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अयोध्या राम मंदिर मामले की सुनवाई में अब तक हिंदू पक्ष ने रखे हैं ये तर्क

न्यूज स्टेट ब्यूरो  |   Updated On : September 02, 2019 12:01:42 PM
सांकेतिक चित्र

सांकेतिक चित्र (Photo Credit : )

ख़ास बातें

  •  सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन हैं वकील.
  •  राजीव धवन 20 दिन में रखेंगे मुस्लिम पक्ष की ओर से सभी दलीलें.
  •  इसके पहले हिंदू पक्ष ने 16 दिनों तक रखी थीं अपनी दलीलें.

नई दिल्ली:  

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर अयोध्या विवाद पर सोमवार से मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलें रखनी शुरू कर दी हैं. राजीव धवन ने मुस्लिम पक्ष की ओर से दलीलें रखनी शुरू की हैं. उनके साथ कपिल सिब्बल भी हैं. मामले की सुनवाई लगभग आधी पूरी हो चुकी है. इससे पहले कोर्ट ने 16 दिन तक हिंदू पक्ष की दलीलें सुनी थीं. हिंदू पक्ष की तरफ से रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा ने अपना पक्ष रखा था. आइए जानते हैं कि हिंदू पक्ष ने अब तक अपनी दलीलों में क्या कहा और सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर क्या टिप्पणी की.

पहला दिनः 6 अगस्त
निर्मोही अखाड़े की दलील. सबसे पहले निर्मोही अखाड़े ने दलीलें पेश करना शुरू किया. दावा किया कि 1934 से किसी भी मुस्लिम को विवादित ढांचे में प्रवेश नहीं मिला है.

दूसरा दिनः 7 अगस्त
आस्था ही प्रमाण. रामलला विराजमान ने कहा, भक्तों की अटूट आस्था प्रमाण है कि विवादित स्थल ही राम का जन्मस्थान है.

तीसरा दिनः 8 अगस्त
जन्मस्थान वादी हो सकता है? कोर्ट ने रामलला विराजमान के वकील से पूछा कि देवता के जन्मस्थान को मामले में कानूनी व्यक्ति के तौर पर माना जा सकता है? वकील ने कहा, जन्मस्थली कानूनी व्यक्ति की तरह है, वह वादी हो सकता है.

चौथा दिनः 9 अगस्त
रोज सुनवाई में मदद मुश्किल. मुस्लिम पक्षकार के वकील ने कहा, यह संभव नहीं है कि हफ्ते में रोज कोर्ट का सहयोग करें.

पांचवां दिनः 13 अगस्त
हिंदू पक्ष की दलीलें जारी. कोर्ट ने पूछा, जमीन पर आपका हक मुस्लिम पक्षकार के साथ साझा है, तब एकाधिकार कैसे? रामलला विराजमान ने कहा, जमीन कुछ समय के लिए बोर्ड के पास जाने से वह मालिक नहीं हो जाता.

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छठा दिनः 14 अगस्त
वेद-पुराण का हवाला दिया. रामलला विराजमान की तरफ से ऐतिहासिक किताबों, विदेशी यात्रियों के यात्रा वृतांतों और वेद एवं स्कंद पुराण की दलीलें कोर्ट में पेश की गईं.

सातवां दिनः 16 अगस्त
एएसआई रिपोर्ट का दिया हवाला. रामलला विराजमान के वकील ने एएसआई की रिपोर्ट के हवाले से दावा किया कि जिस जगह मस्जिद बनाई गई थी उसके नीचे मंदिर का बहुत बड़ा ढांचा था. कोर्ट ने सवाल किया था कि मस्जिद के नीचे जो ढांचा था वह धार्मिक स्ट्रक्चर ही था, इसे साबित करें.

आठवां दिनः 20 अगस्त
हाई कोर्ट के फैसले का जिक्र. रामलला विराजमान के वकील ने इलाहाबाद सीएस वैद्यनाथ मामले में हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, जज ने खुद लिखा है कि भगवान राम का मंदिर ढहाकर मस्जिद बनाई गई.

नौवां दिनः 21 अगस्त
मंदिर अपने आप में भगवान. रामलला के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, कोई भी महज मस्जिद जैसा ढांचा खड़ा कर इस पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता. विवादित भूमि पर मुस्लिम पक्ष व निर्मोही अखाड़ा का दावा खारिज.

दसवां दिनः 22 अगस्त
पुजारी के वकील की दलीलें. पुजारी गोपाल दास के वकील रंजीत कुमार ने कहा, वह मूल पक्षकार हैं. उन्हें जन्मस्थान पर पूजा करने का अधिकार है और ये उनसे नहीं छीना जा सकता.

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ग्यारहवां दिनः 23 अगस्त
पूजा-प्रबंधन का अधिकार मांग रहे. निर्मोही अखाड़े के वकील जैन को हिदायत दी गई, वह केस की मेरिट पर बात करें. जैन ने कहा, वह सिर्फ पूजा-प्रबंधन व कब्जे का अधिकार मांग रहे हैं.

बारहवां दिनः 26 अगस्त
निर्मोही अखाड़े ने दी ये दलीलें. निर्मोही अखाड़े के वकील ने कहा कि जन्मस्थान का पजेशन न तो देवता के 'नेक्स्ट फ्रेंड' को दिया जा सकता है न ही पुजारी को.

तेरहवां दिनः 27 अगस्त
शास्त्रों का जिक्र. राम जन्म भूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से वकील पी एन मिश्रा ने 'स्कंद पुराण' और 'अयोध्या महात्म्य' जैसे शास्त्रों के आधार पर दलीलें शुरू कीं.

चौदहवां दिनः 28 अगस्त
'औरंगजेब ने तोड़ा मंदिर'. हिंदू पक्षकार के वकील बोले, बाबरनामा में जिक्र नहीं है कि मीर बाकी ने मस्जिद बनावाई थी. दरअसल, औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई.

पंद्रहवां दिनः 29 अगस्त
बाबर की भूमिका को लेकर बहस. कोर्ट ने रामजन्म भूमि समिति की मांग को समस्या वाला बताया. मांग थी, इसकी छानबीन हो, क्या बाबर ने विवादित ढांचे को 'अल्लाह' को समर्पित किया था.

First Published: Sep 02, 2019 12:01:42 PM
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