Kumbh Mela 2019: पहले शाही स्नान के दिन दिखा नागा बाबाओं का अनोखा रंग

Updated On : January 15, 2019 11:05 PM
Kumbh Mela 2019

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प्रयागराज कुंभ में मंगलवार को मकर संक्रांति पर पहला शाही स्नान शुरू हुआ. शाही स्नान के लिए सबसे पहले संगम तट पर श्री पंचायती अखाड़ा महानिवार्णी का जुलूस पहुंचा। अखाड़े के देव भगवान कपिल देव तथा नागा संन्यासियों ने अखाड़े की अगुवाई की.
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संतों के तेरह अखाड़ों में सात संन्यासी अखाड़े ही नागा साधु बनाते हैं:- ये हैं जूना, महानिर्वणी, निरंजनी, अटल, अग्नि, आनंद और आवाहन अखाड़ा.
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पुराणों में कुंभ की अनेक कथाएं मिलती हैं. भारती जनमानस में तीन कथाओं का विशेष महत्व है. लेकिन इस मेले का सबसे रहस्यमयी रंग होते हैं नागा साधु, जिनका संबंध शैव परंपरा की स्थापना से है. नागा साधुओं की लोकप्रियता है. संन्यासी संप्रदाय से जुड़े साधुओं का संसार और गृहस्थ जीवन से कोई लेना-देना न होना. आपको बता दें नागा बाबाओं का जीवन आम इंसान से सौ गुना ज्यादा कठिन होता है
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महाकुंभ के दौरान नागा साधु बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है लेकिन हर किसी के लिए नागा बनना संभव नहीं है. नागा साधु बनने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और संन्यासी जीवन जीने की प्रबल इच्छा होनी चाहिए. सनातन परंपरा की रक्षा करने और इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग संन्यासी अखाड़ों में हर महाकुंभ के दौरान नागा साधु बनने की प्रक्रिया अपनाई जाती है.
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कुंभ पर्व प्रत्येक 12 वर्ष पर आता है. प्रत्येक 12 वर्ष पर आने वाले कुंभ पर्व को अब शासन स्तर से महाकुंभ और इसके बीच 6 वर्ष पर आने वाले पर्व को कुंभ की संज्ञा दी गयी है.
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कुंभ में 6 शाही स्नान हैं जो 55 दिनों तक चलेगा. इस दौरान करीब 15 करोड़ लोग संगम में आस्था की डुबकी लगाते हुए पुण्य कमाएंगे.
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