असम-मेघालय में स्थिति गंभीर, हिंसक प्रदर्शनों के बीच सीआरपीएफ को कश्मीर से पूर्वोत्तर भेजा गया

NEWS STATE BUREAU  |   Updated On : December 12, 2019 08:19:47 PM
जल रहा है असम जिसे अफवाहों ने दी आंच.

जल रहा है असम जिसे अफवाहों ने दी आंच. (Photo Credit : न्यूज स्टेट )

ख़ास बातें

  •  असम में हालात काबू में नहीं आ रहे हैं और हिंसक प्रदर्शनों का दौर जारी है.
  •  केंद्रीय रिजर्व पुलिस की 12 अतिरिक्त कंपनियां गुरुवार को कश्मीर से रवाना.
  •  इंटरनेट पर प्रतिबंध 48 घंटे और बढ़ा. कई स्थानों पर सेना तैनात की गई.

New Delhi :  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के आश्वासन और अफवाहों से दूर रहने की अपील के बावजूद असम में हालात काबू में नहीं आ रहे हैं और हिंसक प्रदर्शनों का दौर जारी है. गुरुवार सुबह राजधानी गुवाहाटी में लोगों ने कर्फ्यू का उल्लंघन किया, तो राज्य में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए सेना ने फ्लैग मार्च किया है. हिंसा और प्रदर्शन रोकने में नाकाम पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है. हिंसा को रोकने के लिए कुछ जगहों पर पुलिस को गोली भी चलानी पड़ी है. पीएम की अपील के बाद असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है. इस बीच असम समेत पूर्वोत्तर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस की 12 अतिरिक्त कंपनियां गुरुवार को कश्मीर से रवाना हो गईं. इस बीच कैब के विरोध की आंच शिलांग तक पहुंच जाने से वहां भी कर्फ्यू लगा दिया गया है.

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पीएम नरेंद्र मोदी का कांग्रेस पर हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप
नागरिकता संशोधन बिल पर असम समेत पूर्वोत्तर में विरोध बढ़ता ही जा रहा है. यह तब है जब बुधवार को राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने साफतौर पर कहा था कि असम के मूल नागरिकों की संस्कृति उनकी परंपराओं और साहित्य को बदलने की कोई योजना नहीं है. इसके बाद गुरुवार को एक चुनावी सभा में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो-टूक कहा कि असम की सांस्कृतिक विविधता को अक्षुण्ण रखने के लिए केंद्र कोई समझौता नहीं कर रहा है. पीएम मोदी ने तो साफतौर पर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों पर अफवाह फैला पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा फैलाने का आरोप लगाया. यह अलग बात है कि इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध के चलते सही बात लोगों तक पहुंच नहीं पा रही है. इसके चलते राज्य सरकार को कई और ऐहितियाती उपाय अपनाने पड़े हैं.

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इंटरनेट पर 48 घंटे बढ़ा प्रतिबंध
कैब के खिलाफ लगातार हो रहे प्रदर्शन के बाद गुवाहाटी में बुधवार रात अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया था. इसके साथ ही 4 स्थानों पर सेना के जवानों को तैनात किया गया है, जबकि बुधवार को त्रिपुरा में असम राइफल्स के जवानों को तैनात भी किया गया था. बता दें कि पूर्वोत्तर में असम और त्रिपुरा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक को लेकर अफरा-तफरी की स्थिति बनी हुई है. असम में इंटरनेट सेवाओं को अगले 48 घंटे के लिए और बैन कर दिया गया है.

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मोदी-आबे की बैठक का स्थान स्पष्ट
केंद्र खासकर कैब के खिलाफ विरोध की स्थिति यह है कि 15 दिसंबर से पीएम नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष शिंजो आबे के बीच शिखर सम्मेलन की तैयारियों के तहत एक होटल के पास रैंप बनाया गया था. प्रदर्शनकारियों ने उसे भी क्षतिग्रस्त कर दिया. वहीं, रात में प्रदर्शनकारियों ने डिब्रूगढ़ के चबुआ और पनीटोला रेलवे स्टेशनों के नियंत्रण कक्ष में आग लगा दी. जोरहाट, गोलाघाट, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, शिवसागर, बोंगाईगांव, नगांव, सोनीतपुर और कई अन्य जिलों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकले.

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सेना मुस्‍तैद
असम के बोंगाईगांव जिले और कंचनपुर (राधानगर जिले) और त्रिपुरा में मनु (ढालई जिले) में सेना पूरी तरह मुस्तैद है. रक्षा पीआरओ लेफ्टिनेंट कर्नल पी खोंगसाई ने कहा, 'फील्ड कमांडर और सेना मुख्यालय स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं.' असम सरकार ने सेना से मदद मांगी थी. इसके बाद सेना की 5 कॉलम तैनात की गई है.

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ट्रेनों का संचालन बंद, परीक्षाएं स्थगित
तीन दिन से प्रदर्शन से प्रभावित त्रिपुरा में ट्रेनें नहीं चल रही हैं. वहां नेशनल और स्टेट हाइवेज सप्ताह की शुरुआत से ही सुनसान पड़े हैं. सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं. असम और त्रिपुरा में हो रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए रेलवे ने असम और त्रिपुरा आने-जाने वाली सभी यात्री ट्रेनों को निलंबित कर दिया और लंबी दूरी वाली ट्रेनों को गुवाहाटी में ही रोका जा रहा है. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता सुभानन चंदा ने बताया कि सुरक्षा स्थिति को देखते हुए यह फैसला बुधवार रात में लिया गया, जिसके बाद कई यात्री कामाख्या और गुवाहाटी में फंस गए. दिल्ली में अधिकारियों ने बताया कि तिनसुकिया, लुम्बडिंग और रंगिया खंड में ट्रेनें रद्द कर दी गई है और कोई भी ट्रेन गुवाहाटी से आगे नहीं जा रही है.

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सीआरपीएफ की 12 कंपनियां रवाना
इस बीच पूर्वोत्तर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ की 12 अतिरिक्त कंपनियां गुरुवार को कश्मीर से रवाना हो गईं. सूत्रों के मुताबिक नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद से अब तक कश्मीर से पूर्वोत्तर के लिए 40 कंपनियां भेजी जा चुकी हैं. गौरतलब है कि जम्मू एवं कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को पांच अगस्त को समाप्त किए जाने से पहले राज्य में सीआरपीएफ की 100 से अधिक कंपनियां तैनात की गई थीं.

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राज्य सरकार की अपील भी बेअसर
नागरिकता संशोधन विधेयक के संसद के दोनों सदनों में पारित हो जाने के बाद से पूर्वोत्तर में, खासतौर से असम में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. विधेयक में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक प्रताड़ना के कारण भाग कर भारत आए गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है. हालांकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने जिस तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगाए, उससे भ्रम और अफरा-तफरी का माहौल ज्यादा बढ़ गया है. ऐसे में केंद्र को भी राज्य सरकार से कड़े कदम उठाने का निर्देश देना पड़ा है.

First Published: Dec 12, 2019 08:19:47 PM
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