NIA ने झीरम कांड की फाइल राज्य सरकार को देने से किया इंकार, सीएम भूपेश बघेल बोले 'यह बदलापुर नहीं साहब'
Wednesday, 13 February 2019 01:15 PM

रायपुर:  

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को विधानसभा में जानकारी दी कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने झीरम कांड की फाइल राज्य सरकार को देने से मना कर दिया है. उल्लेखनीय है कि मई 2013 में हुई इस घटना में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वीसी शुक्ला, महेन्द्र कर्मा समेत करीब 31 लोग नक्सलियों की गोली का शिकार हो गए थे. बजट पर सामान्य चर्चा का जवाब देते हुए सीएम भूपेश बघेल दोनों प्रमुख विपक्षी दलों भाजपा और जकांछ पर भी जमकर बरसे.

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सीएम भूपेश बघेल ने बीजेपी विधायकों की ओर इशारा करते हुए कहा कि आप लोग उनके इशारों पर 15 साल चलते रहे, हालत क्या हुई 15 सीट में सिमट गए. सीएम भूपेश बघेल ने बीजेपी विधायकों से पूछा कि कभी आप लोगों ने हमारे खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की तो बदला कैसा, यह बदलापुर नहीं साहब यह वक़्त बदलाव का है.

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बता दें कि, 25 मई 2013 को दोपहर के वक्त. विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस का पूरा ध्यान बस्तर में था. इसके लिए प्रदेश में परिवर्तन यात्रा की शुरूआत सुकमा से हो रही थी. अर्से बाद ऎसा समय आया था, जब कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता एक साथ नजर आ रहे थे, यहां तक कि धुर विरोधी माने जाने वाले विद्याचरण शुक्ल और अजीत जोगी भी इस यात्रा में शामिल थे. कांगेस नेताओं का काफिला जैसे ही बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र के अंतर्गत झीरम घाटी में पहुंचा. नक्‍सलियों ने हमला कर दिया.

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मौके पर करीब 13 वाहनों में माओवादियों ने जमकर गोलियां बरसाई. कुछ गोलियां वाहनों के आर-पार हो गई पूरी रायफल खाली कर दी गई फायरिंग के बाद महेन्द्र कर्मा बाहर निकले और आत्मसमर्पण कर दिया. कर्मा को माओवादियों ने हाथ बांधकर 200-300 मीटर दूर ले गए और गोलियों से भून दिया. उनके साथ एक पीएसओ भी मारा गया. माओवादियों ने महेन्द्र कर्मा का नाम लेकर पूछा और पुलिस वालों की भी जानकारी ली.

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इसके बाद पीएसओ को वापस जाने कह दिया. महेन्द्र कर्मा के साथ राजनांदगांव के पूर्व विधायक उदय मुदलियार भी मौजूद थे, जिन्हें फायरिंग के दौरान गोली लगी और घटनास्थल पर ही मौत हो गई. इस घटना में करीब 150 से अधिक महिला माओवादी शामिल थीं. वे ही ज्यादा उत्पात मचा रही थी. मिशन की सफलता के बाद महिला माओवादी नाचती रहीं. इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार को नक्सलियों ने अपना निशाना बनाया था.

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इस घटना के तीन दिन बाद राज्य की तत्कालीन बीजेपी सरकार ने एक न्यायिक आयोग का गठन किया था. लेकिन पांच साल बाद भी रिपोर्ट नहीं आने पर कांग्रेस सरकार ने इसे राजनैतिक षड्यंत्र करार देते हुए पूरी घटना की SIT से जांच कराने का फैसला किया था.

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