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Birthday Special : जानें रतन टाटा की सफलता का राज, आप भी उठा सकते हैं फायदा

Vinay Kumar Mishra  |   Updated On : December 28, 2018 04:59 PM
Ratan Tata (फाइल फोटो)

Ratan Tata (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली:  

Ratan Tata : देश का सबसे बड़ा कारोबारी घराना टाटा ग्रुप है, लेकिन यह ग्रुप किसी मालिकाना ढांचे की जगह ट्रस्‍ट के रूप में कारोबार चलाता है. इस ग्रुप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका फायदे का बड़ा हिस्‍सा इसने ट्रस्‍टी की जेब में नहीं बल्‍कि समाज की सेवा में जाता है. ग्रुप अपनी कमाई का करीब 66 फीसदी हिस्‍सा समाज के सेवा में खर्च करता है. देश में कैंसर का सबसे बड़ा अस्‍पताल टाटा ट्रस्‍ट की चला रहा है. इसके अलावा न जानें कितनी परियाजनाएं हैं, जो टाटा ट्रस्‍ट या टाटा ग्रुप की कंपनियां चला रही हैं. रतन टाटा (Ratan Tata) टाटा संस के चेयरमैन एमेरिट्स और टाटा ट्रस्‍ट के अध्यक्ष हैं. विमानन, ऑटोमोबाइल, स्कूबा डाइविंग और वास्तुशिल्प डिजाइन जैसे विषय उनके मनपंसद शौक हैं. आज रतन टाटा (Ratan Tata) का जन्म दिन (28 दिसंबर 1937) है. उनका जन्‍म गुजरात के सूरत में हुआ था.

विरोधियों पर कभी हमलावर नहीं होते हैं रतन टाटा (Ratan Tata)
अपने कारोबारी जीवन में कई बार ऐसे मौके आए जब विरोधियों ने उनका जमकर विरोध किया. लेकिन रतन टाटा (Ratan Tata) कभी विरोधियों पर हमलावर नहीं हुए. उनका मानना है कि अगर गलत नहीं किया है तो एक न एक दिन वह अपने आप ही सही साबित हो जाएंगे.

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जानें उनकी 5 बड़ी बातें 

-लोग आप पर जो पत्थर फैंकते हैं उसका उपयोग कर स्मारक बना लें.
-आगे बढ़ने के लिए हमारे जीवन में उतार-चढ़ाव बहुत जरूरी है, क्योंकि ईसीजी (ECG) में सीधी लाइन का मतलब होता है हम जिंदा नहीं है.
-अगर आप तेज चलना चाहते हैं तो अकेले चलें. पर अगर आप लंबा चलना चाहते हैं तो साथ चलें.
-मैं सही फैसले लेने में विश्वास नहीं करता. मैं फैसलें लेता हूं और फिर उन्हें सही बनाता हूं.
-लोहे को उसकी खुद की जंग के अलावा कोई नहीं नष्ट कर सकता. इसी तरह किसी व्यक्ति को उसके खुद के माइंडसेट के अलावा कोई खत्म नहीं कर सकता.

गोद लिए बेटे हैं रतन टाटा (Ratan Tata)
रतन टाटा (Ratan Tata), नवल टाटा के बेटे हैं जिन्हें नवजबाई टाटा ने गोद लिया था. रतन टाटा (Ratan Tata) के माता-पिता 1948 में एक दूसरे से अलग हो गए थे, तब रतन टाटा (Ratan Tata) 10 और उनके छोटे जिम्मी 7 साल के थे. तब जमशेदजी टाटा के बेटे रतनजी टाटा की पत्नी नवाजबाई ने इन्हें गोद ले लिया था और पालन-पोषण किया, जिन्हें रतन टाटा (Ratan Tata) अपनी दादी मानते हैं.

