दोहरा झटका: लगातार बढ़ रही महंगाई, फिसला औद्योगिक उत्पादन

नवंबर महीने में भारतीय अर्थव्यवस्था को दोहरा झटका लगा है। एक तरह जहां खुदरा महंगाई में जहां इजाफा हुआ है वहीं औद्योगिक विकास दर में गिरावट आई है।

  |   Updated On : December 12, 2017 06:47 PM
दोहरा झटका: नवंबर में बढ़ी महंगाई, फिसला औद्योगिक उत्पादन (फाइल फोटो)

दोहरा झटका: नवंबर में बढ़ी महंगाई, फिसला औद्योगिक उत्पादन (फाइल फोटो)

ख़ास बातें
  •  नवंबर महीने में भारतीय अर्थव्यवस्था को दोहरा झटका लगा है
  •   एक तरह जहां खुदरा महंगाई में जहां इजाफा हुआ है वहीं आईआईपी में गिरावट आई है
  •  नवंबर महीने में खुदरा महंगाई दर अक्टूबर के 3.58 फीसदी से बढ़कर 4.88 फीसदी हो गई

नई दिल्ली:  

नवंबर महीने में भारतीय अर्थव्यवस्था को दोहरा झटका लगा है।

एक तरह जहां सीपीआई आधारित खुदरा महंगाई में जहां इजाफा हुआ है वहीं औद्योगिक विकास दर में गिरावट आई है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक नवंबर महीने में खुदरा महंगाई दर अक्टूबर के 3.58 फीसदी से बढ़कर 4.88 फीसदी हो गई।

नवंबर महीने का महंगाई आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4 फीसदी के मीडियम टर्म टारगेट से अधिक है।

वहीं दूसरी तरफ नवंबर में औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आई है। अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) दर 2.2 फीसदी रही, जो पिछले महीने में 3.8 फीसदी थी।

बेमौसम बारिश की वजह से खाद्य पदार्थों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, जिसकी वजह से खुदरा महंगाई में इजाफा हुआ है।

महंगाई दर में बढ़ोतरी होने के बाद आरबीआई की तरफ से ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है।

गौरतलब है कि इससे पिछली समीक्षा बैठक में आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था, जिसे लेकर उद्योग जगत ने निशाना जाहिर की थी।

आरबीआई के ब्याज दरों में बदलाव नहीं किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा था कि यथास्थिति बनाए रखने का आरबीआई का तटस्थ रुख इस सच्चाई पर मुहर है कि महंगाई 'नियंत्रण में' बनी हुई है।

वित्त मंत्रालय ने कहा, 'मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने मान्यता दी है कि मुद्रास्फीति लगातार नियंत्रण में है और वित्त वर्ष 2018 की दूसरी छमाही के लिए अपनी मुद्रास्फीति अनुमान को बनाए रखा है और यह आकलन किया है कि मुद्रास्फीति बढ़ने का जोखिम समान रूप से संतुलित है। इसी कारण से, समिति ने एक तटस्थ रुख बनाए रखा है।'

बयान में कहा गया है, 'एमपीसी ने सरकार की कई महत्वपूर्ण पहलों -जीएसटी, बैंक पुनर्पूजीकरण पैकेज और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में सुधार को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2018 के अपने सालाना जीवीए अनुमान को 6.7 फीसदी पर बरकरार रखा है।'

अक्टूबर महीने में भी खाद्य पदार्थो, ईंधन और आवास की कीमतों में वृद्धि से महंगाई में तेजी आई थी। सितंबर में यह आंकड़ा 3.28 फीसदी था।

First Published: Tuesday, December 12, 2017 05:59 PM

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