो गए. गोली लगी हालत में चालक का कार से संतुलन बिगड़ गया. कार डिवाइडर से टकराकर रुक गई. वारदात केएन काटजू मार्ग इलाके में हुई. पुलिस ने खून से लथपथ हालत में चालक को अस्पताल में भर्ती कराया. घायल की पहचान मनीष मान के रूप में हुई. वह खेड़ा का रहने वाला था.

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शाम के वक्त मनीष अकेला सफेद रंग की कार से कहीं पर जा रहा था, तभी कार में तीन से चार बदमाश आए उसकी कार को ओवरटेक कर अधाधुधं गोली चलाईं. वारदात के बाद आरोपी मौके पर से फरार हो गए थे. पुलिस को कपिल उर्फ कालू नामक बदमाश पर शक जा रहा है.

12 अप्रैल 2019- बाहरी दिल्ली के आंबेडकर अस्पताल में हरियाणा के गैंगस्टर की हत्या की सुपारी लेकर राजेश बवाना का गुर्गा पहुंच गया था. मंगलवार (16 अप्रैल 2019) को रवींद्र राणा की गोली मारकर हत्या कर दी गई. वह तिहाड़ से जमानत पर आया था. यह भी बाहरी दिल्ली में हुआ.

29 मार्च 2019 हिस्ट्रीशीटर की ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या

भिवानी में शुक्रवार की शाम को गांव पालुवास में दिनदहाड़े दनादन गोलियां चलीं. कार सवार बदमाशों ने बाइक सवार हेता नाम के व्यक्ति को टक्कर मारकर गिराया और उस पर 5-6 गोलियां एक के बाद एक दागीं. हेता की मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जांच में उसको पता लगा कि इस हत्या के पीछे मामला गैंगवार का है. पुलिस को पूछताछ में पता चला कि शाम करीब चार-सवा चार बजे गांव हालुवास में इंडियन बैंक के पास समय एक स्वीफ्ट कार में सवार दो-तीन बदमाश आए. उन्होंने वहां आगे चल रहे बाइक पर कोंट रोड निवासी हेता को टक्कर मारकर गिरा दिया. फिर कार सवार बदमाशों ने उसके सिर पर 5-7 फायर किए.

31 जनवरी 2019 (गुरुवार की सुबह) - गैंगवॉर में आया था मर्डर करने, पुलिस ने किया अरेस्ट

25 दिसंबर 2018 को बवाना इलाके में फिल्मी अंदाज में हुए गैंगवार के मुख्य शार्प शूटर दीपक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.दिलचस्प यह है कि दीपक एक बार फिर बवाना के उसी दुष्यंत उर्फ मोनू का मर्डर करने का पक्का इरादा बना कर आया था लेकिन पुलिस ने मंसूबों पर पानी फेर दिया. दुष्यंत उर्फ मोनू भी घोषित अपराधी है. तिहाड़ में बंद हितेश उर्फ हैप्पी से काफी समय से गैंगवार चल रहा है. मोनू को मारने के लिए कई बार दूसरे गुट ने गोलियां मारीं. उसके जिस्म में अभी तक एक दर्जन गोलियां लग चुकी हैं.

25 दिसंबर 2018 को भी दो गोली लगीं. मगर जान बच गई.

26 मई 2018 की सुबह जिम में घुसकर मोनू पर करीब पांच राउंड गोलियां चलाई थीं, जिसमें मोनू के हाथ और पैर में तीन गोली लगी थी. इसका भी सीसीटीवी विडियो वायरल हुआ था. पुलिस अफसरों के मुताबिक 25 दिसंबर को हमले के लिए हमलावरों ने एक दिन पहले केएन काटजू से वो कार लूटी थी.

18 जून 2018- बुराड़ी में गोगी और टिल्लू गैंग के बीच खुलेआम सड़क पर गैंगवॉर का खूनी खेल गया था. इसमें एक राहगीर महिला समेत 4 लोगों की मौत हो गई थी. 6 लोग घायल हुए थे.