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हार्वर्ड से ली उच्‍च शिक्षा
रतन टाटा (Ratan Tata) ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई के 'कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल' और माध्यमिक शिक्षा शिमला के 'बिशप कॉटन स्कूल' से की है. इसके बाद उन्होंने बी.एससी. (BSc), आर्किटेक्चर में स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के साथ 'कॉर्नेल विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क' से 1962 में पूरा किया. इसके बाद हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से 1975 में एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया.

सामान्‍य कर्मचारी के रूप में शुरू किया कॅरियर
रतन टाटा (Ratan Tata) ने टाटा ग्रुप के साथ अपने कॅरियर की शुरुआत 1961 में एक सामान्य कर्मचारी के रूप में शुरू की थी. काफी समय बाद वह संकट में घिरी राष्ट्रीय रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी (नेल्को) में प्रभारी निदेशक बने, जिसको बाद में उन्‍होंने सफल कंपनी बना दिया. इस सफलता के बाद उन्‍हें 1981 में टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष बनाया गया और बाद में 1991 में जेआरडी टाटा ने टाटा ग्रुप का जब अध्यक्ष पद को छोड़ तो वह रतन टाटा (Ratan Tata) को मिला. इस पद से भी रतन टाटा (Ratan Tata) खुद ही 28 दिसंबर 2012 को रिटायर हुए. रतन टाटा (Ratan Tata) के कार्यकाल टाटा ग्रुप की वैल्यू 50 गुने से ज्‍यादा बढ़ी.

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ऐसे लड़ते थे सम्‍मान की लड़ाई

यह बात 1999 की है तब रतन टाटा (Ratan Tata) फोर्ड के मुख्‍यालय डेट्राॅयट गए थे. इस मुलाकात में रतन टाटा (Ratan Tata) अपनी तरफ से टाटा मोटर्स को बेचना चाहते थे. लेकिन इस दौरान फोर्ड मोटर्स के बिल फोर्ड ने रतन टाटा (Ratan Tata) की बेइज्जती करते हुए कहा कि हम तुम पर बहुत बड़ा अहसान कर रहे हैं और तुम्हारा ये टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल खरीद रहे हैं. उन्‍होंने रतन टाटज्ञ से कहा कि जब गाड़ी बनानी नही आती तो धंधे में आए क्यों थे." यह बात रतन टाटा (Ratan Tata) को खटक गई और उन्‍होंने टाटा मोटर्स को बेचने का खयाल छोड़ दिया और वापस मुंबई आ गए. इसके बाद उन्‍होंने कड़ी मेहनत से टाटा मोटर्स को दुनिया की बड़ी कंपनी बना दिया. इस बीच 2009 में बिल फोर्ड की कंपनी घाटे में आ गई और दिवालिया होने के कगार पर पहुँच गई. इस दौरान टाटा ग्रुप ने उनकी कंपनी के खरीदने का एक प्रस्‍ताव दिया. जब फोर्ड की पूरी टीम मुंबई आए तो रतन टाटा (Ratan Tata) ने उनसे कहा कि टाटा मोटर्स 'जैगुआर' और 'लैंड रोवर' खरीदकर आप पर बहुत बड़ा अहसान कर रहे हैं."

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रतन टाटा (Ratan Tata) के बारे में
1. रतन टाटा (Ratan Tata) 1991 में जेआरडी टाटा के बाद समूह के पांचवें अध्यक्ष बने.
2. रतन टाटा (Ratan Tata) को 2000 में पद्‍मभूषण और 2008 में पद्‍मविभूषण से सम्मानित किया गया.
3. रतन टाटा (Ratan Tata) ने टेटली, जगुआर लैंड रोवर और कोरस जैसी कंपनियों का टाटा समूह में अधिग्रहण किया.
4. रतन टाटा (Ratan Tata) ने नैनो जैसी लखटकिया कार बनाकर आम आदमी का कार का सपना साकार किया.
5. वे इंडिका जैसी कार भी बाजार में लाए.
6. टाटा ने विकसित देशों की कई ऐसी कंपनियों का अधिग्रहण कर लिया जो अपने देश में सुपर ब्रांड थीं. 

First Published: Friday, December 28, 2018 01:01:01 PM
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