NRC की अंतिम सूची में शामिल नहीं किये गये लोगों को किया जाएगा देश से बाहर: राम माधव

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नई दिल्ली:

बीजेपी महासचिव राम माधव ने सोमवार को कहा कि असम में NRC की अंतिम सूची में शामिल नहीं किये गये लोगों से वोट देना का अधिकार ले लिया जाएगा और उन्हें देश से बाहर निकाल दिया जाएगा। वहीं असम के सीएम सर्वानंद सोनोवाल ने कहा है कि गैर-कानूनी प्रवासी देश के लिए बड़ी चुनौती है। असम में लागू की गई NRC की स्कीम पर सीएम ने कहा कि यह देश के सभी राज्यों में लागू की जानी चाहिए। 

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने सोमवार को दिल्ली में ‘एनआरसी: डिफेंडिंग दि बॉर्डर्स, सेक्यूरिंग दि कल्चर’ विषय पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि NRC में 3डी फॉर्म्युला- डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट अपनाया जाएगा। साथ ही कहा कि लिस्ट में लोगों के नाम न होने पर उनसे वोट देने का अधिकार वापस ले लिया जाएगा और उन्हें देश से बाहर निकाल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि, 'NRC लागू होने के बाद तीन चरण होंगे। पहले सभी अवैध प्रवासियों की पहचान की जाएगी। दूसरा वोटर लिस्ट से उनके नाम निकाले जाएंगे, साथ ही उन्हे सभी सरकारों से मिलने वाले लाभों से वंचित किया जाएगा। इसके बाद अंतिम चरण में अवैध प्रवासियों को देश से बाहर कर दिया जाएगा।'

सीएम सर्वानंद सोनोवाल ने सोमवार को दिल्ली में ‘एनआरसी: डिफेंडिंग दि बॉर्डर्स, सेक्यूरिंग दि कल्चर’ विषय पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि देश के सभी राज्यों में यह NRC लागू किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कुछ राज्यों में यह लागू होने से वह अन्य राज्यों में जा सकते है।

उन्होंने कहा, ' अवैध प्रवासी देश के लिए बड़ी चुनौती है और इस समस्या का समाधान है कि देश के सभी राज्यों में NRC लागू कर दिया जाए। यह एक ऐसा दस्तावेज है जिससे हम सभी भारतीयों का संरक्षण कर पाएंगे।'

बता दें कि एनआरसी का पहला ड्राफ्ट 1 जनवरी 2018 को जारी किया गया था जिसमें 3.29 करोड़ लोगों में से 1.9 करोड़ लोगों को बतौर भारतीय शामल किया गया था।

वहीं 30 जुलाई को दूसरा और आख़िरी ड्राफ्ट रिलीज किया गया जिसमें 3.29 करोड़ आवेदकों में से बतौर नागिरक कुल 2.89 करोड़ लोगों को शामिल किया गया जबकि 40 लाख़ लोगों को एनआरसी लिस्ट से बाहर रखा गया।

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गौरतलब है कि एनआरसी की लिस्ट में वैसे लोगों को शामिल किया गया है जिन्हें सन 1951 में भारतीय नागरिक माना गया था। लिस्ट तैयार करने का प्रमुख मकसद असम में रह रहे गैरप्रवासी भारतीयों की पहचान करना है।

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