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पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर घिरती दिख रही है मोदी सरकार, शिवसेना ने दिखाया 'अच्छे दिन' का पोस्टर

News State Bureau  |   Updated On : September 09, 2018 09:36 AM
मुंबई में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शिवसेना का विरोध प्रदर्शन (फोटो : ANI)

मुंबई में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शिवसेना का विरोध प्रदर्शन (फोटो : ANI)

नई दिल्ली:  

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियां देश भर में विरोध प्रदर्शन करने वाली है। रविवार को भी पेट्रोल के दाम में 12 पैसे और डीजल के दाम में 10 पैसों की बढ़ोतरी हुई। रविवार की बढ़ोतरी के बाद मुंबई में पेट्रोल की कीमत 87.89 रुपए प्रति लीटर और डीजल 77.09 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई। मुंबई में शिवसेना ने बढ़ी कीमतों के खिलाफ विरोध का अनोखा तरीका निकाला है। शिवसेना ने पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों की सूची लगाकर पोस्टर में 'यही है अच्छे दिन!' लिखा है।

बता दें कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर है और यह लगातार अपने रिकॉर्ड को तोड़कर एक नया रिकॉर्ड बना रही है। पिछले कुछ दिनों से लगातार कुछ पैसे की हो रही बढ़ोतरी के कारण यह आम लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।

कांग्रेस का 10 सितंबर को भारत बंद

पेट्रोल-डीजल की कीमतों के खिलाफ 10 सितंबर को मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भारत बंद का ऐलान किया है। जिसे बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) भी समर्थन कर रहा है। कांग्रेस की मांग है कि सरकार पेट्रोल-डीजल को जीएसटी (वस्तु और सेवा कर) के दायरे में लाए, जिससे इनकी बढ़ती कीमतों पर लगाम लग सके।

इसे लेकर कांग्रेस 9 सितंबर को देश भर में 92 प्रेस कांफ्रेंस करने वाली है। जिसमें वह सरकार भारत बंद के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे पहले कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तंज कसते हुए पूछा था कि क्या पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये को छू लेगी।

वाम दलों का राष्ट्रव्यापी बंद

वहीं वामपंथी दलों ने भी पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ 10 सितंबर को ही राष्ट्रव्यापी बंद की घोषणा की है। पांच वाम दलों ने एक संयुक्त बयान में यह घोषणा की, जिसमें मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्‍सवादी-लेनिनवादी)-लिबरेशन, आरएसपी और सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (एसयूसी) शामिल हैं।

वाम दलों की मांग में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कम करने के अलावा सरकार द्वारा किसानों से किए फसलों की बेहतर कीमत और कर्ज माफी भी शामिल है।

और पढ़ें : BJP की राह पर चली कांग्रेस ने इस मामले में पीछे खींचे कदम, उम्मीदवारों के टिकट को लेकर जारी किये थे निर्देश

वहीं पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के खिलाफ केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बचती आ रही है। शनिवार को पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि डॉलर के खिलाफ रुपये के कमजोर होने और आपूर्ति पक्ष की बाधाओं के कारण पेट्रोल-डीजल महंगे हो रहे हैं।

पिछले साल जून से रोजाना स्तर पर दर निर्धारित

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग-अलग राज्यों के वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) दरों के कारण अलग-अलग हैं। दिल्ली और मुंबई में तेल की कीमतें सभी मेट्रो शहर की तुलना में सबसे अधिक है।

और पढ़ें : राफेल में खास बदलावों पर मोदी सरकार ने झूठ बोला: कांग्रेस

सरकारी तेल कंपनियां पिछले साल जून से रोजाना तेल के दामों को निर्धारित कर रही हैं। दक्षिण एशियाई देशों के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमत सबसे ज्यादा है क्योंकि पंप की दर, टैक्स (एक्साइज ड्यूटी) के कारण ज्यादा होती है।

First Published: Sunday, September 09, 2018 09:01 AM

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