Big Story: निर्भया से लेकर अलीगढ़ की बच्ची तक, जानें रोंगटे खड़े करने वाली रेप की 10 बड़ी वारदातें

Nihar Ranjan Saxena  |   Updated On : June 08, 2019 12:53:10 PM
सांकेतिक चित्र

सांकेतिक चित्र (Photo Credit : )

ख़ास बातें

  •  एक दशक में मासूमों के साथ ऐसी घटनाओं की दर में 500 फीसदी की वृद्धि.
  •  बलात्कार की अधिसंख्य घटनाओं में परिचितों या परिजनों का ही हाथ.
  •  15 फीसदी दर के साथ यूपी शीर्ष पर. फिर महाराष्ट्र और एमपी का नंबर.

नई दिल्ली.:  

अलीगढ़ (Aligarh) में ढाई साल की मासूम की नृशंस हत्या से देश भर में उबाल है. मामला दो संप्रदायों (Two Community) से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील हो गया है. हालांकि बच्ची के साथ बलात्कार (Rape) की प्रारंभिक आशंका पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निर्मूल साबित हुई है. हिंदी फिल्म उद्योग से लेकर कांग्रेस सरीखे राष्ट्रीय दल दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं. हालांकि अलीगढ़ की हौलनाक घटना ने एक बार फिर 2012 के निर्भया कांड (Nirbhaya Case) की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने पूरे देश को आंदोलित कर दिया था. अगर देखा जाए तो निर्भया कांड के बाद भी कुछ खास नहीं बदला है. अलीगढ़ की घटना से पहले राजस्थान के अलवर, उन्नाव, सूरत, मणिपुर, कठुआ, इंदौर की हौलनाक घटनाएं हैं, जिन्होंने जाति-धर्म से परे देश भर को न सिर्फ एकजूट किया, बल्कि केंद्र व राज्य सरकार पर कड़ी कार्रवाई का दबाव भी बनाया. एक हिलाने वाली बात यह कि बलात्कार (Rape) की अधिसंख्य घटनाएं मासूमों के साथ हुईं.

इसके अलावा यह भी कम गंभीर बात नहीं है कि अधिसंख्य घटनाओं में किसी न किसी परिचित (Member) का ही हाथ रहा. बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन 'क्राय' के मुताबिक हर 15 मिनट में देश भर में किसी न किसी बच्चे के साथ यौन अपराध (Sexual Crime) की वारदात होती है. यही नहीं, पिछले एक दशक में मासूमों के साथ ऐसी घटनाओं की दर में 500 फीसदी की वृद्धि हुई है. इन हौलनाक अपराधों में भी उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) 15 फीसदी दर के साथ शीर्ष पर है, जबकि महाराष्ट्र (Maharashtra) और मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) क्रमशः 14 और 13 फीसदी के साथ दूसरे और तीसरे नंबर पर आते हैं. ऐसे में अलगीढ़ कांड के आलोक में देखते हैं रेप की कुछ ऐसी ही हौलनाक घटनाएं जिन्होंने देश भर के लोगों में सिहरन पैदा कर दी.

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अलवर रेप मामला
ऐन लोकसभा चुनाव के दौरान सामने आए अलवर गैंग रेप (Alwar rape Case) प्रकरण ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार समेत केंद्र के लिए भी असहज स्थिति खड़ी कर दी थी. इस घटना में अपने पति के साथ जा रही एक दलित महिला के साथ गैंग रेप हुआ था. यही नहीं, पहले तो पीड़िता को ही चुप रहने की धमकी दी गई. फिर किसी तरह हिम्मत जुटा कर पुलिस के पास पहुंची पीड़िता को आरोपी केस वापस लेने के लिए धमकाने लगे. जाहिर है लोकसभा चुनाव के दौरान सामने आए हादसे की वजह से संवेदनशील मसला राजनीति की बिसात बन गया.

