PICS: महिला प्रधान बोल्ड फिल्में जिन्होंने तोड़ी सामाजिक मान्यताएं

Updated On : July 23, 2017 12:26 PM
लिपस्टिक अंडर माय बुर्का (पोस्टर)
लिपस्टिक अंडर माय बुर्का (पोस्टर)
सेंसर बोर्ड की चौखट पर लंबे समय तक सर्टिफिकेट का इंतजार करने वाली विवादों से घिरी फिल्म 'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का' को कुछ दिन पहले ही रिलीज किया गया। फिल्म हमारे समाज की दकियानूसी सोच को दरकिनार कर आजादी से जीवन जीने वाली चार महिलाओं की कहानी है। फिल्म अलग-अलग उम्र की चार ऐसी महिलाओं की कहानी है, जो अपने हिसाब से अपनी जिंदगी जीने में यकीन रखती हैं। कोंकणा सेन शर्मा,रत्ना पाठक शाह, आहना कुमरा, पल्बिता बोरठाकुर ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।
2016 में आयी फिल्म 'पार्चड'
2016 में आयी फिल्म 'पार्चड'
'पार्चड' मतलब सूखा। फिल्म की डायरेक्टर लीना यादव ने इस शब्द से गुजरात के एक गांव की तीन स्त्रियों के माध्यम से रूखी-निर्मम तस्वीर पेश की थी। फिल्म को 24 इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाया गया था जिसमें से 18 बार इसे अवार्ड्स से सम्मानित भी किया गया है। फिल्म की स्क्रिप्ट बहुत ही तीक्ष्ण कटार की तरह थी जिसने कई सारे मुद्दे उठाये थे जैसे बाल विवाह, पंचायती राज, पुरुष प्रधानता और महिलाओं पर अत्याचार।
ऐंग्री इंडियन गॉडेसेस
ऐंग्री इंडियन गॉडेसेस
पान नलिन द्वारा निर्देशित फिल्म ऐंग्री इंडियन गॉडेसेस पांच लड़कियों के ग्रुप की कहानी है जो मस्ती करता है, हंसता है, रोता है, गाता है। स्क्रिप्ट में एक बच्ची को मां-बाप का प्यार ना मिल पाना, एक लड़की को कोर्ट से इन्साफ ना मिल पाना, राह चलते लड़की को छेड़ना, जैसी घटनाओं को दर्शाया गया था। फिल्म धारा 377 पर तंज कसती है तो कभी दामिनी रेप केस पर दी गई 'सामाजिक' दलीलों को तमाचे जड़ती है। फिल्म में होमोसेक्शुअलिटी पर क्रिस्टिऐनिटी के रुख को भी टटोला गया था।
विद्या बालन अभिनीत फिल्म 'द डर्टी पिक्चर'
विद्या बालन अभिनीत फिल्म 'द डर्टी पिक्चर'
विद्या बालन के कमाल के अभिनय और मिलान लुथरिआ के बेजोड़ निर्देशन ने फिल्म 'द डर्टी पिक्चर' को बेहद खूबसूरत अंदाज में पेश किया था। फिल्म वैसे तो 80 के दशक की दक्षिण भारतीय फिल्मो की कलाकार सिल्क स्मिता की जीवनी थी लेकिन बॉलीवुड के चमक के पीछे के अंधेरे को उजागर करने में सफल रही थी। फिल्म के डायलॉग दमदार थे और नारी शरीर के प्रति लोगों की मासिकता और फिल्म जगत की सोच पर कटाक्ष थे।
चार राष्ट्रीय पुरस्कार जीते थे फिल्म 'चांदनी बार' ने
चार राष्ट्रीय पुरस्कार जीते थे फिल्म 'चांदनी बार' ने
कुछ फिल्मे आपको सोचने पर मजबूर कर देती हैं, ऐसी ही फिल्म थी मधुर भंडारकर द्वारा निर्देशित 'चांदनी बार'। मुंबई की बार डांसर्स की जिंदगी के अंधेरे पहलुओं को जिस बारीकी से तब्‍बु ने फिल्‍म में दिखाया है, उसके चलते ये फिल्‍म एक माइल स्‍टोन बन गयी। 2001 में आयी इस फिल्म में अतुल कुलकर्णी भी मुख्या भूमिका में थे। तब्बू को 'बेस्ट एक्ट्रेस' के अवॉर्ड के साथ ही फिल्म ने चार राष्ट्रीय पुरस्कार जीते थे।
दीपा मेहता की फिल्म 'फायर' का पोस्टर
दीपा मेहता की फिल्म 'फायर' का पोस्टर
इस्मत चुगतई की किताब 'लिहाफ' से प्रेरित दीपा मेहता की फिल्म 'फायर' 1996 में बनी थी लेकिन सेंसर बोर्ड ने इसे 1998 में एडल्ट केरिटीफिकेट के साथ पास किया। 'फायर' दो औरतों के समलैंगिग रिश्तों पर आधारित थी। जो कि हमारे 'सभ्य समाज' में अस्वीकार्य है। फिल्म में शबाना आजमी और नंदिता दास ने अपनी बेहतरीन अदाकारी की छाप छोड़ी है।
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