आखिर भगवान शिव शरीर पर क्यों लगाते हैं भस्म, जानें इसका महत्व और पूजा-विधि

न्यूज स्टेट ब्यूरो  |   Updated On : December 16, 2019 12:51:20 PM
आखिर भगवान शिव शरीर पर क्यों लगाते हैं भस्म, जानें इसका महत्व और पूजा-विधि

lord Shiva (Photo Credit : (फाइल फोटो) )

नई दिल्ली:  

सप्ताह के सात दिनों में सोमवार भगवान शिव का दिन माना गया है. इस दिन भगवान शिव की पूजा और दर्शन का विशेष महत्व है. भगवान शिव को सभी देवताओं में सबसे ज्यादा दयालु माना जाता है इसलिए इन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है. कहते है शिवजी को अगर कोई सच्चे दिल से जल और 2 बेलपत्र भी चढ़ा देता है तो वो अपने भक्त से जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी हर मनोकामना को पूर्ण कर देते हैं.

और पढ़ें: इन मंत्रों के साथ करें भगवान शनिदेव की पूजा, दूर हो जाएंगे सारे कष्ट

भगवान शिव सृष्टि के संहारक भी हैं और रक्षक भी. क्रोध में वो तांडव करते हैं तो संसार की रक्षा के लिए समुद्र मंथन से निकला विष भी पी जाते हैं. भक्तों की पीड़ा उन्हें परेशान करती है और उनकी आराधना प्रसन्न. आज हम आपको शिव के पूजा से लेकर उनके शरीर पर भस्म लगाने की महत्व के बारें में बताएंगे.

क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान शिव बिना आभूषणों के क्यों रहते हैं? उनके गले में माला के नाम पर सांप, सिर पर मुकुट की जगह जटाएं, शरीर पर वस्त्रों की बजाए बाघ की खाल और शरीर पर चंदन का लेप नहीं, बल्कि भस्म क्यों है? आपको बता दें कि यह भस्म लकड़ी की नहीं, बल्कि चिता की राख होती है. इसे लगाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव को मृत्यु का स्वामी माना गया है. इसी वजह से 'शव' से 'शिव' नाम बना. महादेव के मुताबिक शरीर नश्वर है और इसे एक दिन भस्म की तरह राख हो जाना है. जीवन के इस पड़ाव के सम्मान में शिव जी अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं.

ये भी पढ़ें: शास्त्रों में सोम प्रदोष व्रत का है खास महत्व, मनचाहा जीवनसाथी से लेकर पूर्ण होती है ये इच्छाएं

एक और कथा प्रचलित है कि जब सति ने क्रोध में आकर खुद को अग्नि के हवाले कर दिया था, उस वक्त महादेव उनका शव लेकर धरती से आकाश तक हर जगह घूमे थे. विष्णु जी से उनकी यह दशा देखी नहीं गई और उन्होंने माता सति के शव को छूकर भस्म में तब्दील कर दिया. अपने हाथों में भस्म देखकर शिव जी और परेशान हो गए और सति की याद में वो राख अपने शरीर पर लगा ली.

धार्मिक ग्रंथों में यह भी कहा गया है कि भगवान शिव कैलाश पर्वत पर वास करते थे. वहां बहुत ठंड होती थी. ऐसे में खुद को सर्दी से बचाने के लिए वह शरीर पर भस्म लगाते थे. आज भी बेल, मदार के फूल और दूध चढ़ाने के अलावा लगभग हर शिव मंदिर में भस्म आरती होती है.

- ऐसे तो शिव श्रृद्धा मात्र से प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन यदि उनकी पूजा नियमानुसार की जाए तो अधिक फलदायी होती है. जानें भगवान शिव की पूजा विधि

जलाभिषेक

जलाभिषेक करते समय ध्यान रहे कि सबसे पहले भगवान गणेश को, फिर मां पार्वती और उसके बाद कार्तिकेय को, फिर नंदी और फिर अंत में शिव प्रतीक शिवलिंग का जलाभिषेक करें. साथ ही "ऊं नमं शिवाय' मंत्र जाप मन में करते रहें.

और पढ़ें: भगवान शिव को चढ़ाने जा रहे बेलपत्र तो इन बातों का रखें ध्‍यान, नहीं तो होगा बड़ा नुकसान

पंचामृत अभिषेक

इसमें दूध, दही, शहद, शुद्ध घी और चीनी मिलाए. जलाभिषेक की तरह गणेश जी शुरुआत करें. उसके बाद मां पार्वती, कार्तिकेय, नंदी और फिर शिवलिंग पर चढ़ाएं. उसके बाद केसर के जल से स्नान कराएं. फिर इत्र अर्पित करें और वस्त्र पहनाएं. चंदन लगाकर फिर 11 या 21 चावल के दाने चढ़ाएं.

भगवान शिव को माीठा चढ़ाएं

शिव को मीठा बहुत पसंद है इसलिए भगवान शिव को मिष्ठान अवश्य चढ़ाएं. मीठे में गुड़ या चीनी भी अर्पित कर सकते हैं. उसके बाद फूल, बेल पत्र, भांग-धतूरा चढ़ाएं. श्रद्धानुसार शुद्ध घी या फिर तिल के तेल का दीपक जलाएं.

शिव चालीसा का करें पाठ

अभिषेक के बाद शिव चालीसा या फिर श्री रुद्राष्टकम् का पाठ करने के बाद भगावन शिव की आरती करें.

और पढ़ें: Amarnath Yatra 2019: टूटा 4 साल का रिकॉर्ड, 16 दिनों में लगभग 2 लाख श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन

भगवान शिव की पूजा-अर्चना से होते हैं यह फायदें

  • मनोकामना की पूर्ति होती है.
  • जीवन में आ रही परेशानियां दूर हो जाती है.
  • गृहस्थ जीवन में खुशियां आती हैं.
  • पापों का नाश होता है.
  • बीमारियां दूर होती हैं.
  • मन और दिमाग को शांति मिलती है.
  • शत्रुओं का नाश होता है.
  • जीवन में समृद्धि की प्राप्ति होती है.
First Published: Dec 16, 2019 12:51:20 PM

RELATED TAG: Lord Shiva, Bhasma,

Post Comment (+)

न्यूज़ फीचर

वीडियो