पी. चिदंबरम की मुश्किलें और बढ़नी तय, 300 करोड़ के और घोटाले के अहम सुराग मिले

न्यूज स्टेट ब्यूरो.  |   Updated On : August 22, 2019 06:33:23 AM
सांकेतिक चित्र.

सांकेतिक चित्र. (Photo Credit : )

ख़ास बातें

  •  चिदंबरम के खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का दायरा बढ़ा दिया है.
  •  एक शेल कंपनी में गैरकानूनी ढंग से 300 करोड़ से अधिक राशि डाली गई.
  •  अवैध एफआईपीबी मंजूरी के चार मामलों में पूर्व वित्त मंत्री की भूमिका.

नई दिल्ली.:  

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ने वाली हैं. चिदंबरम के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का दायरा बढ़ा दिया है. ईडी को कुछ ऐसे भी सबूत मिले हैं, जिनके मुताबिक अवैध 'विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड' (एफआईपीबी) एवं 'प्रत्यक्ष विदेशी निवेश'(एफडीआई) मंजूरी प्रदान करने के एवज में चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम द्वारा कथित तौर पर रिश्वत लेने के बाद एक शेल कंपनी में गैरकानूनी ढंग से 300 करोड़ रुपये से अधिक राशि कथित तौर पर डाली गई थी.

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2017 में रद्द हुआ एफआईपीबी
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाले 'एफआईपीबी' को 2017 में रद्द कर दिया गया है. सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत से अनुरोध किया है कि पिता-पुत्र से हिरासत में पूछताछ करने की इजाजत दी जाए. इसके लिए इन पेचीदे लेन-देन और रिश्वत का हवाला दिया गया, जिनके सीमा पार (अन्य देशों में) भी निहितार्थ हैं. उन्होंने बताया कि जांच एजेंसी अवैध एफआईपीबी मंजूरी के कम से कम चार मामलों में पूर्व वित्त मंत्री की भूमिका की छानबीन कर रही है. ये मामले डियाजियो स्कॉटलैंड लिमिटेड, कटारा होल्डिंग्स, एस्सार स्टील लिमिटेड और एलफोर्ज लिमिडेट से संबद्ध हैं.

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पीएमएलए के तहत पहले से जांच
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम दो अन्य सौदों (एयरसेल-मैक्सिस और आईएनएक्स मीडिया) में कथित तौर पर अवैध तरीके से एफआईपीबी मंजूरी देने को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एजेंसी की जांच के दायरे में पहले से हैं. दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामले में चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी. सीबीआई के अलावा ईडी आईएनएक्स मीडिया सौदा मामले में चिदंबरम से पूछताछ की अदालत से इजाजत मांग रही है. इस सिलसिले में उसने 2017 में धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत एक मामला दर्ज किया गया था.

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कई मुखौटा कंपनियों का 'मालिक'
सूत्रों ने बताया कि ईडी ने जांच में पाया है कि चिदंबरम और कार्ति भारत और विदेश में खड़ी की गई मुखौटा कंपनियों के लाभार्थी मालिक हैं. ईडी ने पाया है कि फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल चिदंबरम के केंद्रीय वित्त मंत्री रहने के दौरान उनके द्वारा दी गई अवैध एफआईपीबी मंजूरियों से रिश्वत लेने में किया गया. यह कार्य कार्ति और इस तरह की एक कंपनी की मिलभगत से किया जाता था. इसके जरिये 300 करोड़ से अधिक की रकम हासिल की गई.

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'विदेश में जमा हुए रिश्वत के पैसे'
एजेंसी की जांच में पाया गया है कि पिता-पुत्र द्वारा ली गई रिश्वत की राशि का इस्तेमाल उनके व्यक्तिगत खर्चों में, विदेशों में दो दर्जन से अधिक खाते खोलने एवं उनमें पैसे जमा करने तथा मलेशिया, ब्रिटेन, स्पेन सहित अन्य देशों में अचल संपत्ति खरीदने में किया गया. यह भी पता चला है कि कार्ति से जुड़ी एक मुखौटा कंपनी को एक ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड (बीवीआई) स्थित कंपनी से भारी रकम का भुगतान किया गया. इस बीवीआई का जिक्र पनामा पेपर में भी हुआ था.

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शेयर होल्डिंग के लिए वसीयत भी तैयार कराई
सूत्रों ने बताया कि ईडी के पास उपलब्ध सबूतों से यह जाहिर होता है कि एक बड़ी मुखौटा कंपनी के शेयरधारकों और निदेशकों ने कंपनी की समूची शेयर होल्डिंग चिदंबरम की पोती एवं कार्ति की बेटी को हस्तांतरित करने के लिए एक वसीयत भी तैयार की थी. ईडी ने आईएनएक्स मीडिया मामले में पिछले साल कार्ति की भारत, ब्रिटेन और स्पेन में 54 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी.

First Published: Aug 22, 2019 06:33:23 AM
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