BREAKING NEWS
  • IPL 12 CSK vs RCB: चेन्नई सुपरकिंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के पहले मैच में खेलेंगे ये खिलाड़ी, देखें Playing 11- Read More »
  • SSC Result 2019: SSC सोमवार को जारी करेगा हिंदी ट्रासलेटर, हिंदी प्राध्यापक का रिजल्ट- Read More »
  • पीएम नरेंद्र मोदी ने लिखा ब्‍लॉग, शहीदों और लोहिया को याद किया और कांग्रेस पर हमला बोला- Read More »

kumbh 2019: क्या होता है कल्पवास, जानें क्या है इसके खास 21 नियम

NEWS STATE BUREAU  |   Updated On : December 24, 2018 01:13 PM
2019 जनवरी में प्रयागराज में अर्द्ध कुंभ मेले का आयोजन होने वाला है.

2019 जनवरी में प्रयागराज में अर्द्ध कुंभ मेले का आयोजन होने वाला है.

नई दिल्ली:  

वर्ष 2019 में आयोजित होने वाले प्रयागराज (Prayagraj Kumbh 2019)  में अर्द्ध कुंभ (Ardh Kumbh) मेले का आयोजन होने वाला है. कुम्भ मेले के दौरान संगम तट पर कल्पवास (Kalpwaas) का विशेष महत्व है. पद्म पुराण एवं ब्रह्म पुराण के अनुसार कल्पवास की अवधि पौष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी से प्रारंभ होकर माघ मास की एकादशी तक है. पद्म पुराण में महर्षि दत्तात्रेय ने कल्पवास की पूर्ण व्यवस्था का वर्णन किया है. उनके अनुसार कल्पवासी को इक्कीस नियमों का पालन करना चाहिए.

ये हैं नियम- सत्यवचन, अहिंसा, इन्द्रियों का शमन, सभी प्राणियों पर दयाभाव, ब्रह्मचर्य का पालन, व्यसनों का त्याग, सूर्योदय से पूर्व शैय्या-त्याग, नित्य तीन बार सुरसरि-स्न्नान, त्रिकालसंध्या, पितरों का पिण्डदान, यथा-शक्ति दान, अन्तर्मुखी जप, सत्संग, क्षेत्र संन्यास अर्थात संकल्पित क्षेत्र के बाहर न जाना, परनिन्दा त्याग, साधु सन्यासियों की सेवा, जप एवं संकीर्तन, एक समय भोजन, भूमि शयन, अग्नि सेवन न कराना. जिनमें से ब्रह्मचर्य, व्रत एवं उपवास, देव पूजन, सत्संग, दान का विशेष महत्व है.

यह भी पढें- कुंभ नहाने जा रहे हैं तो इन जगहों पर जाना न भूलें, एक नजर में जानें प्रयागराज को

ब्रह्मचर्य

ब्रह्मचर्य का तात्पर्य है ब्रह्म में विचरण करना अर्थात स्वयं ब्रह्म होने की ओर अग्रसर हो जाना. सरल शब्दों में कहा जाए तो कामासक्ति का त्याग ही ब्रह्मचर्य है. जैसे विलासिता पूर्ण व्यसनों का त्याग, गरिष्ट भोज्य पदार्थों का त्याग, कम वासना का त्याग ब्रह्मचर्य पालन के मुख्य अंग हैं.

व्रत एवं उपवास

व्रत एवं उपवास कल्पवास का अति महत्वपूर्ण अंग है| कुम्भ के दौरान विशेष दिनों पर व्रत रखने का विधान किया गया है. व्रतों को दो कोटियों में विभाजित किया गया है – नित्य एवं काम्य. नित्य व्रत से तात्पर्य बिना किसी अभिलाषा के ईश्वर प्रेम में किये व्रतों से है, जिसकी प्रेरणा अध्यात्मिक उत्थान पे होती है. वहीँ काम्य व्रत किसी अभीष्ट फल की प्राप्ति के लिए किये गये व्रत होते हैं. व्रत के दौरान धर्म के दसों अंगों का पूर्ण पालन किया जाना आवश्यक होता है. मनु के अनुसार ये दस धर्म हैं – धैर्य, क्षमा, स्वार्थपरता का त्याग, चोरी न करना, शारीरिक पवित्रता, इन्द्रियनिग्रह, बुद्धिमता, विद्या, सत्य वाचन एवं अहिंसा. इसके सम्बन्ध में एक श्लोक में वर्णन भी मिलता है.

