35A की वैधता पर SC में सुनवाई टली, आर्टिकल के समर्थन में जम्मू-कश्मीर बंद

धारा को निरस्त करने की मांग करने वालों का कहना है कि धारा 368 के तहत संविधान संशोधन के लिए नियत प्रक्रिया का पालन करते हुए इसे संविधान में नहीं जोड़ा गया था।

  |   Updated On : August 06, 2018 11:59 AM

नई दिल्ली:  

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्ज़ा देने वाले संविधान के आर्टिकल 35-ए की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर आज (सोमवार को) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने सुनवाई शुरू होने के बाद इसे कुछ ही देर में आगे के लिए टाल दिया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने सुनवाई को यह कहते हुए टाल दिया कि तीन जजों की बेंच पहले यह तय करेगी कि यह मामला पांच जजों की बेंच को ट्रांसफर किया जाए या नहीं। इस बीच केंद्र सरकार और राज्य की ओर से यह मांग की गई थी इस सुनवाई को आगे के लिए टाल दिया जाए. इसके पीछे दोनों का तर्क था कि राज्य में अभी पंचायत चुनाव हैं. 

बता दें कि इस धारा को निरस्त करने की मांग करने वालों का कहना है कि धारा 368 के तहत संविधान संशोधन के लिए नियत प्रक्रिया का पालन करते हुए इसे संविधान में नहीं जोड़ा गया था।

अनुच्छेद 35A, धारा 370 का ही हिस्सा है। इस धारा की वजह से कोई भी दूसरे राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में संपत्ति नहीं खरीद सकता है और ना ही वहां का स्थायी नागरिक बन सकता है।

गौरतलब है कि कश्मीर में धारा 35-ए के मुद्दे को लेकर घाटी के 27 व्यापारिक संगठनों ने केंद्र सरकार को गंभीर परिणामों की चेतावनी देते हुए पांच-छह अगस्त के दो दिवसीय कश्मीर बंद के एलान का समर्थन किया है।

इससे पहले जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के चेयरमैन मुहम्मद यासीन मलिक ने शुक्रवार को धारा 35ए के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अगुवाई की। रेसिडेंसी रोड स्थित मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने के बाद, मलिक ने धारा 35ए के समर्थन में प्रदर्शन मार्च की अगुवाई की।

और पढ़ें- धारा 35-ए के मुद्दे पर दो दिवसीय कश्मीर बंद, जानिए क्या है यह और क्यों हो रहा विरोध

क्या है 35-ए

राष्ट्रपति के आदेश के बाद 14 मई 1954 को धारा 35ए प्रकाश में आया था। धारा 35ए राज्य विधानसभा को यह अधिकार देता है कि वह राज्य के स्थायी निवासियों की घोषणा कर सकती है और उनके लिए विशेष अधिकार निर्धारित कर सकती है।

यह अनुच्छेद 14 मई 1954 से जम्मू-कश्मीर में लागू है। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आदेश पर यह अनुच्छेद पारित हुआ था।

सर्वोच्च न्यायालय में इस धारा की वैधता को चुनौती दी गई है। याचिका में धारा को रद्द करने की मांग की गई है, सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर 6 अगस्त को सुनवाई होगी।

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First Published: Monday, August 06, 2018 07:43 AM

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