कठुआ मामला
अप्रैल 2018 में सामने आए इस मामले में कई दिनों से लापता 8 साल की बच्ची का शव जंगल में मिला था, जिसके साथ बर्बरता के साथ बलात्कार किया गया था. कठुआ बलात्कार (Kathua) मामले बतौर लोकप्रिय हुए इस प्रकरण में राजनीति और धर्म का भी काफी घालमेल हुआ था. इसमें जुल्म की इंतहा की शिकार हुई लड़की घुमंतू बखेरवाल जाति की थी, जिन्हें वहां से बेदखल करने के लिए इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया गया था. इस मामले से उत्तर प्रदेश का नाम भी जुड़ा था और बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने आरोपियों के पक्ष में खुलकर आंदोलन किया था. बाद में जांच कर रहे पुलिस इंस्पेक्टर पर भी अंगुलियां उठी, लेकिन असल दोषी अभी तक न्याय से दूर हैं.

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सीतापुर गैंग रेप केस
यह मामला भी देश भर को झकझोर गया था. वजह, इसमें गैंग रेप की शिकार 35 साल की युवती थी और आरोपी उसका सगा पिता. अप्रैल 2018 में सामने आए इस मामले में एक पिता (Father) ने ही अपनी बेटी को न सिर्फ हवस के मारे अपने दो दोस्तों के हवाले कर दिया, बल्कि शराब के नशे में धुत्त होकर खुद भी उसके साथ बलात्कार (Raped) किया. युवती को लगातार एक कमरे में 18 घंटे बंद रख कर नर्क के समान यातनाएं दी गईं. किसी तरह नरपिशाचों के चंगुल से छूट कर घर पहुंची लड़की ने जब अपनी मां को सारी आपबीती सुनाई, तो कहीं जाकर मामला खुला.

मैनपुरी में पीड़ित और आरोपी नाबालिग 
सिद्धार्थनगर में बारात देखने आए मासूम के साथ बलात्कार की घटना के कुछ दिनों बाद ही मैनपुरी (Mainpuri Minor Rape Case) में हुई इस घटना ने देश भर का ध्यान खींचा था. मैनपुरी में एक 13 साल के लड़के ने 9 साल की लड़की को घर से बुलाकर उसके साथ बलात्कार किया था. इस मामले का दुखद पहलू यह था कि आरोपी ने किसी शातिर की तरह वारदात को अंजाम दिया था. उसने 9 साल की मासूम को अंगूठी का लालच दिया, फिर उसे सूनसान जगह पर ले जाकर बलात्कार किया. यही नहीं, उसने लड़की को इसके बारे में किसी से चर्चा करने पर जान से मारने की धमकी तक दे डाली. हालांकि लड़की ने तकलीफ बढ़ने पर मां से अपना 'अपराधबोध' साझा किया तब कहीं जाकर मामला खुला.

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छत्तीसगढ़ में मासूम की रेप के बाद हत्या
इसमें 10 साल की लड़की शादी समारोह में शामिल होने आई थी. कबीरधाम नाम के गांव में हो रही उस शादी में एक 25 साल के हैवान की नजर उस मासूम पर पड़ी. उसने जब यह देखा कि घर-परिवार के सभी लोग शादी में मशगूल हैं, तो उसने लड़की को बहलाया-फुसलाया (Lured) और घर से दूर ले जाकर अपनी हवस का शिकार बनाया. यही नहीं, वारदात की खबर किसी को नहीं लगे इसलिए मासूम का सिर कुचलकर (Crushed To Death) उसकी जान ले ली और फिर उसका शव सूखी नदी में जाकर दबा दिया. बाद में शक की बिनाह पर पकड़े गए युवक ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया, तो देश को पता चला कि अब घरेलू कार्यक्रमों में भी बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं.

