BREAKING NEWS
  • देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) का दावा, महाराष्ट्र में बीजेपी जल्द बनाएगी स्थिर सरकार- Read More »
  • महाराष्ट्र में दोबारा चुनाव नहीं चाहते हैं, कांग्रेस के साथ बैठक के बाद लिया जाएगा उचित निर्णय: शरद पवार- Read More »

लड़की की चाहत में 'सरवना भवन' के मालिक राजगोपाल पहुंचा जेल, चेन्नई कोर्ट में किया सरेंडर

IANS  |   Updated On : July 10, 2019 04:13:56 PM
सरवना भवन के मालिक राजगोपाल ने किया सरेंडर (फोटो-IANS)

सरवना भवन के मालिक राजगोपाल ने किया सरेंडर (फोटो-IANS) (Photo Credit : )

नई दिल्ली:  

हत्या के आरोप में दोषी करार दिए जाने और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद सरवना भवन रेस्टोरेंट समूह के मालिक पी. राजगोपाल ने मंगलवार को चेन्नई की एक कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया. अपने कर्मचारी प्रिंस संतकुमार की हत्या के मामले में राजगोपाल को दोषी पाया गया है. राजगोपाल ने सर्वोच्च न्यायालय में सरेंडर करने के लिए समय देने की अर्जी लगाई थी. शीर्ष न्यायालय के इनकार करने के कुछ घंटों बाद ही उसने सरेंडर कर दिया.

ये भी पढ़ें: कराची: कैफे के बाहर पाकिस्तानी पत्रकार मुरीद अब्बास की गोलियों से भूनकर हत्या

वह यहां अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में एक ऑक्सीजन मास्क के साथ एक एम्बुलेंस में आया और व्हीलचेयर में न्यायाधीश के सामने पेश हुआ. इससे पहले चिकित्सा का हवाला देते हुए समय बढ़ाने की राजगोपाल की मांग को सर्वोच्च न्यायालय ने ठुकरा दिया.

शीर्ष कोर्ट ने राजगोपाल के वकील को फटकार लगाई कि अगर वह इतने बीमार थे, तो उन्होंने सुनवाई के दौरान अपनी बीमारी का जिक्र क्यों नहीं किया. कोर्ट ने उन्हें कोई राहत नहीं दी. 71 वर्षीय राजगोपाल ने यह भी मांग की कि उन्हें जेल भेजे जाने से छूट दी जाए और उनके अस्पताल में भर्ती होने को जेल की सजा समझा जाए, जिससे कोर्ट सहमत नहीं हुई. 

और पढ़ें: दिल्ली-NCR में खौफ का पर्याय बन चुका त्रिकाल गैंग पुलिस के हत्थे चढ़ा, जानिए कैसे करते थे लूटपाट

देश और विदेशों में लोकप्रिय रेस्टोरेंटश्रं खला के संस्थापक राजगोपाल को एक सत्र कोर्ट ने संतकुमार की हत्या के आरोप में 10 साल जेल की सजा सुनाई थी. संतकुमार की पत्नी से वह शादी करके उसे अपनी तीसरी पत्नी बनाना चाहता था. जब महिला ने प्रस्ताव ठुकरा दिया, तो उसने उसके पति को मरवा दिया.

सत्र कोर्ट के निर्णय के खिलाफ उसने मद्रास उच्च न्यायालय में अपील की, लेकिन यहां उनकी सजा उम्रकैद तक बढ़ा दी गई. शीर्ष कोर्ट ने मार्च में सजा बरकरार रखी थी और उसे सात जुलाई को सरेंडर करना था.

ये भी पढ़ें: बुलंदशहर: DM के घर सीबीआई का छापा, मंगाई गई नोट गिनने की मशीन

उसने बीमारी का हवाला देते हुए सात जुलाई को अपने कार्यकाल की शुरुआत में देरी के लिए सोमवार को शीर्ष कोर्ट का रुख किया, जहां से उसे निराशा ही हाथ लगी.

First Published: Jul 10, 2019 03:56:38 PM
Post Comment (+)

न्यूज़ फीचर

वीडियो