तोड़फोड़ और दंगे की घटनाओं के लिए पुलिस अधीक्षक जैसे अफ़सरों की जवाबदेही हो तय: सुप्रीम कोर्ट

अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि इस तरह की तोड़फोड़ और दंगे की घटनाओं के मामले में क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक जैसे प्राधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की जानी चाहिए।

  |   Updated On : August 11, 2018 07:55 AM
प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ की घटना गंभीर (फाइल फोटो)

प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ की घटना गंभीर (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:  

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान निजी और सार्वजनिक संपत्तियों की तोड़फोड़ की घटनाओं को 'बहुत ही गंभीर' बताते हये शुक्रवार को कहा कि वह कानून में संशोधन के लिये सरकार का इंतजार नहीं करेगा।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में निर्देश जारी किये जायेंगे।

अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि इस तरह की तोड़फोड़ और दंगे की घटनाओं के मामले में क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक जैसे प्राधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश के किसी न किसी हिस्से में लगभग हर सप्ताह ही हिंसक विरोध प्रदर्शन और दंगे की घटनायें हो रही हैं। उन्होंने महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के लिये विरोध प्रदर्शन, अजा-अजजा मामले में शीर्ष अदालत के फैसले के बाद देश भर में हुयी हिंसा और अब हाल ही में कांवड़ियों की संलिप्तता वाली हिंसक घटनाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया।

अटार्नी जनरल ने कहा कि फिल्म 'पद्मावत' (Padmawat) जब प्रदर्शित होने वाली थी तो एक समूह ने खुलेआम प्रमुख अभिनेत्री की नाक काटने की धमकी दे डाली लेकिन कहीं कुछ नहीं हुआ। कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुयी।'

इस पर पीठ ने वेणुगोपाल से कहा, 'तो फिर इस बारे में आपका क्या सुझाव है।'

अटार्नी जनरल ने कहा कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में ही अनधिकृत निर्माण उस वक्त रूक गये थे जब यह फैसला लिया गया था कि इस तरह के निर्माण के लिये संबंधित क्षेत्र के दिल्ली विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की जवाबदेही होगी।

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वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से निबटने के लिये कानून में संशोधन करने पर विचार कर रही है और अदालतों को उसे उपयुक्त कानून में बदलाव की अनुमति देनी चाहिए।

इस पर, पीठ ने टिप्पणी की, 'हम संशोधन का इंतजार नहीं करेंगे। यह गंभीर स्थिति है और यह बंद होनी चाहिए।'

पीठ ने इसके बाद कोडुंगल्लूर फिल्म सोसायटी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुये कहा कि वह इस पर विस्तृत आदेश सुनायेगी। याचिका में शीर्ष अदालत के 2009 के फैसले में दिये गये निर्देशों को लागू कराने का अनुरोध किया गया है।

इस फैसले में न्यालय ने कहा था कि विभन्न मुद्दों पर आयोजित होने वाले विरोध प्रदर्शनों के दौरान निजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान होने की स्थिति में इसके लिये आयोजक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

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पीठ ने जवाबदेही निर्धारित करने के लिये ऐसे विरोध प्रदर्शनों की वीडियोग्राफी करने का भी आदेश दिया था।

First Published: Saturday, August 11, 2018 07:37 AM

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