महात्मा फुले और सावित्रीबाई को भारत रत्न दें: महाराष्ट्र सरकार

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मुंबई:

महाराष्ट्र सरकार ने 19वीं सदी के समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने के लिए केंद्र से अनुशंसा की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

राष्ट्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग जाति (ओबीसी) महासंघ के सम्मेलन में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने फुले दंपति के निधन के एक सदी के बाद उन्हें मरणोपरांत यह सम्मान देने के लिए केंद्र से अनुशंसा करने की जानकारी दी।

संयोग से, फड़णवीस ने ऐसा ही एक बयान दो साल पहले दिया था कि उन्होंने केंद्र से महात्मा फूले की 125वीं पुण्यतिथि पर उन्हें यह सम्मान देने की अनुशंसा की है।

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ज्योतिराव गोविंदाराव फुले (महात्मा फुले) का जन्म 11 अप्रैल, 1827 और उनकी पत्नी सावित्रीबाई के. पाटिल का जन्म तीन जनवरी, 1831 को सतारा के अलग-अलग गावों में हुआ था।

बाद में 13 वर्षीय ज्योतिराव का विवाह एक सम्पन्न किसान की नौ वर्षीय बेटी सावित्रीबाई के साथ हो गया था।

दोनों नीची जाति से थे, महात्मा फुले विचारक, समाज सुधारक, जाति-विरोधी कार्यकर्ता और लेखक थे, वहीं उनकी पत्नी उनकी अनुगामी होने के अतिरिक्त शिक्षाविद तथा कवयित्री थीं। उन्होंने दहेज प्रथा के खिलाफ की आवाज उठाई थी।

पति-पत्नी ने जाति प्रथा, छुआछूत और हिंदू पारिवारिक जीवन में सुधार के लिए लड़ाई लड़ी तथा बाद में नीची जाति के लोगों को समान अधिकार दिलाने के लिए 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की थी।

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