अब जेएनयू में शिक्षकों के लिए भी अटेंडेंस अनिवार्य, प्रवेश परीक्षा होगी ऑनलाइन

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) ने शिक्षकों के लिए भी अटेंडेंस को अनिवार्य कर दिया है।

  |   Updated On : July 14, 2018 11:32 AM
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू), दिल्ली (फाइल फोटो)

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू), दिल्ली (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:  

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) ने शिक्षकों के लिए भी अटेंडेंस को अनिवार्य कर दिया है। यूनिवर्सिटी ने यह फैसला शुक्रवार को 146 वीं शैक्षणिक परिषद(ए.सी. मीटिंग) की बैठक के दौरान लिया है।

जेएनयू के रेक्टर-1 चिंतामनी महापात्रा ने बताया कि 'जेएनयू ने छात्रों और प्रशासनिक कर्मचारियों के लिए अटेंडेंस के नियमों को पहले ही लागू कर दिया गया था, अब 146वीं ए.सी. की मीटिंग के बाद शिक्षकों के लिए भी अटेंडेंस को अनिवार्य बना दिया गया है, जेएनयू फैक्लटी को अब दिन में कम से कम एक अपनी अटेंडेंस देनी होगी।'

यूनिवर्सिटी ने इस मीटिंग के दौरान कई जरूरी मुद्दों पर गंभीर फैसले लिए जो 'आकादमिक और शोध गतिविधियों में बड़े सुधार लाएंगे'।

ए.सी. मीटिंग में यह भी निर्णय लिया गया कि निष्पक्ष और पूर्वाग्रह मुक्त परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए अगले सत्र से जेएनयू की प्रवेश परीक्षा पूरी तरह से ऑनलाइन हो जाएगी।

यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि 'ए.सी. मीटिंग के दौरान जेएनयू प्रवेश परीक्षा को पूरी तरह से ऑनलाइन करने का फैसला लिया गया है। इस विषय पर हुई चर्चा में कई शिक्षकों ने यह बात कहीं कि प्रवेश परीक्षा ऑनलाइन होने से यह पहले से अधिक स्पष्ट, सुरक्षित और पूर्वाग्रह मुक्त होगी।'

साथ ही मीटिंग में यह भी फैसला लिया गया कि हर सेमेस्टर के शुरुआत में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान दाखिला लेने वाले सभी छात्रों को अंडरटेकिंग देनी होगी कि वह यूनिवर्सिटी के अंटेंडेस नियमों को मानेंगे।

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इसके अलावा, यूनिवर्सिटी के सभी हितधारकों जैसे छात्रों, शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारीयों को ध्यान में रख कर नए नियमों को बनाया गया है जिससे प्रशासनिक और उत्तरदायित्व के स्तर पर सुधार लाया जा सके।

साथ ही बयान में कहा गया है कि 'छात्रों के हितों को ध्यान में रख कर यह फैसला लिया गया है कि अब टीचर परीक्षा के ग्रेड देने से पहले छात्रों को उत्तर पुस्तिका या आंसर स्क्रिप्ट दिखाना अनिवार्य होगा। इससे मूल्यांकन की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगी।'

मीटिंग में स्कूल ऑफ फिजिकल साइंस्स के अंतर्गत मैथ्स में दो साल के एमएससी डिग्री प्रोग्राम की शुरुआत भी की गई है।

माहापात्रा ने बयान में कहा कि 'आगे आने वाले समय में यूनिवर्सिटी के स्तर पर एक टाइम-टेबल को लागू किया जाएगा।' आगे उन्होंने बताया कि 'यह टाइम-टेबल छात्रों को एक साथ दो कोर्स करने में मदद करेगा। इससे टाइम के साथ-साथ हर तरह का मैनेजमंट बेहतर होगा। साथ ही क्लास-रूम स्पेस का बेहतर इस्तेमाल भी हो सकेगा।'

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First Published: Saturday, July 14, 2018 11:07 AM

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