16 मार्च 2018- टिल्लू गिरोह के बदमाशों ने मौर्या एंक्लेव में दिनदहाड़े गोगी गिरोह के सदस्य मोनू मान पर गोलिया बरसाकर हत्या कर दी थी. उसे 14 गोलिया मारी गई थीं, जिनमें नौ सिर में लगी थीं. मोनू अलीपुर का रहने वाला था. पनवाड़ी संदीप के पेट में गोली लगने से वह घायल हो गया था. मोनू व उसका दोस्त सोनीपत के दिग्विजय सरोहा को गोली मारने के मामले में आरोपित थे. दोनों को रोहिणी कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया था. कोर्ट से बाहर निकलते ही उन पर हमला हुआ.

14 जनवरी 2018- ताबड़तोड़ गोलियों से थर्राया रोहिणी, गैंगवार में युवक की हत्या

गैंगवार में एक 30 वर्षीय युवक को बदमाशों ने गोलियों से छलनी कर दिया. पूरी वारदात CCTV में कैद हो गई. अलीपुर के रहने वाले रवि भारद्वाज को कार में सवार होकर आए बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया. बदमाशों ने करीब 25 राउंड गोलियां चलाईं और रवि भारद्वाज को 15 से अधिक गोलियां लगीं. रवि भारद्वाज को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, हालांकि डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. जानकारी के मुताबिक, रवि अपने एक साथी के साथ रोहिणी कोर्ट किसी काम से गया था और काम खत्म कर प्रशांत विहार इलाके में स्थित लांसर स्कूल के पास एक दुकान से छोले-भटूरे ले रहा था.

बाहरी दिल्ली में इनका दबदबा

जितेंद्र गोगी, सुनील उर्फ टिल्लू, मंजीत सिंह उर्फ महल, कपिल सांगवान उर्फ नंदू, नफे सिंह उर्फ मंत्री, हेमंत उर्फ प्रधान, प्रदीप सोलंकी, रवींद्र उर्फ भोलू, धर्मेंद्र उर्फ गोलू, शक्ति शारदा, जोगिंद्र उर्फ भोलू, सिकंदर उर्फ सनी डोगरा, कुलदीप उर्फ हकला, जोगिंद्र उर्फ जग्गा, राजीव उर्फ बॉबी, अशोक नीलोठी, सुनील लाला माजरा, प्रदीप बबलू नजफगढ़, ईश्वर उर्फ पाली, रिंकू उर्फ लीला सांपला, संजीव मोनू, सुरेंद्र उर्फ चीता जींद, विनोद भिवानी, जितेंद्र बेरी, रवींद्र भोला, अजय खरखौदा, सुकेश ढाकला झज्जर, मनोज झज्जर, हितेश रेवाड़ी, परमिंद्र उर्फ टिंकू, कर्मबीर दिल्ली आदि शामिल हैं.

