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Delhi: प्राइवेट स्कूलों को हाईकोर्ट से मिली फीस बढ़ाने की मंजूरी

PTI  |   Updated On : March 17, 2019 03:03 PM

नई दिल्ली:  

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के वेतन पर सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए राजधानी में निजी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को फीस में अंतरिम बढ़ोतरी के साथ आगे बढ़ने की अनुमति दी गई है. न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने 13 अप्रैल 2018 को दिल्ली सरकार के एक परिपत्र को रद्द करके अंतरिम शुल्क वृद्धि की अनुमति दी थी, जिसने शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education) की मंजूरी के बिना सरकारी भूमि पर काम करने वाले निजी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को ट्यूशन फीस लेने से रोक दिया था.

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सरकार के आदेश निजी स्कूलों के लिए लागू किया गया था, जो सरकारी जमीन पर थे और भूमि समझौते के अनुसार लीज पर हों, उन्हें स्कूल की फीस बढ़ाने के लिए DoE की पूर्व स्वीकृति लेने की आवश्यकता थी. यह सुनिश्चित करने के लिए कि स्कूल मुनाफाखोरी का सहारा लेकर शिक्षा के व्यवसायीकरण में लिप्त नहीं हैं या चार्जिंग कैपिटेशन शुल्क (गवर्नमेंट के द्वारा तय शुल्क से ज्यादा फीस) तो नहीं ले रहे, अदालत ने परिपत्र को अलग करते हुए कहा कि निजी स्कूलों द्वारा जमा की गई फीस के बयानों को DoE द्वारा जांच के अधीन किया जाएगा.

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17 अक्टूबर, 2017 के आदेश के अनुसार, अंतरिम शुल्क वृद्धि की अनुमति देने का निर्णय, DoE के होने के नाते, उक्त आदेश का खंडन करने का कोई औचित्य नहीं था. भूमि खंड के अनुसार शासित स्कूलों के संबंध में, 13 अप्रैल, 2018 को लगाए गए आदेश द्वारा किया गया था. 13 अप्रैल, 2018 को लागू किया गया आदेश, इसलिए, टिक नहीं सकता ... और बाद में हटा दिया गया. अदालत ने अपने 173 पेज के फैसले में कहा कि अंतरिम शुल्क बढ़ोतरी बिना किसी पूर्व स्वीकृति के सभी निजी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों के पक्ष में तुरंत संचालित होगी. कोर्ट ने अपने 173 पेज के फैसले में कहा कि एक्शन कमेटी ने मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों ( Action Committee Unaided Recognised Private Schools)की याचिका को खारिज कर दिया सर्कुलर को चुनौती दी थी.

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अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई स्कूल वास्तव में शिक्षा के व्यावसायीकरण में लिप्त पाया जाता है, तो DoE इस तरह के संस्थान के खिलाफ, Delhi Schools Education Act and Rules के अंतर्गत प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए कार्यवाही करने का अधिकार सुरक्षित रखता है.

एक्शन कमिटी ने अधिवक्ता कमल गुप्ता के माध्यम से दायर याचिका में कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम ने सभी स्कूलों को समान कर दिया, शिक्षकों और कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन और भत्ते के मामले में, इसलिए, चुनिंदा रूप से वापस लेने का कोई औचित्य नहीं था. 17 अक्टूबर, 2017 के आदेश ने 7 वीं CPC सिफारिशों को लागू करने के लिए फीस में अंतरिम बढ़ोतरी की अनुमति दी.

First Published: Sunday, March 17, 2019 02:56 PM

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