World Photography day: जानें कैसे हुई तस्वीरों की दुनिया की शुरूआत, क्या है इस दिन को मनाने के पीछे का इतिहास

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नई दिल्ली :

आज दुनिया भर में वर्ल्ड फोटोग्राफी डे मनाया जा रहा है। कैमरे के लैंस से अपनी दुनिया देखने वाले यानी कि फोटोग्राफर्स के लिए आज का दिन यकीनन बहुत खास है। क्या आपने कभी सोचा है कि तस्वीरें के बिना हमारा संसार कैसा होता, क्योंकि कई बार तस्वीरें अपने आप में तमाम कहानियां बयां कर देती है। तो आइए जानते है क्या है इसका इतिहास, कहां से हुई थी फोटोग्राफी की शुरूआत।

1. सबसे पहले फोटोग्राफी का श्रेय फांस के निसेफर नीप्स और लुई जैक मांडे डगेर को जाता है। ये दावा किया जाता है कि साल 1824 में निसेफोर नीप्स ने हेलियोग्राफी नाम की पहली फोटोग्राफी प्रोसेस की शुरूआत किया था और उन्हें पूरी फिल्मिंग प्रोसेस में काफी समय लगा था। इसके बाद निसेफर ने अपने साथ लुई जैक मांडे डॉगेर को मिलाया। साल 1832 में दोनों ने मिलकर पूरी फिल्मिंग प्रक्रिया के समय को कम कर के एक दिन कर दिया गया था।

2. 1833 में निसेफ की मौत हो गई जिसके बाद साल 1838 में डॉगेर ने फोटोग्राफी का अपना प्रोसेस डिवेलप का आविष्कार किया। इस टेक्निक को डॉगोरोटाइप दिया गया।

3. इस आविष्कार का ऐलान फ्रांस सरकार ने 19 अगस्त, 1839 में किया। इसी दिन की याद में हर साल 19 अगस्त को वर्ल्ड फोटोग्राफी डे मनाया जाता है।

4. आधिकारिक तौर पर देखा जाए तो इस दिन की शुरुआत साल 2010 में हुई थी। इस दिन को खास बनाया ऑस्ट्रेलिया के एक फोटोग्राफर ने। उसने अपने साथी फोटोग्राफरों के साथ मिलकर इस दिन इकट्ठा होने और दुनियाभर में इसका प्रचार प्रसार करने का फैसला किया। उन्होंने इस दिन अपने 270 साथी फोटोग्राफरों के साथ मिलकर उनकी तस्वीरें ऑनलाइन गैलरी के जरिए पेश की।

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5. पहला कलर फोटोग्राफ 1861 में थॉमस सतन ने लिया। यह तीन ब्लैक और वाइट फोटोग्राफ का सेट था जिसे लाल, हरे और नीले फिल्टर्स से लिया गया था।

6. पहला डिजिटल फोटोग्राफ 1957 में लिया गया था। इसके 20 साल बाद कोटेक (Kotak) कंपनी के इंजिनियर ने पहला डिजिटल कैमरा आविष्कार किया था।

हालांकि अब फोटोग्राफी मात्र शौक नहीं रहा है बल्कि ये अब एक प्रोफेशन भी बन चुका है। इसमें अब तमाम लोग अपना करियर बना रहे है। आज फोटोग्राफी के बलबूते ही हम दुनिया के तमाम रंग देख पा रहे है। 

 

 

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