जानें अपने अधिकार: बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की ज़िम्मेदारी

भारत में शिक्षा की उपलब्धता को वंचित समाज तक पहुंचाने में 'मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार' ने पिछले कई सालों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  |   Updated On : November 24, 2017 09:39 AM
ख़ास बातें
  •  6- 14 साल तक के बच्चों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करना मौलिक अधिकार है
  •  शिक्षा का यह मौलिक अधिकार 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू कर दिया गया
  •  प्राइवेट स्कूलों में भी ग़रीब और वंचित वर्गों के लिए 25% सीट आरक्षित किया गया है

नई दिल्ली :  

आधुनिक समाज में शिक्षा मानव के संपूर्ण विकास के लिए सबसे ज़रूरी और अनिवार्य साधन है। इसलिए इसे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी दुनिया के सभी देशों की प्राथमिकताओं में रही है।

भारत में शिक्षा की उपलब्धता को वंचित समाज तक पहुंचाने में 'मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार' ने पिछले कई सालों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसके लिए सरकार ने 2002 में लाए गए 86वें संविधान संशोधन अधिनियम को 4 अगस्त 2009 को संसद में पारित किया और इसे संविधान के अनुच्छेद 21(A) में मौलिक अधिकार के अंतर्गत शामिल किया गया।

शिक्षा का यह मौलिक अधिकार 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू कर दिया गया। इसके साथ ही भारत उन 135 देशों में शामिल हुआ, जिसके संविधान में शिक्षा को अनिवार्य किया गया।

इसके अलावा राज्य के नीति- निर्देशक तत्व के अंतर्गत अनुच्छेद 45 में भी मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा के प्रावधान को जोड़ा गया, जिसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।

साथ ही संविधान के अनुच्छेद 51(A) में दर्ज़ मौलिक कर्तव्यों में जोड़कर अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए बुनियादी शिक्षा उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया।

शिक्षा के अधिकार अधिनियम के मुख्य प्रावधान

  • 6- 14 साल तक के बच्चों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करना मौलिक अधिकार है।
  •  हर बच्चे के लिए आठवीं कक्षा तक की नि:शुल्क पढ़ाई सुनिश्चित कराना सरकार की ज़िम्मेदारी है।
  • यदि निश्चित उम्र का बच्चा किसी कारण से स्कूल जाने से वंचित रह गया हो तो शिक्षा के लिए उसकी उम्र के अनुसार उचित कक्षा में प्रवेश दिलाया जाएगा।
  • प्राइवेट स्कूलों में भी शिक्षा की अनिवार्यता को लागू कराने के लिए ग़रीब और वंचित वर्गों के लिए 25% सीट आरक्षित किया गया। ऐसा नहीं करने पर स्कूलों की मान्यता रद्द करने का भी प्रावधान है।
  • इसको अमल में लाने की ज़िम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार, दोनों की है। इसमें कुल व्यय का 55 फ़ीसदी हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी।

इन सबके अलावा सही छात्र- शिक्षक अनुपात, शिक्षकों की नियुक्तियां, बच्चों को दंडित करने पर रोक, स्कूल में पुस्तकालय, पीने के पानी और खेल के मैदान की उचित व्यवस्था भी स्कूलों को करनी होगी।

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First Published: Thursday, November 23, 2017 10:41 PM

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