कर्नाटक सियासी संकट : मंत्रियों के इस्तीफे दिलवाकर सरकार बचाने की कोशिश, जानिए बहुमत का गणित| Updates

News State Bureau  |   Updated On : July 09, 2019 09:04:26 AM
एचडी कुमार स्वामी (फाइल फोटो)

एचडी कुमार स्वामी (फाइल फोटो) (Photo Credit : )

ख़ास बातें

  •  कर्नाटक में जारी है सियासी घमासान
  •  कभी गिर सकती है कांग्रेस-जेडीएस सरकार 
  •  कर्नाटक सियासी संकट से BJP का कोई मतलब नहीं

नई दिल्ली:  

कर्नाटक में संकट में घिरी जनता दल (एस) और कांग्रेस की गठबंधन सरकार की हालत सोमवार को तब और ज्यादा खराब हो गई, जब निर्दलीय विधायक और लघु उद्योग मंत्री एच. नागेश और केपीजेपी के एकमात्र विधायक और सरकार में मंत्री आर. शंकर ने मंत्री पद से इस्तीफा देकर 13 महीने पुरानी गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया. उधर सरकार बचाने के लिए जद (एस) और कांग्रेस ने बागियों को मंत्री पद की पेशकश की है जिसे कथित तौर पर उन्होंने ठुकरा दिया है. अब सभी नजरें विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश पर टिकी हैं. वह मंगलवार को कांग्रेस के 10 और जद (एस) के तीन विधायकों के इस्तीफे पर फैसला लेंगे. 

सिद्धारमैया ने सुबह 9:30 बजे बुलाई विधायकों की बैठक
इस बीच कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे विधायकों की बैठक बुलाई है. बैठक में बागी विधायकों को भी शामिल होने के लिए कहा गया है. इसके लिए व्हिप जारी किया गया है. उधर जद (एस) ने भी सोमवार को अपने विधायकों की बैठक बुलाई है.सूत्रों का कहना है कि बैठक बाद कांग्रेस विधायकों को किसी रिसार्ट में भेजा जा सकता है, जिससे बीजेपी इन विधायकों को अपने पाले में करने के लिए लुभा न सके. सूत्रों ने कहा कि मुंबई के एक होटल में ठहरे कांग्रेस विधायकों ने मंत्री पद की पेशकश ठुकरा दी है. उनका कहना है कि अब काफी देर हो चुकी है और वे भाजपा में शामिल होंगे. सूत्रों ने कहा कि वे मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष से मिलने बेंगलुरू लौट सकते हैं और मीडिया से बात कर सकते हैं. 

सीएम एचडी कुमार स्वामी ने खेला ये दांव
राज्य में राजनीतिक संकट के मद्देनजर अमेरिका दौरा बीच में छोड़कर स्वदेश लौटे जद (एस) और कांग्रेस गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सभी मंत्रियों के इस्तीफे करवाकर सरकार बचाने का आखिरी दांव चला है. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार को कोई खतरा नहीं है और संकट का हल निकाल लिया जाएगा. नागेश ने शहर के मध्य स्थित राजभवन में राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा. उन्होंने पत्र में यह भी कहा है कि वह 13 महीने पुरानी सरकार से अपना समर्थन वापस ले रहे हैं. नागेश ने पत्र में लिखा, "इस पत्र के माध्यम से आपको यह भी सूचित करना चाहूंगा कि मैं कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार से अपना समर्थन वापस ले रहा हूं."

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कांग्रेस के मंत्रियों ने दिया इस्तीफा
नागेश कोलार जिले की मुलबगल (अनुसूचित जाति) विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक के तौर पर निर्वाचित हुए थे. नागेश को बमुश्किल एक महीने पहले ही 34 सदस्यीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. उनके साथ क्षेत्रीय पार्टी केपीजेपी (कर्नाटक प्रज्ञावंतारा जनता पक्ष) के आर. शंकर को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था, ताकि दिसंबर से ही बगावत पर उतारू कांग्रेस के लगभग दर्जन भर विधायकों की धमकी से उत्पन्न खतरे से गठबंधन सरकार को बचाया जा सके. कांग्रेस के मंत्रियों ने अपना इस्तीफा कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया को सौंप दिया, ताकि दर्जन भर बागी विधायकों के इस्तीफा वापस लेने और उन्हें मंत्री बनाए जाने का रास्ता साफ हो सके, और गठबंधन सरकार को 12 जुलाई से शुरू हो रहे 10 दिवसीय मॉनसून सत्र से पहले गिरने से बचाया जा सके.

ये है बहुमत का गणित
सीएम कुमारस्वामी के लिए सरकार बचाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है 10 कांग्रेस विधायकों को मनाना, क्योंकि अगर वो कांग्रेस विधायको को मनाने में कामयाब हो जाते हैं तो विधायकों की संख्याबल का पलड़ा फिर गठबंधन सरकार के पक्ष में झुक जाएगा. जदएस के तीन विधायक अगर नहीं भी मानते हैं तो 224 सदस्यों वाले सदन में बहुमत का जादुई आंकड़ा 111 रहेगा, जिसे कुमारस्वामी बागियों की बदौलत हासिल कर सकते हैं. फिलहाल बीजेपी बढ़त की स्थिति में है. निर्दलीय विधायक एच. नागेश के मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद बीजेपी के समर्थन में 106 विधायक हैं. अगर 13 विधायकों को कांग्रेस और जदएस मनाने में नाकाम रहते हैं तो सभी का इस्तीफा मंजूर होने के बाद सदन में बहुमत के लिए 106 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी जो बीजेपी के पास है.

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निर्दल विधायक शंकर ने दूसरी बार समर्थन वापस लिया
यह दूसरा मौका है, जब नागेश और रन्नेबेन्नूर सीट से विधायक शंकर ने गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस लिया है. इससे पहले उन्होंने 22 दिसंबर को मंत्री पद से हटाए जाने के बाद 15 जनवरी को सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. कांग्रेस ने कर्नाटक में सरकार के संकट के लिए भाजपा पर आरोप लगाया है. कांग्रेस विधायक डी.के. सुरेश ने संवाददाताओं से कहा, "राज्य में इस राजनीतिक संकट के पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय नेताओं का हाथ है. वे किसी भी राज्य में कोई सरकार या किसी विपक्षी दल की सरकार नहीं चाहते हैं. वे लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं."

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बीजेपी ने आरोप पर किया पलटवार
बीजेपी के नेताओं ने इस आरोप पर पलटवार किया है. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा, "कर्नाटक में राजनीतिक संकट से भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है." उल्लेखनीय है कि इस्तीफे से पहले 225 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन के पास 118 विधायकों का समर्थन था, यह बहुमत के आंकड़े 113 से पांच ज्यादा है. इनमें विधानसभा अध्यक्ष को छोड़कर 78 कांग्रेस के, जद (एस) के 37 और बसपा एवं कर्नाटक प्रज्ञंयवंता जनता पार्टी (केपीजेपी) के एक-एक और एक निर्दलीय विधायक शामिल थे. गठबंधन सरकार में 34 सदस्यीय मंत्रिमंडल में कांग्रेस से 22, जद (एस) से 10, केपीजेपी के एक और एक निर्दलीय विधायक शामिल थे. राज्य विधासभा का 10 दिवसीय मॉनसून सत्र 12 जुलाई से शुरू होने वाला है. 

First Published: Jul 08, 2019 11:22:08 PM
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