कमज़ोर रुपये को संभालने के लिए रिजर्व बैंक को उठाने होंगे मजबूत कदम: विशेषज्ञ

डॉलर के मुकाबले रुपये में मंगलवार को फिर ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। इस साल जनवरी से लेकर अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले तकरीबन 15 फीसदी से ज्यादा कमजोर हुआ है।

  |   Updated On : September 12, 2018 06:46 AM
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (फाइल फोटो)

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:  

अमेरिकी डॉलर के सामने गोता खा रही देसी मुद्रा को थामने के लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के अब तक के प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये में मंगलवार को फिर ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। इस साल जनवरी से लेकर अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले तकरीबन 15 फीसदी से ज्यादा कमजोर हुआ है। हालांकि आर्थिक मामलों के जानकार बताते हैं कि फौरी तौर पर रुपये की गिरावट थामने का उपाय भारतीय रिजर्व बैंक ही कर सकता है।

कच्चे तेल के दाम में आई तेजी, अमेरिकी संरक्षणवादी नीतियों से वैश्विक स्तर पर डॉलर को मिली मजबूती और घरेलू शेयर बाजार में गिरावट से मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले लुढ़क कर रिकॉर्ड निचले स्तर 72.74 पर पहुंच गया और दिन का कारोबार बंद होने तक 72.69 पर रहा, जो अबतक का सबसे निचला क्लोजिंग स्तर है।

आरबीआई के हस्तक्षेप के बाद रुपया मंगलवार को पिछले सत्र की क्लोजिंग के मुकाबले 15 पैसे की बढ़त के साथ 72.30 पर खुला, मगर बाद में फिर गिरावट शुरू हो गई।

एंजेल ब्रोकिंग के करेंसी एनालिस्ट अनुज गुप्ता का मानना है कि तेल आयात के लिए डॉलर की बढ़ती मांग, विदेशी निवेशकों के निवेश में कमी के अलावा आरबीआई के पास विदेशी मुद्रा भंडार घटने से रुपये में कमजोरी आई है।

चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक हितों के टकराव से वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का महौल पैदा हो गया। इस बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती आने से डॉलर दुनिया के अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले लगातार मजबूत हुआ है।

आर्थिक मामलों के जानकार, आउटलुक(हिंदी) पत्रिका के संपादक, हरवीर सिंह ने कहा कि आरबीआई की ओर से अब जो उपाय किए गए हैं, वे छोटे उपाय थे, मगर आरबीआई को अब कुछ बड़े कदम उठाने पड़ेंगे, ताकि रुपये की गिरावट थामी जा सके। उन्होंने कहा, 'डॉलर की आमद बढ़ाने के लिए निर्यात को बढ़ावा देने की जरूरत है, जो तत्काल संभव नहीं है। ऐसे में आरबीआई को ही कारगर उपाय करने होंगे।'

सिंह ने कहा, 'अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती आने से दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर लगातार मजबूत हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने से आयात महंगा हो गया है, जिससे चालू खाता घाटा बढ़ रहा है। ऐसे में निर्यात बढ़ाने से ही चालू खाता घाटा कम किया जा सकता है।'

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ, वरिष्ठ पत्रकार राजेश रपरिया का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने के बावजूद निर्यात को कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा है, जो अपने आप में चिंता की बात है। उन्होंने कहा, 'निर्यात तभी होगा, जब हमारी वस्तुएं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी होंगी। मगर, बात कृषि उत्पाद की हों या विनिर्माण क्षेत्र की वस्तुएं, कई भारतीय उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कम प्रतिस्र्धी हो गए हैं, जिससे निर्यात प्रभावित हुआ है। इसके लिए निर्यात प्रोत्साहन देने की जरूरत है।'

अनुज गुप्ता ने कहा कि आरबीआई के पास एक उपाय एनआरआई बांड जारी करने का है। उन्होंने कहा, 'इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि आरबीआई रुपये की गिरावट थामने के लिए एनआरआई बांड जारी कर सकता है।'

गुप्ता के अनुसार, अगर ऐसा हुआ तो डॉलर के मुकाबले रुपये में दो रुपये तक की रिकवरी आ सकती है।

हालांकि आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने पिछले दिनों एक टीवी चैनल के साथ साक्षात्कार के दौरान जब एनआरआई बांड जारी करने के सुझाव के बारे में पूछा गया तो वह इस सवाल को टाल गए और बोले कि यह महज एक हथियार है।

इस साल छह जनवरी, 2018 को रुपया डॉलर के मुकाबले 63.33 पर था, जोकि 14.77 फीसदी लुढ़क कर मंगलवार को 72.69 तक आ गया। दुनिया के अन्य देशों की मुद्राओं के मुकाबले भी डॉलर मजबूत हुआ है।

केडिया कमोडिटी के रिसर्च के अनुसार, पिछले एक साल में तुर्की के लीरा के मुकाबले डॉलर 89.86 फीसदी मजबूत हुआ है। वहीं रूस की मुद्रा रूबल के मुकाबले डॉलर एक साल में 22.15 फीसदी मजबूत हुआ है। इसी प्रकार, दुनिया की कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार 31 अगस्त को समाप्त सप्ताह में 1.19 अरब डॉलर घटकर 400.10 अरब डॉलर रह गया।

First Published: Tuesday, September 11, 2018 10:10 PM

RELATED TAG: Reserve Bank Of India, Rbi, Dollar, Rupees, Stock Market,

देश, दुनिया की हर बड़ी ख़बर अब आपके मोबाइल पर, डाउनलोड करें न्यूज़ स्टेट एप IOS और Android यूज़र्स इस लिंक पर क्लिक करें।

Latest Hindi News से जुड़े, अन्य अपडेट के लिए हमें फेसबुक पेज, ट्विटर और गूगल प्लस पर फॉलो करें

न्यूज़ फीचर

मुख्य ख़बरे

वीडियो

फोटो