दशहरा स्पेशल: सीता की खोज में हनुमान का निकलना और अंतत: लंका पहुंचना, देखिये सुंदरकाण्ड

Updated On : Sep 26, 2017 08:34 AM

सुंदरकाण्ड: दशहरा स्पेशल में जानें कैसे सीता की खोज में हनुमान पहुंचे लंका

सुंदरकाण्ड: दशहरा स्पेशल में जानें कैसे सीता की खोज में हनुमान पहुंचे लंका

‘रामायण’ के पांचवा भाग सुंदरकाण्ड है। इस भाग में श्रीराम से आदेश मिलने के बाद उनके परमभक्त हनुमान सीता की तलाश में निकल जाते हैं और अनेक परेशानियों को पार करते हुए पहुंचते हैं लंका, जहां उन्हें माता सीता के दर्शन होते हैं और वो माता सीता को श्रीराम से मिली निशानी भेंट करते हैं।

श्रीराम के परमभक्त हनुमान का सीता की तलाश में निकलना

श्रीराम के परमभक्त हनुमान का सीता की तलाश में निकलना

श्रीराम ने माता सीता की खोज का कार्यभार पवनपुत्र हनुमान को दिया। श्री हनुमान माता सीता की खोज के लिए निकले और कठिन चुनौतियों को लांघ समुद्र पार कर लंका पहुंच गए।

हनुमान का लंका में पहुंचना

हनुमान का लंका में पहुंचना

समुद्र के रास्ते हनुमान को लंका पहुंचने के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यहां राक्षसी सुरसा ने हनुमान की परीक्षा ली और उसे योग्य तथा सामर्थ्यवान पाकर अपना आशीर्वाद भी दिया। इस मार्ग में हनुमान ने छाया पकड़ने वाली राक्षसी का वध किया और लंकिनी पर प्रहार करके अंतत: लंका में प्रवेश किया।

लंका में विभीषण से मिले हनुमान

लंका में विभीषण से मिले हनुमान

लंका पहुंचने के बाद हनुमान ने जब सीता की तलाश शुरु की तो यहां उनकी भेंट विभीषण से हुई। विभीषण भी हनुमान की ही भांति श्रीराम के भक्त थे। लंका में श्रीराम के भक्त से मुलाकात कर हनुमान आश्चर्यचकित भी हुए। फिर विभीषण ने माता सीता के स्थान की जानकारी हनुमान की दी। विभीषण रावण का भाई था।

अशोकवाटिका में हनुमान का पहुंचना

अशोकवाटिका में हनुमान का पहुंचना

सीता की तलाश में हनुमान लंका में रावण की अशोकवाटिका में जा पहुंचे। यहां अशोकवाटिका पर चारों ओर से रावण द्वारा तैनात राक्षसी सेना का पेहरा था। जब हनुमान छुपते-छुपाते अशोकवाटिका में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि रावण सीता को धमका रहा था।

सीता से हनुमान का मिलना और राममुद्रिका भेंट करना

सीता से हनुमान का मिलना और राममुद्रिका भेंट करना

सीता और रावण के बीच तनावपूर्ण वार्तालाप के बाद जब रावण वहां से गया तो त्रिजटा नाम की राक्षसी सैनिक सीता को सान्त्वना देती हैं। फिर एकदम एकान्त होने पर हनुमान सीता से भेंट करते हैं और उन्हें राम की मुद्रिका प्रस्तुत कर अपना परिचय कराते हैं। इसके बाद सीता से आशीर्वाद प्राप्त कर अशोकवाटिका का विध्वंस कर रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध करते हैं।

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