2G स्कैम: CBI चार्जशीट में 31 हजार करोड़ के नुकसान का दावा, CAG ने बताया था 1.76 लाख करोड़ का नुकसान

सीएजी की रिपोर्ट में बताया गया था कि तत्कालीन सरकार की स्पेक्ट्रम आवंटन के मामले में पहले आओ-पहले पाओ की नीति से सरकारी खजाने को कुल 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

  |   Updated On : December 21, 2017 09:12 AM
2जी स्पेक्ट्रम में आज आएगा फैसला (फाइल फोटो)

2जी स्पेक्ट्रम में आज आएगा फैसला (फाइल फोटो)

ख़ास बातें
  •  देश के सबसे बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में आज फैसला सुनाया जाना है
  •  सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक इस घोटाले से खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ
  •  हालांकि सीबीआई की चार्जशीट में करीब 31,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का दावा किया गया है

नई दिल्ली :  

देश के सबसे बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में आज फैसला सुनाया जाना है। यूपीए-2 के दौरान यह घोटाला आज भी कांग्रेस के दामन से चिपका हुआ है।

नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के बाद नवंबर 2010 में इस घोटाले ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी।

सीएजी की रिपोर्ट में बताया गया था कि तत्कालीन सरकार की स्पेक्ट्रम आवंटन के मामले में 'पहले आओ-पहले पाओ' की नीति से सरकारी खजाने को कुल 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

हालांकि सीबीआई की चार्जशीट में महज 31 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का दवा किया गया है।  

अप्रैल 2011 में सीबीआई ने जो चार्जशीट फाइल की थी उसमें ए राजा समेत अन्य आरोपियों पर 2जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंसों के आवंटन में 30 हजार 984 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान कराने का आरोप लगाया था।

इसके बाद 2 फरवरी 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने इस सभी आवंटन और लाइसेंस को पूरी तरह रद्द कर दिया था।

घोटाले के बाद गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हुआ और मामले की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालत का गठन किया गया, जिसमें कुल तीन मामलों की सुनवाई मुकर्रर की गई।

पहला दो मामला सीबीआई ने दर्ज किया था जबकि तीसरा मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा था, जिसे प्रवर्तन निदेशाल (ईडी) ने दर्ज किया था। सीबीआई के पहले मामले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा और द्रमुक पार्टी सांसद कनिमोझी को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

राजा के खिलाफ 2जी स्पेक्ट्रम के लिए मंगाए जाने वाले आवेदन की तारीख को आगे बढ़ाने के साथ 'पहले आओ-पहले पाओ' की नीति का उल्लंघन का आरोप है। देश में उस वक्त स्पेक्ट्रम आवंटन इसी नीति के तहत किया जाता था।

इसके साथ ही उन पर वैसी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप है, जिन्हें टेलीकॉम बिजनेस का कोई अनुभव नहीं था।

जांच के दौरान राजा ने यह कहकर सनसनी मचा दी कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस पूरे मामले की जानकारी थी लेकिन सीबीआई ने कोर्ट को यह स्पष्ट किया कि वह आदतन झूठ बोलने वाले शख्स हैं और इस पूरे घोटाले में उनकी भूमिका सबसे बड़ी है।

सियासी घमासान और आरोपों एवं प्रत्यारोपों के बीच सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दायर की।

अक्टूबर 2011 में कोर्ट ने इन कंपनियों के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं में भ्रष्टाचार अधिनियम और रोकथाम के तहत धाखाधड़ी, जालसाजी, नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल, सरकारी अधिकारियों के भ्रष्टाचार में शामिल होने और रिश्वत लेने से लेकर आपराधिक साजिश रचने के मामले में आरोप तय किए।

अगर हुई सजा तो

सीबीआई की चार्जशीट में एस्सार ग्रुप के प्रमोटर, लूप टेलीकॉम और सर्राफ, लूप टेलीकॉम लिमिटेड, लूप मोबाइल इंडिया, और एस्सार टेली होल्डिंग को भी मुख्य आरोपी बनाया गया था।

सीबीआई की चार्जशीट में लगाए गए आरोप अगर सही साबित हुए तो राजा को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

और पढ़ें: 2 जी घोटाला: आज हो सकता है सजा का ऐलान, ए राजा जाएंगे जेल?

First Published: Thursday, December 21, 2017 08:47 AM

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