अच्छी नींद की कमी से पार्किंसंस का खतरा, इस प्रोटीन से कर सकते हैं बचाव

क्या आपको अच्छी नींद की कमी खलती है और रात में सोते वक्त लात मारने की आदत है?

  |   Updated On : December 08, 2017 08:50 AM
प्रतीकात्मक फोटो

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नई दिल्ली:  

क्या आपको अच्छी नींद की कमी खलती है और रात में सोते वक्त लात मारने की आदत है? अगर ऐसा है तो सावधान हो जाइए, एक अध्ययन के मुताबिक, विशेषकर पुरुषों में यह संकेत पार्किंसंस रोग से जुड़े एक विकार का संकेत हो सकता है।

आंखों को जल्दी-जल्दी मीचने की आदत अक्सर 50 से 70 वर्ष आयु वर्ग के व्यक्तियों को प्रभावित करता है और महिलाओं की तुलना में ऐसा पुरुषों में अधिक पाया जाता है। यह नींद आने में दिक्कत के कारण होती है।

जबकि स्वस्थ लोग चैन को नींद सोते हैं तो वहीं आरबीडी से पीड़ित लोग अपने सपनों में जीवित रहते हैं और नींद के दौरान हाथ-पैर चलाते रहते हैं और चिल्लाते हैं।

न्यूरोलॉजी की पत्रिका 'द लांसेट' में प्रकाशित शोध रिपोर्ट से पता चला है कि आरबीडी वाले पुरुषों में डोपामाइन की कमी होती है। डोपामाइन मस्तिष्क में एक रसायन है, जो भावनाओं, गतिविधियों, खुशी और दर्द की उत्तेजनाओं को प्रभावित करता है। साथ ही यह मस्तिष्क के उत्तेजन का एक रूप है।

नतीजतन, उम्र बढ़ने के साथ-साथ पार्किंसंस रोग या मनोभ्रंश के विकसित होने का जोखिम बढ़ता चला जाता है। मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं का समूह जो डोपमाइन को बनाता है, काम करना बंद कर देता है, जिस कारण पार्किंसंस रोग रोग होता है।

शोधकर्ताओं को पहले पता नहीं था कि उत्तेजना रोगियों में मस्तिष्क में विकार का एक रूप है जो मरीजों में पार्किं संस रोग के विकास के जोखिम को बढ़ाता है।

इस अध्ययन में स्पेन और डेनमार्क के तीसरे निद्रा केंद्रों में आरबीडी के रोगियों और पार्किंसंस व संज्ञानात्मक हानि के कोई क्लीनिकल प्रमाण नहीं मिले हैं। मस्तिष्क में परिवर्तन का विश्लेषण पोजीट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी) का उपयोग किया गया था।

बढ़ती उम्र के साथ होने वाली इस बीमारी के लक्षण डिमेंशिया से मिलते-जुलते होते हैं। जैसे मूडी हो जाता, फोकस करने में दिक्कत, याददाश्त कमजोर होना, दृष्टि भ्रम, पेशाब करने में दिक्कत, सूंघने की काबिलियत खो देना, नींद में समस्या ये सब पार्किंसंस के लक्षण भी होते हैं।

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लाइलाज नहीं है बीमारी

इस बीमारी का मुख्य कारण एक जीन में बदलाव होता है। यह जीन एक प्रोटीन का उत्पादन करता है, जो न्यूरॉन्स में न्यूरोट्रांसमीटर डोपेमाइन के पैकेजिंग में शामिल है। पार्किंसन रोग में डोपोमाइन का उत्पादन करने वाले न्यूरॉन्स की संख्या घट जाती है।

ग्लैडस्टोन इस्टीट्यूट्स ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं के अनुसार बीमारी पैदा करने वाले प्रोटीन की कमी को एक अलग प्रोटीन (एनआरएफ2) का इस्तेमाल से पूरा कर कोशिका को बचाया जा सकता है।

बुढ़ापे में पार्किंसंस रोग या दिमाग से जुड़ी अन्य बीमारियों से बचने के लिए मानसिक व शारीरिक रूप से व्यायाम करते रहना चाहिए। जो आयु के साथ बढ़ती बीमारियों को रोकने में मददगार होगा। 

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First Published: Friday, December 08, 2017 08:37 AM

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