जम्‍मू-कश्मीर: 2010 के बाद खतरनाक हुई स्थिति, अलकायदा से जुड़ने वाले सबसे ज्यादा स्थानीय

अधिकारियों ने बताया कि इसमें सबसे बड़ी संख्या दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले की है, जहां से 35 युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए हैं।

  |   Updated On : August 27, 2018 08:47 AM
2010 के बाद खतरनाक हुई स्थिति, अलकायदा से जुड़ने वाले सबसे ज्यादा स्थानीय

2010 के बाद खतरनाक हुई स्थिति, अलकायदा से जुड़ने वाले सबसे ज्यादा स्थानीय

नई दिल्ली:  

जम्‍मू-कश्‍मीर में आतंकवाद को लेकर एक बेहद खतरनाक रिपोर्ट सामने आई है जिसके अनुसार साल 2010 के बाद 2018 में सबसे ज्यादा स्थानीय युवा अलग-अलग आतंकी संगठनों का हिस्सा बनें। इस रिपोर्ट के रुझानों के अनुसार 2018 में अब तक करीब 130 स्थानीय युवा आतंकी संगठनों का हिस्सा बन चुके हैं। इनमें से अधिकतर युवा अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठन अलकायदा से जुड़े हैं। अधिकारियों के अनुसार यह आंकड़ा 31 जुलाई 2018 तक शामिल हुए लोगों का है। 

अधिकारियों ने बताया कि इसमें सबसे बड़ी संख्या दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले की है, जहां से 35 युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए हैं। पिछले साल 126 स्थानीय लोग इन गुटों से जुड़े थे।

अधिकारियों ने बताया कि कई युवा अंसार गजवत-उल-हिंद में शामिल हो रहे हैं। यह समूह अलकायदा के समर्थन का दावा करता है और इसका नेतृत्व जाकिर रशीद भट उर्फ जाकिर मूसा करता है। वह पुलवामा जिले के त्राल क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला है।

अधिकारियों के मुताबिक, इस समूह की स्वीकार्यता धीरे-धीरे बढ़ रही है क्योंकि मूसा एकमात्र ऐसा आतंकी है जिसने हुर्रियत कॉन्‍फ्रेंस के अलगाववादी नेताओं का दबदबा खत्म किया है। उसने कश्मीर को राजनीतिक मुद्दा बताने पर सर कलम कर देने की धमकी दी है।

कश्मीर घाटी में सुरक्षा स्थिति पर नजर रखने वाले अधिकारियों का मानना है कि ‘शरीयत या शहादत’ के मूसा के नारे ने पाकिस्तान के समर्थन वाले वर्षों पुराने नारे की जगह ले ली है। 

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जाकिर मूसा के बारे में बताया जाता है कि उसने इंजिनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद 24 वर्षीय जाकिर मूसा ने युवाओं को आकर्षित किया है। वानी 2016 में मारा गया था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि वह पढ़ाई के साथ ही खेल में भी अच्छा था और अंतरराज्यीय कैरम प्रतियोगिता में उसने राज्य का प्रतिनिधित्व किया था। 

उन्‍होंने बताया कि यह बड़ी वजह है कि वह घाटी में कई नौजवानों के लिए मूसा नायक की तरह उभरने लगा। माना जाता है कि वह यमन-अमेरिकी मूल के प्रचारक अनवार अल अवलाकी से प्रभावित है जो सितंबर 2011 में अफगानिस्तान में गठबंधन बल के हमले में मारा गया था।

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मूसा मुख्य तौर पर अपने संगठन के लिए भर्ती पर फोकस कर रहा है और नौजवानों को हथियार उठाने के लिए उकसा रहा है। अलकायदा की भर्तियों के लिए भी अवलाकी की बड़ी भूमिका रही थी। 

अधिकारियों ने बताया कि प्रेरित करने वाली उसकी क्षमता के कारण लश्कर-ए-तैयबा जैसा आतंकी संगठन भी तब भौंचक रह गया जब वह अबू दुजाना को अपने समूह में ले आया। हाल ही में अबू दुजाना मारा गया था।

कश्मीर पुलिस के अनुसार भले ही अंसार गजवत-उल-हिंद का घाटी में बहुत आधार नहीं हो लेकिन गांव और कस्बे में उसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। 

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प्रतिबंधित आईएसआईएस से संबद्ध आईएसजेके को लेकर भी युवाओं में आकर्षण था लेकिन इसके प्रमुख दाऊद सोफी के मारे जाने के बाद अब समूह का कोई नामलेवा नहीं है।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि शोपियां, पुलवामा, अनंतनाग, कुलगाम और अवंतीपुरा जिलों वाले सबसे अशांत दक्षिण कश्मीर में सबसे ज्यादा युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हो रहे हैं। 

उन्‍होंने बताया कि कश्मीर घाटी में इन पांच जिलों से 100 से ज्यादा युवक विभिन्न आतंकी समूह में शामिल हुए हैं। राज्य विधानसभा और संसद में पेश हालिया आंकड़ों के मुताबिक 2010 के बाद इस साल यह आंकड़ा शीर्ष पर है ।

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों से पता चलता है कि 2010 से 2013 की तुलना में वर्ष 2014 के बाद घाटी में हथियार उठाने वाले नौजवानों की संख्या बढ़ती गयी है। वर्ष 2010 से 2013 तक यह आंकड़ा क्रमश: 54, 23, 21 और 6 था। वर्ष 2014 में यह संख्या बढ़कर 53 हो गयी और 2015 में 66 तथा 2016 में यह 88 तक चली गयी।

First Published: Monday, August 27, 2018 06:37 AM

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