धृतिः क्षमा दमोअस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः.
धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्..

देव पूजन

ऐसी मान्यता हैं की कुम्भ के समय देवतागण स्वयं संगम तट पर विचरण करते हैं इस समय श्रद्धा भाव से उनका ध्यान करने से कल्याण होता है. देव पूजन में श्रद्धा का भाव सर्वोपरी है, यदि भक्ति में श्रद्धा का भाव ही न हो तो वह कदापि फलदायी नहीं होती.

यह भी पढ़ें- Kumbh Mela 2019: कब-कब हैं स्नान के प्रमुख दिन जानें यहां

दान

कुम्भ के दौरान दान का बड़ा महत्व है. यहाँ दान देने वाले एवं लेने वाले, दोनों को लाभ होता है अतः कुम्भ में दिया दान त्याग से भी श्रेष्ठ माना गया है. कुम्भ में गो-दान, वस्त्र दान, द्रव्य दान, स्वर्ण दान आदि का बड़ा महत्व है. सम्राट हर्षवर्धन तो यहाँ हर बारह वर्ष पर अपना सर्वस्व दान दे देते थे.

सत्संग

सत्संग का शाब्दिक अर्थ है सत्य की संगत में रहना. कुम्भ के समय श्रद्धालुओं को सन्तों के सानिध्य में रहना चाहिए, उनके प्रवचनों को सुनना चाहिए, निस्वार्थ भाव एवं ऊंच-नीच का आडम्बर समाप्त हो सके और मनुष्य उत्कृष्ट जीवन उद्देश्य की ओर अग्रसर हो सके .

श्राद्ध एवं तर्पण

श्राद्ध से तात्पर्य श्रद्धा पूर्वक पितरों को पिण्ड दान देने से है. श्राद्धकर्म पुरोहितों के माध्यम से कराया जाने वाला कर्म है. जिसके लिए प्रयागराज में विशेषकर पुरोहित होते हैं जिनके पास श्राद्ध कर्म करवाने हेतु आये व्यक्ति की वंशावली होती है. तर्पण कर्म के लिए पुरोहित की अनिवार्यता नहीं होती यदि व्यक्ति समूचित प्रक्रिया का समस्त सम्पादन कर सकता है तो यह कर्म स्वयंद्वारा भी किया जा सकता है.

वेणी-दान

प्रयागराज में वेणी दान का बड़ा महत्व है. इसमें व्यक्ति अपनी शिखा के बाल छोड़कर समस्त बाल गंगा में अर्पित कर देता है. ऐसी मान्यता हैं की केश के मूल में पाप निवास करता है ऐसे में लोकमान्यता है कि प्रयाग में कुम्भ मेले से बेहतर स्थान व समय वेणी दान के लिए नहीं हो सकता है. कल्पवास के दौरान साफ सुथरे श्वेत वस्त्रो को धारण करना चाहिए. पीले एव सफ़ेद रंग का वस्त्र श्रेष्ठकर होता है. इस प्रकार से आचरण कर मनुष्य अपने अंतःकरण एवं शरीर दोनों का कायाकल्प कर सकता है.

First Published: Monday, December 24, 2018 12:31 PM

RELATED TAG: Kalpwaas, Kumbh 2019, Prayagraj Kumbh Mela 2019, 2019 Allahabad Ardh Kumbh Mela, Kumbh Mela Allahabad 2019, Allahabad Kumbh 2019,

देश, दुनिया की हर बड़ी ख़बर अब आपके मोबाइल पर, डाउनलोड करें न्यूज़ स्टेट एप IOS और Android यूज़र्स इस लिंक पर क्लिक करें।

Latest Hindi News से जुड़े, अन्य अपडेट के लिए हमें फेसबुक पेज,ट्विटरऔरगूगल प्लस पर फॉलो करें

News State ODI Contest
Newsstate Whatsapp

न्यूज़ फीचर

वीडियो

फोटो