जानें अपने अधिकार: 10 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है मानवाधिकार दिवस

10 दिसंबर यानि रविवार को पूरे विश्व में मानवाधिकार दिवस मनाया जा रहा है। इसी दिन सन 1948 को संयुक्त राष्ट्र ने मानव अधिकारों के सार्वभौम (यूनिवर्सल) अधिकारों को अपनाया था।

  |   Updated On : December 10, 2017 07:31 AM
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस

ख़ास बातें
  •  संयुक्त राष्ट्र ने 1948 में यूनिवर्सल मानव अधिकार ड्राफ्ट किया, जो 10 दिसंबर को घोषित किया गया
  •  इस सार्वभौमिक घोषणा के अंदर 30 अनुच्छेद हैं जो व्यक्ति के बुनियादी अधिकारों के बारे में वर्णित है

नई दिल्ली:  

10 दिसंबर यानि रविवार को पूरे विश्व में मानवाधिकार दिवस मनाया जा रहा है।

इसी दिन सन 1948 को संयुक्त राष्ट्र ने मानव अधिकारों के सार्वभौम (यूनिवर्सल) अधिकारों को अपनाया था। जिसमें मानव समुदाय के लिए राष्ट्रीयता, लिंग, रंग, धर्म, भाषा और किसी भी आधार पर बिना भेदभाव किए बुनियादी अधिकार सुनिश्चित किए गए।

इस वैश्विक परिवार के सभी सदस्यों को मानवाधिकार के तहत समान और बिना किसी को अलग किए दुनिया में शांति, न्याय और स्वतंत्रता का आधार साबित हुआ है।

व्यक्ति के मानवाधिकार और स्वंतत्रता के विचारों का उदय ब्रिटेन से ही लिया गया है। ब्रिटेन के इतिहास में 1215 का माग्ना कार्टा, 1679 का हैबियस कॉर्पस एक्ट और 1689 का बिल ऑफ राइट्स मानवाधिकार के विकास की ऐतिहासिक घटनाएं हैं।

10 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है मानवाधिकार दिवस

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मानव समाज पर ढाए गए जुल्म, सितम और उसके बाद असमानता, हिंसा, भेदभाव को देखते हुए अधिकारों की जरूरत को समझकर संयुक्त राष्ट्र ने यूनिवर्सल मानव अधिकार ड्राफ्ट किया, जो 10 दिसंबर को घोषित किया गया।

इस सार्वभौमिक घोषणा के अंदर 30 अनुच्छेद हैं जो व्यक्ति के बुनियादी अधिकारों के बारे में वर्णित है। जिसके पहले ही अनुच्छेद में कहा गया है कि हर व्यक्ति को जन्म से ही स्वतंत्रता और समानता प्राप्त है।

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मानवाधिकार का ड्राफ्ट औपचारिक रूप से 4 दिसंबर 1950 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्ण अधिवेशन में लाया गया, जिसके तहत महासभा ने प्रस्ताव 423 (वी) को घोषित कर सभी देशों और संगठनों को अपने-अपने तरीके से मनाने के लिए कहा गया।

इस दिन मानव अधिकार के मुद्दों पर कई बड़ी राजनीतिक विमर्श, बैठक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

बता दें कि 10 दिसंबर को ही मानव अधिकार के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र का पंचवर्षीय और नोबेल पुरस्कार दिया जाता है।

भारत में भी 28 सितंबर 1993 से मानव अधिकार कानून को लागू किया गया और 12 अक्टूबर 1993 को 'राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग' का गठन हुआ।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14,15,16,17,19,20,21,23,24,39,43,45 के तहत देश के अंदर मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की गई है।

संविधान किसी भी व्यक्ति के मानव अधिकारों का हनन होने पर सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक उपचार का अधिकार भी देता है।

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First Published: Sunday, December 10, 2017 06:58 AM

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