BREAKING NEWS
  • गाजियाबाद के नाले में आई 1000 और 500 के पुराने नोटों की 'बाढ़', निकालने वालों की लगी भीड़, देखिए VIDEO- Read More »
  • बौखलाए पाकिस्तान को भारतीय सेना ने दिया जवाब, उड़ा दी उसकी एक चौकी- Read More »
  • एक बार फिर टीम इंडिया का कोच बनने के बाद रवि शास्त्री ने कही दिल की बात, बोले- नहीं रुकेगा 'ये काम'- Read More »

ग्रामीणों ने आजमाई यह विधि और फिर 10 साल से सूखे पड़े हैंडपंप भी देने लगे पानी

News State Bureau  |   Updated On : July 20, 2019 01:03 PM
फाइल फोटो

फाइल फोटो

नई दिल्ली:  

वाटर लेवल घटने के कारण सूख चुके हैंडपंपों से एक बूंद पानी नहीं निकलता, लेकिन यही हैंडपंप धरती को लाखों लीटर पानी लौटा सकते हैं. सुनकर अचंभा होगा, लेकिन मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के आदिवासी विकासखण्ड कराहल के चार गांवों में 11 सूखे हैंडपंप और 2 कुएं जमीन के अंदर बारिश और गांव से उपयोग के बाद निकलने वाले दूषित पानी को फिल्टर करके जमीन के अंदर पहुंचा रहे हैं. इसके परिणाम यह आए कि गांव में जो हैडपंप व कुएं सूखे पड़े थे, उन्होंने पानी देना शुरू कर दिया.

यह भी पढ़ें- MP में BJP-Cong WAR: कॉलेज सिलेबस में बड़ा बदलाव, शंकराचार्य, दीनदयाल और वाजपेयी Syllabus से हटे

दरअसल, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए काम करने वाले श्योपुर के गांधी सेवा आश्रम ने जर्मनी की संस्था जीआईजेड एवं हैदराबाद एफप्रो संस्था के साथ मिलकर 2016 में यह प्रयोग कराहल के डाबली, अजनोई, झरेर और बनार गांव में किया. यह गांव इसलिए चुने गए, क्योंकि यहां के अधिकांश हैडपंप सूख चुके थे. इन गांवों में अंधाधुंध बोर इस तरह हुए कि दो बीघा खेत में 5-5 बोर थे, जिन्होंने जमीन के अंदर का पानी खींच लिया और गांव के पूरे बोर सूख गए. 2016 में हुए इस प्रयोग का असर यह हुआ कि बारिश के सीजन के बाद अजनोई, डाबली, झरेर और बनार गांव की बस्तियों के आसपास के वह सूखे हैंडपंप पानी देने लगे, जो 7 से 10 साल से सूखे पड़े थे.

सूखे हैंडपंप को पानी रिचार्ज की यूनिट बनाने में करीब 45 हजार रुपये का खर्च आया है, लेकिन इसका फायदा बहुत बड़ा है. यह खराब हैंडपंप एक साल में साढे तीन से चार लाख लीटर पानी जमीन के अंदर पहुंचाएगा. गौरलतब है कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार एक सामान्य हैंडपंप से हर साल 3 लाख 60 हजार लीटर तक पानी निकाला जाता है. यानी खराब हैंडपंप उतना ही पानी जमीन में वापस भेजेगा, जितना पानी एक सही हैंडपंप जमीन से खींच रहा है.

यह भी पढ़ें- सड़कों पर खून बहाने की धमकी देने वाले पूर्व विधायक को बीजेपी ने भेजा नोटिस, 15 दिन में मांगा जवाब

इस पद्धति को इंजेक्शन पद्धति कहा जाता है. जर्मनी की संस्था श्योपुर से पहले इसका सफल प्रयोग गुजराज व राजस्थान के सूखे इलाकों में कर चुकी है. इस पद्धति के तहत हैंडपंप के चारों ओर करीब 10 फीट गहरा गड्ढा खुदावाया है. हैंडपंप के केसिंग पाइप में जगह-जगह एक से डेढ़ इंच व्यास के 1200 से 1500 छेद किए गए हैं. पाइप के जरिए जो पानी जमीन में स्वच्छ पीने योग्य पानी जाएगा. इसके लिए गढ्डे में फिल्टर प्लांट भी बनाया है. इस फिल्टर प्लांट में बोल्डर, गिट्टी, रेता और कोयले जैसी देसी चीजें परत दर परत जमाई गई हैं. इनसे छनने के बाद ही बारिश का पानी हैंडपंप के छेदयुक्त पाइप तक पहुंचेगा। पाइप पर भी जालीदार फिल्टर लगाया जाएगा. इतनी प्रक्रियाओ से गुजरने के बाद ही बारिश का पानी जमीन के अंदर जा पाएगा. इसके तहत फिल्टर पानी को जमीन के अंदर पहुंचाया जाता है. एक सूखा हैंडपंप इतना पानी जमीन को लौटाता है, जिनता दूसरा हैडपंप जमीन से खींच लेता है.

यह वीडियो देखें- 

First Published: Saturday, July 20, 2019 01:03 PM
Latest Hindi News से जुड़े, अन्य अपडेट के लिए हमें फेसबुक पेज,ट्विटर और गूगल प्लस पर फॉलो करें

RELATED TAG: Sheopur, Madhya Pradesh, Shocking News, Groundwater Recharge,

डाउनलोड करें न्यूज़ स्टेट एप IOS और Android यूज़र्स इस लिंक पर क्लिक करें।

न्यूज़ फीचर

वीडियो