Sri Krishna Janmashtami 2018: राजस्थान का ये प्रसिध्द मंदिर जहां कृष्ण राधा नहीं बल्कि मीरा के साथ हैं विराजमान, जानें वजह

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नई दिल्ली:

आज देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम है। बाजार, मंदिर हर जगर लोग कन्हैया की भक्ति के रंग में रंगे नजर आ रहे है। मथुरा से लेकर देश के तमाम कृष्ण मंदिर में लड्डू गोपाल के जन्म कि तैयारियां चल रही है। ऐसे में आइए जानते है श्याम के उस मंदिर के बारे में जहां वो राधा के साथ नहीं बल्कि अपने भक्त के साथ विराजमान है। राजस्थान के आमेर में स्थित जगतशिरोमणी मंदिर एक ऐसा आस्था का दर है जहां भगवान कृष्ण और मीरा के प्रेम की झलत दिखती है। यह हिंदुस्तान का इकलौता ऐसा मंदिर भी है जिसके गर्भगृह में कृष्ण और विष्णु दोनों मौजूद है।

बताया जाता है कि इस मंदिर को राजा मानसिंह की रानी कर्णावती ने अपने पुत्र जगत सिंह की याद में बनवाया था। इस मंदिर का निर्माण सफेद संगमरमर और काले पत्थर से हुआ था। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक जगतशिरोमणि मंदिर की नींव साल 1599 में रखी गई थी और मंदिर 9 साल की मेहनत के बाद साल 1608 में बनकर तैयार हुआ था।

इस मंदिर में कृष्ण और मीरा की एक साथ मौजूदगी की भी एक ऐतिहासिक कहानी बताई जाती है। मीरा और कृष्ण का रिश्ता आस्था और भक्ति का वो पहलू है जो युगों युगों से प्रेम के प्रतीक के रूप में याद किया जाता रहा है। जगतशिरोमणि मंदिर इसी पवित्र प्रेम की आस्था का केंद्र है।

कहते हैं कि इस मंदिर में कृष्ण की वहीं मूर्ति स्थापित की गई है जिसकी मीरा ताउम्र पूजती रहीं और बाद में मीरा की भी मूर्ति भगवान कृष्ण के साथ यहां स्थापित कर दी गई।

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मेवाड़ के राजा भोज से मीरा की शादी हुई थी लेकिन कृष्ण उनके मन में इस तरह रम गए थे कि वो राजमहल छोड़कर इधर-उधर भटतकती रही। कहा जाता है कि जब मानसिंह की अगुवाई में अकबर की सेना ने मेवाड़ पर आक्रमण किया और मेवाड़ जीतने के बाद राजा मानसिंह कृष्ण की वो मूर्ति आमेर ले आए जिसकी मीरा पूजा किया करती थी। दावा किया जाता है कि कृष्ण की वही मूर्ति जगतशिरोमणि मंदिर में स्थापित की गई और बाद में मीरा की मूर्ति कृष्ण के साथ ही स्थापित कर दी गई।

जीते जी मीरा तो अपने आराध्य कृष्णा को नहीं पा सकीं लेकिन बताया जाता है कि जगत शिरोमणि मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के साथ मीरा का विधिवत विवाह संपन्न करवाया गया था।

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