BREAKING NEWS
  • SA vs SL : श्रीलंका ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत, टेस्ट सीरीज में दक्षिण अफ्रीका को उसी की धरती पर 2-0 से हराया- Read More »
  • एरो इंडिया एयर शो: पीवी सिंधु ने तेजस से उड़ान भरकर रच दिया इतिहास- Read More »
  • Pulwama Attack का हिसाब होकर रहेगा, राजस्‍थान के टोंक में बोले पीएम नरेंद्र माेदी- Read More »

35 सालों में सबसे अच्छे प्रदर्शन के बावजूद इन 7 कारणों से गुजरात चुनाव हार गई कांग्रेस

News State Bureau   |   Updated On : December 19, 2017 06:45 AM
राहुल गांधी (फाइल फोटो)

राहुल गांधी (फाइल फोटो)

ख़ास बातें

  •  गुजरात चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद जमीनी स्तर पर संगठन की कमजोरी बनी हार का बड़ा कारण
  •  मोदी की लहर को राहुल गांधी के मंदिरों के दर्शन का बांध तोड़ने में नाकामयाब रहा

नई दिल्ली:  

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके है। भारतीय जनता पार्टी ने 99 सीटें जीत कर राज्य में अपनी सत्ता को वापस से पा लिया। वहीं राहुल गांधी के जोरदार प्रचार प्रसार के बावजूद कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।

हालांकि कांग्रेस ने बीजेपी की गढ़ में अपनी जगह मजबूत करते हुए 77 सीटों पर कब्जा जमाया। जो पिछले 35 सालों में कांग्रेस का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन रहा है। 

2002 के बाद से देखा जाए तो राज्य में सीटों और वोट फीसदी के लिहाज से कांग्रेस लगातार मजबूत हुई है वहीं बीजेपी की सीटों की संख्या में गिरावट के साथ जनाधार में कमजोरी आई।

चुनाव प्रचार के दौरान राहुल ने नवसृजन यात्रा निकाली। इन चुनावों में उन्होंने कुल 57 रैलियों जरिए 24 जिलों को कवर किया। इस चुनाव में कांग्रेस की सीटों और जनाधार में बढ़ोत्तरी होने और  हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवानी और अल्पेश ठाकोर के समर्थन के बावजूद इन कारणों से हार का सामना करना पड़ा। 

मोदी लहर में बह गई कांग्रेस

गुजरात में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद कांग्रेस की हार का सबसे बड़ा कारण 'मोदी लहर' भी है। अन्य राज्यों की तरह लहर का असर इतना तेज था कि कांग्रेस का कमजोर बांध उसे रोक पाने में सफल नहीं हुआ। गुजरात चुनाव के प्रचार प्रचार की जिम्मेदारी खुद पीएम मोदी औऱ अमित शाह ने उठा रखी थी। मोदी के तंज और भाषणों ने राहुल गांधी के अथक प्रयासों को असफल कर दिया।

अकेले राहुल के कंधों पर थी जिम्मेदारी

गुजरात चुनाव का दारोमदार अकेले राहुल गांधी के कंधों पर था। पार्टी की रैली से मंदिर के दर्शन कर राहुल गांधी ने हर तरह से गुजरात चुनाव जीतने के लिए अपनी ताकत झोंक दी। लेकिन बीजेपी की तुलना में राहुल के पास गुजरात चुनाव के लिए संगठन मजबूत नहीं था। कमजोर संगठन के कारण चुनाव प्रचार को बूथ लेवल तक नहीं ले जाया जा सका।

चेहरा विहीन चुनाव

गुजरात में कांग्रेस के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं था। गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कोई भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित नहीं किया था। जिसका असर चुनाव के नतीजों पर पड़ा। ये बात छुपी नहीं है कि राज्य स्तर पर कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नेता विरोध में रहे, वहीं कई ने पार्टी छोड़ दी। इसका असर भी हार का कारण बना। वहीं गुजराती होने कारण पीएम मोदी और अमित शाह ने वहां की जनता के साथ अच्छी तरह से खुद को जोड़ लिया।

'आत्‍मघाती' बयान ने बढाई मुश्किल

राहुल गांधी पूरे प्रचार भर शांति और प्यार चुनाव लड़ने की बात करते रहे। लेकिन कांग्रेसी नेता मणिशंकर के एक विवादित बयान ने वोट बैंक को प्रभावित कर दिया। दरअसल मणिशंकर ने पीएम मोदी को 'नीच' और 'असभ्य' कहा था। जिसके बाद राहुल गांधी ने उन्हें पार्टी से बर्खास्त भी कर दिया था। हालांकि तब तक डैमेज हो चुका था। बीजेपी ने इस बयान को अपनी रैली में जम कर भुनाया।

इसे भी पढ़ें: राहुल ने ली हार की जिम्मेदारी, जनता को प्यार देने के लिए कहा-शुक्रिया

मुद्दों को ठीक से ना भुना पाना

बीजेपी जहां 'विकास' के मुद्दे पर चुनाव लड़ी वहीं कांग्रेस नौकरियों की कमी, नोटबंदी, असहिष्णुता, सुस्त अर्थव्यवस्था और मोदी सरकार के अधूरे वादों  जैसे मुद्दों को आधार बना कर ठीक से भुना पाने में असफल रही। ना ही कांग्रेस पाटीदारों के गुस्से को गुजरात में ठीक से बीजेपी के विरोध में काम नहीं ला सकी।

पाटीदारों का पूरा फायदा नहीं मिलना

गुजरात चुनाव में पाटीदारों का वोट मायने रखता है। बीजेपी के विरोध में जाने के बावजूद कांग्रेस पूरी तरह से पाटीदारों का वोट नहीं ले पाए। बेशक उसे कुछ संख्‍या में पाटीदारों के वोट मिले लेकिन यह संख्‍या इतनी नहीं कि बीजेपी की सरकार बनाने की संभावनाओं को प्रभावित कर सके।

इक्कों पर बाजी लगाना नहीं आया  काम 

कांग्रेस ने इस बार गुजरात चुनाव में ज्यादातर टिकटों का वितरण हार्दिक पटेल, अल्‍पेश ठाकोर और जिग्‍नेश मेवाणी की सलाह पर किया। जो कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं को बहुत रास नहीं आया। अल्‍पेश ने चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ज्‍वाइन की थी जबकि जिग्‍नेश निर्दलीय उम्‍मीदवार के तौर पर मैदान पर थे जिन्‍हें कांग्रेस ने समर्थन दिया था।

इसे भी पढ़ें: गुजरात चुनाव परिणाम: दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश की बड़ी जीत

HIGHLIGHTS

  • गुजरात चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद जमीनी स्तर पर संगठन की कमजोरी बनी हार का बड़ा कारण
  • मोदी की लहर को राहुल गांधी के मंदिरों के दर्शन का बांध तोड़ने में नाकामयाब रहा
First Published: Tuesday, December 19, 2017 06:12 AM

RELATED TAG: Congress Lost,

देश, दुनिया की हर बड़ी ख़बर अब आपके मोबाइल पर, डाउनलोड करें न्यूज़ स्टेट एप IOS और Android यूज़र्स इस लिंक पर क्लिक करें।

Latest Hindi News से जुड़े, अन्य अपडेट के लिए हमें फेसबुक पेज,ट्विटरऔरगूगल प्लस पर फॉलो करें

Newsstate Whatsapp

न्यूज़ फीचर

वीडियो

फोटो