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AyodhyaVerdict: राम लला को 500 साल के वनवास से मुक्‍त कराने वाले 92 वर्ष के इस शख्‍स की पूरी हुई अंतिम इच्‍छा

न्‍यूज स्‍टेट ब्‍यूरो  |   Updated On : November 09, 2019 05:28:15 PM
के. पराशरण

के. पराशरण (Photo Credit : file )

नई दिल्‍ली:  

92 वर्षीय के. पराशरण ( K Parasharan)को तो आप भूले नहीं होंगे. ये वही हैं जिन्‍हें वकालत की दुनिया का पितामह कहा जाता है. रामलला विराजमान (Ramlala Virajman) की तरफ से पैरवी करने वाले के पराशरण ( K Parasharan) की अंतिम इच्छा पूरी हो गई. वे अपनी मृत्यु से पहले यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि रामलला अपनी जमीन पर​ कानूनी तौर से विराजमान हो जाएं.सुप्रीम कोर्ट के अयोध्‍या पर आए फैसले (Ayodhya Verdict) से उनकी यह मुराद पूरी हो गई है.

भारत के सर्वोच्‍च अदालत में उन्होंने ऐसी-ऐसी दलीलें रखी कि मुस्लिम पक्ष उसकी काट नहीं तलाश पाए.उनकी दलीलों के इर्द-गिर्द ही पूरी सुनवाई घूमती रही.उन्होंने पूरे राम जन्मभूमि को न्यायिक व्यक्ति अथवा ज्यूरिस्टिक पर्सन साबित करने की दलीलों को भले ही कोर्ट ने स्वीकार नहीं की, लेकिन पूरी सुनवाई इसी के आसपास घूमती रही.पराशरण ने घंटों खड़े होकर बहस की.अदालत में जजों ने उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें बैठ कर बहस करने की सहूलियत दी, लेकिन पराशरण ने कहा कि इंडियन बार की जो परंपरा है, वह उसी हिसाब से चलेंगे. आइए जानें कौन हैं के पराशरण ( K Parasharan) ..

  1. तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल रहे पराशरण इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के शासन काल में ही भारत के अटॉर्नी जनरल रह चुके हैं.
  2. पराशरण ने सबरीमाला मंदिर केस में भी पैरवी की थी.साल 2012 से 2018 तक राज्यसभा सांसद रह चुके पराशरण ( K Parasharan) 70 के दशक से ही अधिकतर सरकारों के पसंदीदा अधिवक्ता रहे हैं.
  3. पराशरण के पिता वेदों के ज्ञाता हैं, ऐसे में कहा जा सकता है कि ये संस्कार उन्हें अपने पिता से विरासत में मिले हैं,
  4. पराशरण देश के सबसे महंगे वकीलों में से एक हैं. पराशरण प्रति हियरिंग के लिए 8 से 12 लाख रुपए लेते हैं.
  5. पराशरण के बेटे मोहन भी सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं. पराशरण का जन्म साल 1927 में तमिलनाडु के श्रीरंगम में हुआ था
  6. पराशरण ने साल 1958 में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी. उन्हें हिंदुत्व का विद्वान माना जाता है.
  7. वो साल 1976 में तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल रहे, उस समय वहां राष्ट्रपति शासन लगा था.
  8. जब साल 2003 में NDA सरकार थी, तब उनको पद्म भूषण पुरस्कार से नवाजा गया. साल 2011 में यूपीए सरकार ने पराशरण को पद्म विभूषण से सम्मानित किया.
  9. इमरजेंसी के दौरान वह तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल थे और 1980 में भारत के सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए गए थे.
  10. 2012 में उन्हें राज्यसभा की ओर से प्रेसिडेंशियल नॉमिनेशन भी दिया गया.
  11. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर चली 40 दिन की सुनवाई के दौरान रामलला विराजमान की तरफ से पैरवी कर रहे थे के पराशरण ( K Parasharan) .
  12. बहस के दौरान कई ऐसे मौके आए जब उन्होंने अपनी दलीलों से मुस्लिम पक्षकारों को पस्त कर दिया.
  13. सुप्रीम कोर्ट में जब एक बार बहस के दौरान बाबरी पक्ष के वकील राजीव धवन ने हर रोज मामले की सुनवाई से आपत्ति जताई थी. तब पराशरण ने उनसे कहा था मरने से पहले मैं इस केस को पूरा करना चाहता हूं.यही मेरी अंतिम इच्छा है.
  14. हिंदू पक्ष की ओर से पूर्व अटार्नी जनरल के. पराशरण ने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में बहस करते हुए पौराणिक तथ्यों के आधार पर मंदिर होने की दलीलें पेश की थी.

आयोध्या मामले सुनवाई के दौरान इन दलीलों से चर्चा में बने रहे पराशरण..

  • जब जस्टिस अशोक भूषण ने उनसे पूछा कि जन्म स्थान को एक व्यक्ति के रूप में कैसे जगह दी जा सकती है और मूर्तियों के अलावा बाकी चीजों के कानूनी अधिकार कैसे तय होंगे. इस पर पराशरण ने ऋग्वेद का उदाहरण दिया, जहां सूर्य को भगवान माना जाता है, लेकिन उनकी कोई मूर्ति नहीं है. मगर देवता होने के नाते उन पर कानून लागू होते हैं.
  • एक सवाल के जवाब में पराशरण ने दलील दी थी कि अयोध्या में 55-60 मस्जिदें हैं और मुस्लिम किसी दूसरी मस्जिद में नमाज पढ़ सकते हैं, लेकिन हिन्दुओं के लिए यह भगवान राम का जन्मस्थान है. हम उनके जन्म स्थान को नहीं बदल सकते हैं.
  • 35वें दिन की सुनवाई के दौरान के. पराशरण ने कहा था- अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में 35वें दिन की सुनवाई में हिंदू पक्षकार के वकील के परासरण ने कहा कि अलौकिक शक्ति वाली जगह न्यायिक व्यक्ति हो सकती है
  • उन्होंने कहा कि राम जन्मस्थान न्यायिक व्यक्तित्व है, देवता का स्वरूप चाहे जैसा हो उसे कानूनी रूप से एक व्यक्ति माना जा सकता है· परासरण ने कहा कि जहां पूजा और आस्था होती है उसे मंदिर कहा जा सकता है
First Published: Nov 09, 2019 05:28:15 PM
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