दिल्ली में इस तरह शुरू हुआ था गैंगवार

  • ऐसी धारणा है कि दिल्ली में क्रिमिनल पैदा नहीं होते हैं.
  • दिल्ली में दूसरे राज्यों के बदमाश आ कर गैंगवार करते हैं.
  • दिल्ली में जब भी गैंगवार हुए हैं वह आपस में चौधराहट को लेकर हुई है. इसका जीता-जागता उदाहरण था सन् 1994 में वृजमोहन त्यागी, सतवीर गुर्जर, महेंद्र फौजी गैंग का, जिसको आप वाकई में कह सकते हैं कि इनमें गैंगवार होते थे.
  • ये गिरोह दूसरे गिरोह के खून के प्यासे रहते थे.
  • दिल्ली में गैंगवार की शुरुआत पूर्व विधायक भरत सिंह के भाई कृष्ण पहलवान ने शुरू की थी.
  • दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में साल 1989-90 में पहली बार गैंगवार की शुरुआत हुई थी. यह गैंगवार कृष्ण पहलवान और उसके गैंग ने शुरू की थी. जमीनी विवाद में कृष्ण पहलवान ने अपने ही एक रिश्तेदार की हत्या कर दी थी.
  • इस हत्या के बाद कृष्ण पहलवान पांच साल तक जेल में रहा था.
  • जेल से छूटने के बाद कृष्ण पहलवान ने एक बार फिर से अपराध की दुनिया में कदम रख कर कई विरोधियों को ठिकाने लगा दिया था.
  • इसके बाद से ही हरियाणा से सटे दिल्ली इलाके में कृष्ण पहलवान, अनूप बलराज और विक्की डागर गिरोह में कई बार गैंगवार हो चुकी है.
  • ऐसा माना जाता है कि 90 के दशक में दिल्ली पुलिस इन गैंगलीडर्स को मारने के लिए नहीं ढूंढ़ती थी, बल्कि दिल्ली पुलिस के अधिकारी चौकन्ना रहते थे कि उनके इलाके में कहीं गैंगवार न हो जाए.
  • दिल्ली पुलिस उन दिनों मर्डर का केस रजिस्टर करने से डरती थी. उस समय कोई भी पुलिस अधिकारी नहीं चाहता था कि बेवजह फजीहत में पड़ कर कोर्ट-कचहरी का चक्कर काटे.

वो 90 के दशक का ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू श्रीवास्तव

90 के दशक में दिल्ली में ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू श्रीवास्तव नाम का एक गैंगेस्टर हुआ करता था, जिसने दिल्ली आकर अपराध की दुनिया में पैर जमाने की कोशिश की थी. बबलू श्रीवास्तव के शार्प शूटर मंजीत सिंह मग्गा और केके सैनी हुआ करते थे. मंजीत सिंह मग्गा और केके सैनी दो ऐसे शार्पशूटर थे, जो दिल्ली से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में मर्डर और किडनेपिंग जैसी घटनाओं को अंजाम दिया करते थे.बबलू श्रीवास्तव के बारे में कहा जाता है कि वह दाऊद के कंधे पर बैठकर दिल्ली में अपराध की दुनिया में पकड़ बनाना चाहता था. फिलहाल बबलू श्रीवास्तव यूपी के जेल में बंद है.

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साल 1994 में उस समय के बड़े गैंगस्टर बृजमोहन त्यागी को दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर लक्ष्मी नारायण राव (एलएन राव) की टीम ने दिनदहाड़े मार गिराया था. बृजमोहन त्यागी पश्चिमी उत्तर प्रदेश का रहने वाला था और दिल्ली में उस समय उसका खौफ हुआ करता था.

बृजमोहन त्यागी, महेंद्र फौजी और सतवीर गुर्जर

1994 में बृजमोहन त्यागी के मारे जाने के बाद एक दूसरे गिरोह महेंद्र फौजी का उदय हुआ था. महेंद्र फौजी गैंग माया त्यागी गैंगरेप के बाद खड़ा हुआ था.पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली में माया त्यागी ने ही गैंगवार शुरू कराई. माया त्यागी गैंगरेप के बाद दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली में दो गैंग खड़े हुए.एक त्यागी गैंग और एक महेंद्र फौजी गैंग. इन दोनों के खड़े होते ही एक और त्यागी गैंग 'बृजमोहन त्यागी' के नाम से खड़ा हो गया.

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इन सबके बीच एक और गैंग सतवीर गुर्जर गैंग का भी उदय हो गया. कहा जाता है कि इन तीनों-चारों गैंग में सतवीर गुर्जर गैंग सबसे ज्यादा खतरनाक था. धीरे-धीरे इन चारों गिरोहों का खात्मा तो गया. दिल्ली पुलिस के एनकाउंटर्स में ये सारे लोग एक-एक के मारे गए या फिर आपस में लड़कर खत्म हो गए. उन दिनों हालत यह होती थी कि जिस गैंग के एक दो लोग मारे जाते थे, अगले दो-चार दिनों में मारने वाले गैंग के भी दो-चार लोग को भी मार दिया जाता था.

(Input: IANS)

First Published: Wednesday, July 17, 2019 02:43:17 PM
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