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INX MEDIA CASE में चिदंबरम को लगा बड़ा झटका, 26 अगस्त तक रहेंगे CBI की कस्टडी में

न्यूज स्टेट ब्यूरो  |   Updated On : August 22, 2019 11:54:55 PM
पी चिदंबरम (फाइल फोटो)

पी चिदंबरम (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:  

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को जमानत मिलेगी या फिर उन्‍हें सीबीआई के रिमांड पर भेजा जाएगा, इस पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. INX मीडिया केस में सीबीआई ने पी चिदंबरम को बुधवार की देर रात गिरफ्तार किया था. इससे पहले दिल्‍ली हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. दोपहर बाद पी चिदबरम को राउज एवेन्‍यू कोर्ट की विशेष अदालत में पेश किया गया. पी चिदंबरम की ओर से दिग्‍गज वकील कपिल सिब्‍बल और अभिषेक मनु सिंघवी तो सीबीआई की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने बहस में भाग लिया. इस दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने सीबीआई पर आरोप लगाया कि वह चिदंबरम की गिरफ्तारी के लिए बहुत लालयित थी. 

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कपिल सिब्‍बल ने कहा कि गिरफ्तार करने के बाद पी चिदंबरम से केवल एक बार पूछताछ की गई. कल रात भी सीबीआई रात 12 बजे तक पूछताछ शुरू नहीं कर पाई. रात में केवल 12 सवाल पूछे गए. उन्‍होंने यह भी कहा कि CBI को पता नहीं आगे क्या पूछना है. CBI जानबूझकर टाइम बर्बाद कर रही है.

कपिल सिब्‍बल ने कहा, पी चिदंबरम को मामले में पहले ज़मानत मिल चुकी है. CA भास्करन को भी ज़मानत मिल चुकी है. CBI ने पहले किसी की ज़मानत को चैलेंज नहीं किया. अब जांच लगभग पूरी हो चुकी है तो सीबीआई पी चिदंबरम को गिरफ्तार करके लाई है.

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अभिषेक मनु सिंघवी ने आगे कहा, अब इनके पास कस्टडी मांगने का आधार महज इतना है कि इंद्राणी को सरकारी गवाह बना दिया गया है. हकीकत ये है कि इंद्राणी को अब सरकारी गवाह बनाया गया है वो भी 2018 के बयान के आधार पर. अब सिंघवी सुप्रीम कोर्ट का कोई पुराना फैसला पढ़ रहे हैं. सिंघवी साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि फैसला कहता है कि महज किसी बात को कबूलवाने के लिए आप कस्टडी की मांग नहीं कर सकते हैं. जबकि सीबीआई की दलील क्या है.

अभिषेक मनु सिंघवी ने आगे कहा, कस्टडी इसलिए चाहिए क्योंकि पी चिंदबरम मनमुताबिक जवाब नहीं दे रहे हैं. ये भला कस्टडी मांगने का आधार कैसे हो गया है. उन्होंने आगे कहा, सिर्फ इसलिए कि मैं इनके मुताबिक जवाब नहीं दे रहा तो इसका क्या ये मतलब हो गया कि मैं सवालों से बच रहा है, जांच में सहयोग नहीं दे रहा. सीबीआई अभी तक ये साबित नहीं कर पाई है कि मैं कानून से भागने वाला इंसान हूं या फिर सबूतों से छेड़छाड़ कर रहा हूं.

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इससे पहले सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलीलें पेश करते हुए कहा, रिमांड की जरूरत इसलिए है, ताकि इस मामले में बाकी आरोपी और अहम दस्तावेजों से मिलान कराया जा सके. डीएचसी से पहले मिली राहत का दुरुपयोग किया गया. उन्होंने DHC के हालिया फैसले का हवाला दिया है. सॉलिसीटर जनरल ने आगे कहा कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि अपराध की गम्भीरता इतनी ज्यादा है कि गिरफ्तारी पर रोक को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. जांच सही दिशा में तभी बढ़ पाएगी, जब चिंदबरम कस्टडी में होंगे. ये मनी लॉन्ड्रिंग का अपने आप में क्लासिक केस नहीं है. मनी ट्रेल का पता करना जरूरी है.

तुषार मेहता अब कस्टडी में पूछताछ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के किसी पुराने फैसले केस हवाला दे रहे हैं. डीएचसी के हालिया फैसले का हवाला दे रहे हैं. तुषार मेहता ने चिंदबरम को कुर्सी पर बैठने को ऑफर किया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया है. वे कोर्ट रूम में खड़े ही हैं. तुषार मेहता ने केस डायरी को कोर्ट के सामने रखा है.

First Published: Aug 22, 2019 05:00:55 PM
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