भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव की फिल्म 'संघर्ष' को देखने रक्षा बंधन पर उमड़ी भीड़

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पटना:

रक्षा बंधन के अवसर पर रविवार को सुपरस्टार खेसारीलाल यादव और काजल राघवनी स्टारर फिल्म 'संघर्ष' को देखने पटनाइटस की भीड़ उमड़ पड़ी। पटना के सिने पोलिस में दर्शकों ने फिल्म का जमकर लुत्फ उठाया और कहा कि अगर ऐसी फिल्में बनेंगी तो भोजपुरी फिल्में वे जरूर देखेंगे। फिल्म 'संघर्ष' के लिए एक प्रेस प्रीमियर रखा गया था, जिसमें फिल्म के निर्माता रत्नाकर कुमार, निर्देशक पराग पाटिल, अभिनेता अवधेश मिश्रा शामिल हुए।

इस दौरान फिल्म देखने आए दर्शकों ने अवधेश मिश्रा के साथ सेल्फी ली। लोगों का कहना था कि फिल्म बहुत अच्छी बनी है। इसमें कोई अश्लीलता नहीं है। फिल्म देखकर कहीं से नहीं लगा कि इस फिल्म का स्तर खराब है। 

अवधेश मिश्रा ने फिल्म को लेकर कहा कि यह महिला प्रधान फिल्म है और इसे देश भर में अच्छा रेस्पांस मिला है। इससे हम लोगों को खुशी है और उससे ज्यादा खुशी इस बात की है कि भोजपुरी सिनेमा में कोई फिल्म पहली बार सिंगल स्क्रीन के साथ मल्टीप्लेक्स में रिलीज हुई और उसके सारे शोज हाउसफुल चल रहे हैं। फिल्म संघर्ष की यह कामयाबी भोजपुरी सिनेमा और भोजपुरी फिल्मों के निर्माता के लिए पॉजिटिव साइन है।

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उन्होंने कहा कि बीते कुछ सालों में भोजपुरी काफी बदला है। यही वजह है कि 'संघर्ष' आज मल्टीप्लेक्स के अंदर है। इस फिल्म के प्रति दर्शकों में उत्सुकता है। फिर भी बहुत जगहों पर नहीं पता चल पाया है कि भोजपुरी फिल्म संघर्ष मल्टी स्क्रीन पर है, लेकिन जानकारी के साथ - साथ लोगों की भीड़ बढ़ रही है और रफ्तार भी तेज हो रहा है। 

अवधेश मिश्रा ने बताया कि इस फिल्म ने बता दिया है कि अगर फिल्मों को मल्टीस्क्रीन पर ले जाना है तो कंटेंट अच्छा हो। क्योंकि कंटेंट ही लोगों को पसंद आती है। पुराने दिनों में अश्लीलता दिखती थी, मगर अब यह चीज बिलकुल बदल गया है। उन्होंने कहा कि अच्छी फिल्मों के निर्माण के लिए प्रोड्सर को हिम्मत करनी होगी।

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अवधेश मिश्रा ने कहा कि भोजपुरी की फिल्में अपने ही घर में उपेक्षित है। भोजपुरी सिनेमा अभी बच्चा है और अनाथ है। इसको यहां की सरकार और अपने ही लोगों का पूरा सपोर्ट नहीं मिलता है। लेकिन फिर भी भोजपुरी मेकर्स अपने सार्थक संघर्ष के साथ संघर्ष जैसी फिल्म लेकर आ रहे हैं, तो उम्मीद है कि आगे भी भोजुपरी सिनेमा अपनी बुलंदियों को छू कर रहेगी। लोग भोजपुरी फिल्मों को ठीक वैसे ही देखेंगे, जैसे साउथ या बालीवुड की फिल्मों को देखते हैं। 

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