लाइफ स्टाइल: करियर की अंधी दौड़ से बढ़ रही शादियों की उम्र, लेट शादी के ये हैं नुकसान

News State Bureau  |   Updated On : July 08, 2019 07:44:36 PM
प्रतिकात्‍मक चित्र

प्रतिकात्‍मक चित्र (Photo Credit : )

नई दिल्‍ली:  

आजकल के युवा अपने करियर को लेकर महत्वाकांक्षी हैं. शादी से पहले जॉब में अच्छी तरह से सेटल हो जाना चाहते हैं. यही वजह है कि अब लेट मैरिज का चलन काफी बढ़ा है. एक बड़ा तबका मानता है कि अगर 30 साल के बाद शादी होती है तो अपने पार्टनर को समझने और एडजस्ट करने में आसानी होती है. लेकिन लेट शादी के नुकसान भी हैं.

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बदली हुई जीवनशैली और लेट मैरिज के चलते महिलाओं के बढ़ती उम्र के साथ अंडों में खराबी पाई गई है. कई महिलाओं में जेनेटिक व मेटाबॉलिक डिसआर्डर के कारण कम उम्र में भी अंडों की संख्या में कमी व उसकी गुणवत्ता में गिरावट सामने आ रही है, जिससे उनमें गर्भधारण की समस्या बढ़ रही है. शोध कहते हैं कि कुल शादियों के 15 फीसदी जोडों में प्रति वर्ष नि:संतानता की समस्या सामने आ रही है.

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भारतीय समाज में लड़कियों के मां बनने की उम्र में भारी बदलाव हुआ है. पिछली पीढ़ी की लड़कियां 21 से 23 साल की उम्र में मां बन गई थीं, वहीं उनकी बेटियां 25 से 27 की आयु में मां बनी हैं या फिर इससे भी आगे की उम्र में. जिसके कारण महिला नि:संतानता दर में वृद्धि देखी गई है. मां बनने की उम्र में यह बदलाव शिक्षा और नौकरी के कारण आई है.

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इंडियन मेडिकल एंड रिसर्च काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं में उम्र के साथ-साथ प्राकृतिक तरीके से गर्भवती होने की संभावना भी कम होती जाती है. 35 से नीचे यह दर 47.6 प्रतिशत होती है, वहीं 35 से 37 साल की उम्र में 38.9 फीसदी, 38 से 40 साल की उम्र में 30.1 और 41 से 42 साल की उम्र में 20.5 फीसदी महिलाएं ही गर्भवती हो पाती हैं.

अभिभावकों की सोच बदली

अभिभावकों की सोच का दायरा भी अब बढ़ा है. बदलते वक्त के साथ अभिभावकों की सोच में भी काफी बदलाव आया है. शादी को लेकर उनका नजरिया भी बदला है. अपने बच्चों को यह शिक्षा दे रहे हैं कि शादी जिंदगी नहीं है, शादी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यही कारण है कि अब शादियों की उम्र बढ़ती जा रही है. जहां पहले आमतौर पर 18 से 25 साल के बीच शादियां होती थी वह अब 25 से 35 होती जा रही है.

First Published: Jul 08, 2019 07:43:00 PM
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