घर में ही जानें बच्‍चे में कितनी है प्रतिभा, शोध में हुआ खुलासा

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नई दिल्ली:

विदेश में रहने वाले बच्चे जो अपने घर में परिवार वालों के साथ मातृभाषा में बात करते हैं और बाहर दूसरी भाषा बोलते हैं, वह ज्यादा अक्लमंद होते हैं। एक नए अध्ययन से यह जानकारी मिली है।

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के शोधकर्ताओं ने शोध में पाया कि जो बच्चे स्कूल में अलग भाषा बोलते हैं और परिवार वालों के साथ घर में अलग भाषा का इस्तेमाल करते हैं, वे बुद्धिमत्ता जांच में उन बच्चों के मुकाबले अच्छे अंक लाए जो सिर्फ गैर मातृभाषा जानते हैं।

स अध्ययन में ब्रिटेन में रहने वाले तुर्की के सात से 11 साल के 100 बच्चों को शामिल किया गया। इस आईक्यू जांच में दो भाषा बोलने वाले बच्चों का मुकाबला ऐसे बच्चों के साथ किया गया जो सिर्फ अंग्रेजी बोलते हैं।

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यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के असोसिएट प्रोफेसर डॉ माइकल डैलर जिन्होंने इस स्टडी का नेतृत्व किया बताते हैं, छोटी उम्र में बच्चों के अंदर मातृ भाषा में सिद्धांतों को विकसित करना ज्यादा आसान है और उसके बाद उसी के लिए किसी दूसरी भाषा में नया शब्द आसानी से सीखा जा सकता है। वैसे बच्चे जिन्हें पहली ही बार किसी अनजानी भाषा में कोई नई बात सिखाई जाती है उनके लिए उस चीज को सीखना और समझना बहुत मुश्किल होता है और ऐसे बच्चों का आईक्यू भी कमजोर होता है।

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हमारी रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि पैरंट्स घर पर बच्चों को मातृभाषा में बोलने के लिए प्रोत्साहित करें और मातृभाषा में ही बच्चों को नई-नई चीजें सिखाकर उनकी बुद्धिमत्ता का विकास कर सकते हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि द्विभाषिक होना मस्तिष्क पर सकारात्मक असर डालता है।

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