कर्नाटक संकट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 4 बड़े मायने, पढ़ें पूरी खबर

News State Bureau  |   Updated On : July 17, 2019 01:04:51 PM
सुप्रीम कोर्ट (SC)-फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट (SC)-फाइल फोटो (Photo Credit : )

नई दिल्ली:  

कर्नाटक प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुना दिया. फैसले में स्‍पीकर की गरिमा का भी ख्‍याल रखा गया है और विधायकों के विशेषाधिकार का भी. अब सबकी नजरें गुरुवार को होने वाले कर्नाटक विधानसभा के फ्लोर टेस्‍ट पर टिक गई हैं. बागी विधायक अगर नहीं मानते हैं तो सरकार गिरना तय माना जा रहा है, जैसा कि बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्‍पा भी दावा कर रहे हैं.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्‍पीकर को पूरी छूट दी गई है कि वे विधायकों के इस्‍तीफे पर अपने हिसाब से फैसला लें. साथ ही यह भी कहा गया है कि विधायकों को फ्लोर टेस्‍ट में शामिल होने के लिए बाध्‍य नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने हालांकि यह भी कहा कि इस मसले पर विस्‍तार से सुनवाई करने की जरूरत है. विधानसभा अध्‍यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्‍वागत किया है और यह भी कहा है कि फैसला आने के बाद से मेरी जिम्‍मेदारी और बढ़ गई है. वहीं मुंबई के होटल में रुके विधायकों ने संकेत दिया है कि वे फ्लोर टेस्‍ट के समय कर्नाटक या बेंगलुरू में नहीं होंगे. जाहिर है सरकार इससे अल्‍पमत में आ जाएगी.

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आइए देखते हैं दलीय स्‍थिति

  • बीजेपी: 105
  • कांग्रेस: 79 – 13 विधायक बागी = 66
  • जेडीएस: 37 – 3  विधायक बागी = 34
  • बसपा: 1
  • निर्दलीय: 1

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इस तरह कांग्रेस-जेडीएस और बसपा के कुल 101 विधायक हैं. फ्लोर टेस्‍ट टाई होने पर एक वोट स्पीकर का हो जाएगा. अब चाहें स्‍पीकर विधायकों का इस्‍तीफा स्‍वीकार करें या फिर उन्‍हें अयोग्‍य करार दें, दोनों ही मामलों में सरकार पर संकट कायम रह सकता है.

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फैसले के बाद अब क्‍या होगा

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 16 बागी विधायकों को लेकर स्‍पीकर रमेश कुमार फैसला लेंगे. स्‍पीकर क्‍या फैसला लेंगे, इस बाबत कोर्ट ने उन्‍हें पूरी छूट दे दी है.
  • स्पीकर अगर विधायकों की सदस्‍यता रद्द करते हैं तो इस कार्यकाल के दौरान वे कोई चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. हालांकि, विधानसभा भंग होने के बाद बागी विधायक चुनाव में भाग ले सकते हैं. अगर उनका इस्तीफा स्वीकार होता है तो वह फ्लोर टेस्ट में वोट नहीं कर पाएंगे.
  • कांग्रेस ने व्हिप जारी कर विधायकों से कल सदन में मौजूद रहने को कहा है. हालांकि वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता मुकुल रोहतगी का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद विधायकों पर कांग्रेस का व्हिप लागू नहीं होगा.
  • कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं. इनमें जनता दल सेक्‍युलर और कांग्रेस गठबंधन के पास अब केवल 100 विधायक हैं. जबकि बीजेपी के पास कुल 105 विधायक हैं, इसके अलावा बीजेपी निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा भी कर रही है.

First Published: Jul 17, 2019 01:04:51 PM
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