असम में रेप बाद जलाकर मार डाला मासूम को
उत्तर-पूर्व के प्रति अधिसंख्य पढ़े-लिखे हिंदुस्तानी भी खास रुचि नहीं रखते हैं. यही वजह है कि वहां की खबरें भी इस तरफ नहीं आती हैं या देर से आती हैं. हालांकि यह घटना अपनी प्रकृति के कारण देर से ही सही राष्ट्रीय चर्चा की केंद्र बनी. नागांव (Nagaon) जिले में एक 11 साल की बच्ची के साथ पहले तो सारी हैवानियत पार की गई. फिर उसे जिंदा ही फूंक (Burnt Alive) दिया गया. घटना के समय बच्ची घर पर अकेली थी और उसके मां-बाप खेत पर काम कर रहे थे. बच्ची के जलने की सूचना पर जब तक वह घर पहुंचे मासूम 90 फीसदी जल चुकी थी, जिसकी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई. हालांकि मरने से पहले उसने आरोपी का नाम बता दिया, जिसके बाद गांव वालों ने ही उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.

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इंदौर में 4 माह की बच्ची से हैवानियत बाद हत्या
कठुआ कांड से पूरे देश में एक उबाल सा था, उसी दौरान इंदौर (Indore) में हुई इस हैवानियत ने देश का सिर शर्मसार कर दिया था. इंदौर के राजवाड़ा इलाके में 4 माह की मासूम से हैवानियत कर उसकी हत्या कर दी गई थी. इस घटना से उपजे रोष का ही असर था कि तत्कालीन शिवराज सिंह (Shivraj Singh) सरकार ने इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में कर आरोपी को फांसी दिए जाने की व्यवस्था की थी. यह अलग बात है फास्ट ट्रैक कोर्ट से फांसी हो जाने के बावजूद जघन्य हत्याकांड का दोषी भारतीय दंड प्रक्रिया की खामियों का परोक्ष फायदा पा जिंदा बचा हुआ है.

उन्नाव कांड
इस कांड (Unnao Case) ने भी देश भर में खूब सुर्खियां बटोरी. मामले में बीजेपी नेता का नाम आने के बाद तो इस मामले ने देश की सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी जगह बनाई. इसमें 16 साल की लड़की ने बीजेपी नेता (BJP Leader) पर बलात्कार का आरोप लगाया था, लेकिन पुलिस की कथित निष्क्रियता के बाद पीड़िता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के आवास (CM Residence) के पास खुद को आग लगाने की कोशिश की थी. इसके बाद पुलिस हरकत में आई, लेकिन बीजेपी नेताओं के आरोपी को कथित समर्थन से राजनीति ही हुई इस मसले में भी न्याय नहीं हुआ.

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गुड़िया रेप केस
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला (Shimla) में जुलाई 2017 को 16 साल की गुड़िया जब घर वापस आ रही थी तभी उसका अपहरण कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया. और फिर बलात्कार के बाद मासूम गुड़िया की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद हत्यारों ने उसके मृत शरीर को जंगल में फेंक दिया. जो दो दिन के बाद बरामद हुआ था. पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगा. लोगों के गुस्से का आलम यह था कि उन्होंने सड़कों पर उतर सरकार को कठघरे में खड़ा करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी.

मुंबई का शक्ति मिल गैंग रेप
इस केस को भी राष्ट्रीय सुर्खियां मिली, क्योंकि इसमें मुंबई के महालक्ष्मी (Mahalaxmi) इलाके में स्थित शक्ति मिल (Shakti Mill Gang Rape) के खंडहरों में एक मीडिया संस्थान में कार्यरत इंटर्न (Media Intern) के साथ गैंग रेप किया गया. आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल था. आरोपियों के हौसलों का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उन्होंने पीड़िता के पुरुष साथी को उसी की बेल्ट से बांध उसकी आंखों के सामने गैंग रेप को अंजाम दिया था. यही नहीं, आरोपियों ने पूरे कांड को मोबाइल पर फिल्माया (Mobile) और पुलिस से शिकायत करने पर उन्हें वायरल कर देने की धमकी भी दी थी. मामला खुलने पर 18 साल की एक और लड़की ने शक्ति मिल कंपाउंड में ही अपने साथ गैंग रेप (Gang Rape) की बात बताई थी.

First Published: Jun 07, 2019 04:23:43 PM
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