BJP से कुलदीप सेंगर को निकालने की खबर निकली झूठी, यूपी के प्रदेश अध्यक्ष बोले- सिर्फ सस्पेंड हैं

Yogendra Mishra  | Reported By : अमित सिंह |   Updated On : August 01, 2019 06:57:27 PM
स्वतंत्र देव सिंह। (फाइल फोटो)

स्वतंत्र देव सिंह। (फाइल फोटो) (Photo Credit : )

ख़ास बातें

  •  पहले खबर थी कि कुलदीप सेंगर को निष्कासित कर दिया गया है
  •  बाद में प्रदेश अध्यक्ष ने साफ किया कि कुलदीप सेंगर सिर्फ सस्पेंड हैं
  •  सुप्रीम कोर्ट ने 45 दिनों में सुनवाई पूरी करने को कहा

कानपुर:  

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने रेप के आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से निकाले जाने की बात को मीडिया की ऊपज बताया है. स्वतंत्रदेव सिंह ने न्यूज स्टेट से बात चीत में कहा कि ''कुलदीप जी, केवल पार्टी से निलंबित किया गया है. उन्हें पार्टी से निकाला नहीं गया है. वह तब से सस्पेंड हैं जब प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय थे.''

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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के बयानों से यह माना जा सकता है कि अभी भी कुलदीप सिंह सेंगर बीजेपी के विधायक हैं. वह भले ही जेल में हों लेकिन बीजेपी में अभी भी शामिल हैं. अभी तक खबर थी कि बीजेपी ने कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से बाहर निकाल दिया है.

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माना जा रहा था कि उन्नाव रेप कांड और एक्सीडेंट का मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने के बाद बीजेपी ने बड़ा एक्शन लिया है. लेकिन स्वतंत्रदेव सिंह ने साफ कर दिया है कि जब तक सीबीआई जांच चलती रहेगी वह पार्टी से लंबित रहेंगे. जब उनसे इस बारे में एक बार फिर से पुष्टि के लिए पूछा गया कि कुलदीप सेंगर क्या पार्टी से निलंबित हैं या निष्कासित है.

इसके जवाब में बीजेप प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि ''कुलदीप जी को निलंबित कर दिया गया है. महेंद्र पांडेय जी के समय से ही उन्हें निलंबित कर दिया गया था और वो निलंबित चल रहे हैं. सीबीआई जांच चल रही है. सीबीआई जांच जब शुरू हुई थी उन्हें 2018 में ही निलंबित कर दिया गया था.''

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई

उन्नाव रेप कांड की पीड़िता के एक्सीडेंट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज तीन बार सुनवाई की. सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम फैसले सुनाए. उन्नाव रेप केस और सड़क हादसे से जुड़े सभी 5 केस दिल्‍ली ट्रांसफर किए जाएंगे. दूसरा बड़ा फैसला यह आया कि दिल्ली की निचली अदालत 45 दिनों तक उन्‍नाव रेप कांड की रोजाना सुनवाई करेगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि 7 दिन में सड़क हादसे की जांच पूरी की जाए. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 25 लाख रुपये का मुआवजा पीड़िता को दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पीड़ित लड़की और उसके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने को कहा है. बताया जा रहा है कि अब उत्तर प्रदेश पुलिस की जगह CRPF पीड़ित लड़की और उसके परिजनों को सुरक्षा देगी.

First Published: Aug 01, 2019 06:00:47 PM
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