महाराष्ट्र : मराठों के बाद मुस्लिम समुदाय का प्रदर्शन, शिक्षा और रोजगार में 5 फीसदी आरक्षण की मांग

रविवार को पुणे में मुस्लिम मूक मोर्चा ने अपने समुदाय के लिए अन्य मांगों के साथ रोजगार और शिक्षा में 5 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

  |   Updated On : September 09, 2018 02:48 PM
मुस्लिम मूक मोर्चा का प्रदर्शन (फोटो : ANI)

मुस्लिम मूक मोर्चा का प्रदर्शन (फोटो : ANI)

पुणे:  

महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के बाद अब मुस्लिम समुदाय रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। रविवार को पुणे में मुस्लिम मूक मोर्चा ने अपने समुदाय के लिए अन्य मांगों के साथ रोजगार और शिक्षा में 5 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। मुस्लिम समुदाय ने हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरकर हाथ में प्लेकार्ड लेकर प्रदर्शन किया जिसमें 'मुस्लिम आरक्षण लागू करो और आरक्षण हमारा मूलभूत अधिकार है' लिखा हुआ था।

मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने कुछ दिन पहले ही 60 संगठनों ने बैठक के बाद अपनी मांग को जोर-शोर से उठाने के लिए एक एक्शन कमेटी का गठन किया था।

आरक्षण के अलावा गो रक्षा के नाम पर मुस्लिमों की हो रही हत्याओं के आरोपियों को सजा दिलाने के लिए मुस्लिम संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हमें 5 फीसदी आरक्षण दिया गया लेकिन किसी क्षेत्र में यह लागू नहीं है। हमें रोजगार और शिक्षा में आरक्षण की जरूरत है। हम वक्फ बोर्ड के द्वारा अवैध तरीके से ली गई जमीनों को वापस करने की भी मांग कर रहे हैं।'

बता दें कि इससे पहले पूर्ववत पृथ्वीराज चव्हान के नेतृत्व वाली सरकार मुस्लिमों को रोजगार और शिक्षा में 5 फीसदी और मराठों को 16 फीसदी रोजगार के लिए अध्यादेश लायी थी लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने इसे खारिज खत्म कर दिया था। कोर्ट ने मुस्लिमों को शिक्षा में 5 फीसदी आरक्षण देने का आदेश दिया था।

पिछले महीने मराठा समुदाये के प्रदर्शन के बाद महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि मराठा और ढांगर समाज के साथ मुस्लिमों को भी आरक्षण मिलना चाहिए।

अमीन पटेल ने कहा था, 'मराठा और ढांगर समाज के साथ हम मुस्लिमों के लिए भी आरक्षण चाहते हैं। मुस्लिम सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। और स्पेशल बैकवर्ड कैटगरी-ए के अंदर आते हैं।'

बता दें कि महाराष्ट्र में मराठा समुदाय ने आरक्षण की मांग को लेकर 24 और 25 जुलाई को और दोबारा 9 अगस्त को विरोध प्रदर्शन किया था। मराठा आरक्षण के मुद्दे पर महाराष्ट्र के तीन विधायकों ने इस्तीफा दिया था। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर राज्य में अब तक 7 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी।

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महाराष्ट्र में राजनीतिक रूप से प्रभुत्व मराठा समुदाय की राज्य में 30 फीसदी आबादी है जो सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 16 फीसदी आरक्षण देने की मांग लंबे समय से कर रही है।

First Published: Sunday, September 09, 2018 12:55 PM

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