हिचकी मूवी रिव्यू: रानी मुखर्जी की एक्टिंग छू लेगी दिल

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मुंबई :

हर किसी को लाइफ में एक ऐसा टीचर जरूर मिलता है, जो उसके लिए प्रेरणा बन जाता है। उस शख्स को आप पूरी जिंदगी नहीं भूल पाते हैं। 'हिचकी' की नैना माथुर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। 4 साल बाद बॉलीवुड में कमबैक करने वाली रानी मुखर्जी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह इमोशनल रोल को पूरे दमखम के साथ कर सकती हैं।

ये है फिल्म की कहानी

नैना माथुर टॉरेट सिंड्रोम से पीड़ित है। इसकी वजह से उसे बार-बार हिचकी आती है। बचपन में 12 स्कूल बदलने पड़ते हैं। पिछले 5 सालों में 18 स्कूल उसे रिजेक्ट कर देते हैं। फिर भी वह टीचर बनना चाहती है। अपने शरीर की कमी से जूझने और समाज की ज्यादतियां सहने के बाद आखिरकार उसे गरीब बच्चों को पढ़ाने का मौका मिलता है, लेकिन यहां से शुरू होती है नैना की असली चुनौती।

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रानी की एक्टिंग जीत लेगी दिल

रानी मुखर्जी ने अपने कैरेक्टर में पूरी जान डाल दी है। उनकी एक्टिंग आपका दिल छू लेगी। बच्चों की मस्ती आपको पूरा मजा देगी। डायरेक्टर सिद्धार्थ पी मल्होत्रा ने इमोशनल स्टोरी को खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है। शुरु से अंत तक आप बोर नहीं होंगे और क्लाइमैक्स भी दमदार है। कहानी के हिसाब से गानें भी अच्छे हैं।

इससे प्रेरित है 'हिचकी'

रानी का किरदार अमेरिकन मोटिवेशनल स्पीकर और टीचर ब्रैड कोहेन से प्रेरित है। वह भी टॉरेट सिंड्रोम की वजह से कई परेशानियां झेलकर टीचर बने थे। उन्होंने अपनी लाइफ पर एक बुक लिखी, जिस पर साल 2008 में 'फ्रंट ऑफ द क्लास' नाम से मूवी बनी। 'हिचकी' की कहानी इसी फिल्म पर आधारित है।

कहानी में सब कुछ स्वाभाविक है, लेकिन रानी ने सिल्वर स्क्रीन पर वापसी के लिए एक मजबूत कहानी को चुना है। उन्होंने अपने किरदार के साथ पूरी तरह न्याय किया है। अगर आप रानी के फैन हैं और लीक से कुछ अलग हटकर देखना चाहते हैं तो बच्चों के साथ सिनेमाघर जरूर जाएं।

यहां देखें फिल्म का ट्रेलर:

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